Saturday, November 27, 2021

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दिल्ली, पंजाब के बाद अब बंगाल में भी उठ रही है सिख मैरिज एक्ट की मांग

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आसनसोल। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की विजय के साथ ही तीसरी बार ममता बनर्जी प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं। उनके तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने के पीछे अल्पसंख्यक समुदायों का अहम योगदान है। अल्पसंख्यक समुदाय का मतलब सिर्फ मुस्लिम ही नहीं है। बल्कि प्रदेश में ईसाई और सिख समुदाय भी हैं। इसलिए अब यह समुदाय अपनी मांग के लिए राज्य सरकार से गुहार लगा रहे हैं।

ताजा मामले में एक बार फिर शिल्पांचल (पश्चिम बर्दवान जिला) में सिख मैरिज एक्ट की मांग उठ रही है। कुछ दिन पहले ही सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी सिख वेलफेयर सोसायटी द्वारा राज्य के कानून मंत्री मलय घटक को आनंद कारज एक्ट अर्थात सिख मैरिज एक्ट(2012)के लिए आवेदन दिया गया था। ताकि राज्य में इसे मान्य बनाया जाए। इसके बाद आठ जून को एक बार फिर गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी (बर्नपुर) द्वारा आसनसोल के जिला शासक विभु गोयल को एक ज्ञापन सौंपा गया। जिसमें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से इसे लागू करने की अपील की गई।

आसनसोल एक इंडस्ट्रियल एरिया है। जिसके कारण यहां प्रवासी लोगों की संख्या अच्छी खासी है। यहां गैर बंगाली भाषी भी 55 से 60 प्रतिशत हैं। ऐसे में जिस क्षेत्र से आनंद कारज एक्ट को लागू करने की मांग उठ रही है। वहां सिखों की संख्या 2011 की जनगणना के अनुसार 1.07% है। जो तृणमूल कांग्रेस के समर्थक रहे हैं। गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी(बर्नपुर) के जनरल सेक्रेटरी सुरेंद्र सिंह का कहना है कि टीएमसी की सरकार के दौरान ही उन्होंने इसके लिए आवाज उठाई थी। लेकिन किसी ने इस पर ध्यान नहीं दिया। जिसके लिए सिख समुदाय में इसको लेकर थोड़ा रोष भी है। क्योंकि नॉर्थ ईस्ट में भी यह लागू है। उनका कहना है कि केंद्र सरकार द्वारा जब इसे लागू किया गया है तो पश्चिम बंगाल सरकार इसे लागू क्यों नहीं कर रही है। इस बार फिर उठाई गई आवाज के बारे में उनका कहना है कि इस बार फिर हमने बड़ी उम्मीद के साथ यह मांग रखी है, उम्मीद करते हैं इस बार पूरी की जा सकती है।

पश्चिम बंगाल में सिखों की संख्या 0.7% है। जो अपने अधिकारों के लिए समय-समय पर मांग करते रहते हैं। सिखों द्वारा सिख मैरिज एक्ट के बारे में आसनसोल जिला कोर्ट के वकील पोदीप महतो का कहना है कि जिस एक्ट की मांग यहां कि जा रही है वह केंद्र सरकार द्वारा पारित किया गया है। जिसके तहत पश्चिम बंगाल में इसे लागू करने के लिए विधानसभा से एक कानून पारित करना होगा। यह संविधान के अनुसार होगा। इसमें कोर्ट कुछ नहीं कर सकता है। वैसे जनता के हित के लिए सरकार कोई भी कदम उठा सकती है। इसलिए पारित होगा या नहीं इस बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता है। हां, लेकिन इसके लिए पहले सीएम को एक पत्र लिखकर देना होगा। जिसके तहत यह मांग की जाएगी।

आपको बता दें जनसंख्या को ध्यान में रखते हुए शिल्पांचल से ही लगातार सिख मैरिज एक्ट(2012) की मांग होती रही है। तृणमूल सरकार के पिछले कार्यकाल के दौरान साल 2018 में भी आसनसोल गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी द्वारा इस कानून की मांग की जा चुकी है।

(आसनसोल से पूनम मसीह की रिपोर्ट।) 

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