जगह-जगह थूक कर कोरोना फैलाने की अफ़वाहबाजी ने ली झारखंड में एक शख़्स की जान

Estimated read time 2 min read

झारखंड के गुमला जिले में 7 अप्रैल मंगलवार की शाम अल्पसंख्यक समुदाय के जगह-जगह थूक कर कोरोना फैलाने की अफवाह के चलते दो समुदायों के बीच सांप्रदायिक झड़प हो गई। झड़प में एक युवक ‘बोलवा’ की मौत हो गई। दो लोग घायल भी हैं। घटना सिसई थाना क्षेत्र की कुदरा और सिसई बस्ती में घटित हुई है। यहां सख्ती से लॉक डाउन लागू कराया गया है। पुलिस तैनाती बढ़ा दी गई है। मामले में 12 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। मृतक बोलवा पेशे से किसान थे और उनके बाद परिवार में पत्नी के अलावा तीन बेटी और एक बेटा है।

सामंतवादी बदनामी से बचने के लिए प्यार की कहानी को सांप्रदायिक रंग दिया गया

एक ग्रामीण के मुताबिक मंगलवार देर रात कुदरा गांव में एक प्रेमी य़ुगल (मुस्लिम लड़का और हिंदू लड़की) को पकड़ा गया था। दोनों एक दूसरे से बहुत समय से प्यार करते थे। अतः गांव-समाज की नज़र बचाकर रात के अंधेरे में छुप-छुप कर मिलते थे। लड़की कुदरी गांव की थी जबकि लड़का पास के गांव सिसई बस्ती का था। 

इस दरम्यान कुदरा गांव में ये हल्ला मचा दिया गया कि मुस्लिम समुदाय के लोग कोरोना संक्रमण फैलाने गांव आए हैं और वो जगह-जगह थूक रहे हैं। इसके बाद गांव वालों ने पकड़े गए प्रेमी युवक की खूब जमकर पिटाई कर दी।

वहीं सिसई के मंगरा उरांव के मुताबिक “पहले कुदरा गांव में हल्ला उड़ा कि मुसलमान लोग कोरोना फैलाने के लिए घूम घूमकर जगह जगह थूक रहे हैं ।जबकि सिसई बस्ती में हल्ला उड़ा कि हिन्दू लोग मुसलमानों को मारने के लिए आ रहे हैं। इससे सिसई बस्ती के लोग भी भड़क गए और बड़ी संख्या में ग्रामीण सड़क पर जमा हो गए। इस दौरान उसी गांव का एक आदिवासी युवक ‘बोलवा’ पूरे मामले की जानकारी लेने के लिए घर से निकला तो दूसरे समुदाय द्वारा मार मारकर अधमरा कर दिया गया”। 

सूचना पाते ही घटनास्थल पर पहुंची गुमला जिला परिषद अध्यक्ष किरण बारा घायल युवक ‘बोलवा’ को अपनी गाड़ी से सिसई रेफरल अस्पताल लेकर गईं। जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। जबकि बाकी दो घायलों को राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (रिम्स) रेफर किया गया है।

सुप्रीटेंडेंट ऑफ पुलिस अंजनी झा के मुताबिक, “सिसई थाना क्षेत्र के कुदरा में अफवाह के चलते मंगलवार शाम एक युवक के साथ मारपीट की गई। थोड़ी देर बाद सिसई बस्ती में एक अन्य के साथ भी मारपीट हुई। सिसई बस्ती में घायल ने इलाज के दौरान रेफरल अस्पताल में दम तोड़ दिया। कुदरा बस्ती के घायल व एक अन्य को इलाज के लिए रिम्स रेफर किया गया है। वह मौके पर मौजूद हैं अफवाह फैलाई गई है। फिलहाल माहौल तनावपूर्ण है, कोशिश है कि जो लोग जमा हो रहे हैं, उन्हें रोका जाए। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है।”

तीन दिन पहले ट्विटर पर ‘#थूकना’ ट्रेंड कराया गया 

तीन दिन पहले दक्षिणपंथी हिंदुत्ववादी ट्रोल गैंग द्वारा ट्विटर पर #थूकना ट्रेंड करवाया गया। तरह तरह के ट्वीट करके मुस्लिम समुदाय के खिलाफ़ नफ़रत फैलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई। 

ह्वाट्सएप पर फर्जी खबरें प्लांट करके फैलाई गईं। पंजाब से लेकर झारखंड तक एक सी ख़बर बस स्थानीय इलाके का नाम डालकर फैलाया गया कि फला जगह तबलीगी जमात के तीन कोरोना संक्रमित मुस्लिम लोगों पर थूकते हुए पकड़े गए। 

इसके अलावा थूकने पर तरह-तरह के मीम और कार्टून बनाकर लोगों को प्रतिक्रिया देने के लिए उकसाया गया। इससे पहले कथित मुख्यधारा का सांप्रदायिक मीडिया (न्यूज चैनल/ अख़बार) ने पहले कानपुर के अस्पताल में क्वारंटाइन में रखे गए तबलीगी जमात के लोगों द्वारा स्वास्थ्यकर्मियों पर थूकने की बता चलाई। हालांकि बाद में ये आरोप भी बेबुनियाद निकला और मोबाइल धारी स्वास्थ्यकर्मी और सीसीटीवी युक्त अस्पताल में हुए इस कथित आरोप का कोई सबूत नहीं दे पाए।

फिर एम्स के स्वास्थ्यकर्मियों को परेशान करने की बात चलाई गई और अभी हाल ही में रायपुर एम्स में स्वास्थ्यकर्मियों पर थूकने की बात पूरी बेशर्मी के साथ प्रसारित की गई। एम्स रायपुर ने अपने ट्विटर हैंडल से ऐसी किसी भी घटना को नकारते हुए टीवी पर चलाई जा रही खबरों को झूठा और बेबुनियाद बताया है। 

एक बार ख़बर चल जाने के बाद इनका कितना भी खंडन किया जाए ये अपना काम तो कर ही चुकी होती हैं।  

इससे भी पहले मीडिया द्वारा एक मुस्लिम फल विक्रेता के पुराने वीडियो को फल में थूक लगा कर कोरोना फैलाने का वीडियो बनाकर बहुसंख्यक समुदाय की भावनाओं को भड़काया गया। बाद में पुलिस द्वारा इसका भी खंडन किया गया। मध्यप्रदेश रायसेन की पुलिस ने बताया कि शेरू खां नामक व्यक्ति मानसिक रूप से बीमार है उसका इलाज चल रहा है और ये वायरल वीडियो दो महीने पुराना है। 

झारखंड में घटी सांप्रदायिक हिंसा की घटना मीडिया और सोशल मीडिया पर दक्षिणपंथी गैंग द्वारा फैलाए गए फर्जी और विद्वेषपूर्ण खबरों का नतीजा थी। ऐसा ही माहौल देश के तमाम शहरों और गांवों में भी बन रहे हैं। यदि समय रहते इन फर्जी खबरों और नफरती मेसेज पर लगाम न लगाई गई तो झारखंड की घटना देश के दूसरे हिस्सों में भी दोहराई जा सकती है।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)  

You May Also Like

More From Author

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments