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सेंगर पर अब पॉक्सो एक्ट के तहत भी मुकदमा चलेगा, दुष्कर्म मामले में आरोप तय

उन्नाव रेप केस के मुख्य अभियुक्त कुलदीप सिंह सेंगर पर अब यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण कानून (पॉक्सो ऐक्ट) के तहत भी मुकदमा चलेगा। दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट में सेंगर के खिलाफ पॉक्सो एक्ट की दो धाराओं के तहत आरोप लगाए (फ्रेम) गए हैं। कोर्ट ने सेंगर के सहयोगी शशि सिंह पर नाबालिग लड़की के अपहरण के मामले में आरोप फ्रेम किया है। भाजपा  से निष्कासित उत्तर प्रदेश के विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धाराओं 120 बी (आपराधिक षड्यंत्र), 363 (अपहरण), 366 (अपहरण एवं महिला पर विवाह के लिए दबाव डालना), 376 (बलात्कार) और बाल यौन अपराध संरक्षण कानून (पॉक्सो) की प्रासंगिक धाराओं के तहत आरोप तय किए हैं।

कोर्ट ने प्रथम दृष्टया पाया है कि सेंगर के खिलाफ आरोप तय करने के लिए साक्ष्य मौजूद हैं। कोर्ट ने विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर गैंगरेप और पॉस्को एक्ट 120 बी के तहत आरोप तय किए हैं। सीबीआई ने बृहस्पतिवार को अदालत को बताया था कि सेंगर और उसके भाई ने लड़की के पिता पर हमला किया और तीन राज्य पुलिस अधिकारियों एवं पांच अन्य के साथ मिलकर शस्त्र कानून के एक मामले में उसे फंसाया। वहीं कुलदीप सेंगर और शशि सिंह ने अदालत में कहा कि उन्हें झूठे आरोपों में फंसाया गया है। उन्होंने मामले में सुनवाई किए जाने की मांग की।

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर आरोपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली की तिहाड़ जेल में शिफ्ट कर दिया गया है। पीड़िता को भी इलाज के लिए एम्स लाया गया है। जहां उसका उपचार चल रहा है। घायल पीड़िता के वकील को भी एम्स लाया गया है। वह अभी कोमा में है। अप्रैल 2017 में नाबालिग लड़की ने उन्नाव के बांगरमऊ से विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर रेप का आरोप लगाया था। उसने विधायक के करीबियों पर भी उसके यौन शोषण का आरोप लगाया था। मामला सामने आने के बाद सूबे की योगी सरकार ने इसकी सीबीआई जांच की सिफारिश की थी।

इस बीच उन्नाव कांड से जुड़े दुष्कर्म पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में बृहस्पतिवार को तीस हजारी कोर्ट में सुनवाई हुई। सीबीआई ने अदालत को बताया कि पीड़िता के पिता को अवैध हथियार रखने के मामले में गलत फंसाया गया था। पुलिस से मिलीभगत कर आरोपितों ने उनसे हथियार की बरामदगी करवाई थी। पुलिसकर्मियों और आरोपितों के बीच इस दौरान मोबाइल फोन पर हुई बातचीत का डाटा भी उपलब्ध है। सीबीआई ने अदालत में कहा कि पीड़िता के पिता को भीड़ ने पीटा था, जिसके कारण हिरासत में उनकी मौत हो गई थी। उन्हें पहले बुरी तरह पीटा गया था और उनके कपड़े फाड़ दिए गए थे। इसके बाद उनके खिलाफ पुलिस को मोबाइल फोन पर शिकायत दी गई थी। शिकायतकर्ता ने कुलदीप सेंगर से भी तभी बातचीत की थी। पीड़िता के पिता पर केस दर्ज होने के बाद बातचीत बंद हो गई।

सीबीआई ने कोर्ट को बताया कि  पुलिसकर्मियों व आरोपियों के बीच मोबाइल फोन पर बातचीत का डाटा भी मौजूद है। पीड़िता के पिता को भीड़ ने पीटा था जिसके कारण हिरासत में उसकी मौत हो गई थी। सीबीआई ने कहा कि इन आरोपियों पर आरोप तय करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य हैं। इसके बाद उसके खिलाफ पुलिस को मोबाइल पर उसके खिलाफ शिकायत दी गई थी। इस शिकायतकर्ता ने कुलदीप सेंगर से भी तभी बातचीत की थी। पीड़िता के पिता के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद इन लोगों के बीच बातचीत बंद हो गई थी। इन तथ्यों के मद्देनजर आरोपियों पर आरोप तय करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य हैं। सीबीआई ने यह भी आरोप लगाया कि जो कट्टा व चार कारतूस पीड़िता की निशानदेही पर बरामद किया गया वह उसका नहीं था और उस पर यह हथियार थोपा गया था। आरोपियों ने पुलिस के साथ मिलीभगत कर यह किया था।

उन्नाव गैंगरेप की पीड़ित लड़की के पिता की मौत के चश्‍मदीद गवाह यूनुस की भी 18 अगस्‍त को अचानक मौत हो गई थी । बताया गया कि वह अचानक बीमार हो गया था। बाद में यूनुस के परिजनों ने भी उसके शव को बगैर पोस्‍टमॉर्टम कराए जल्‍दबाजी में दफना दिया। यूनुस उन्‍नाव कांड में मुख्‍य गवाह था। उसकी मौत के बाद पीड़िता के चाचा ने एसपी उन्‍नाव हरीश कुमार से दोबारा पोस्‍टमॉर्टम कराए जाने की गुहार लगाई थी।

(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल इलाहाबाद में रहते हैं।)

This post was last modified on August 9, 2019 6:48 pm

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