कश्मीर: बेटे ने सीआरपीएफ पर लगाया पिता की हत्या का आरोप, पुलिस ने किया खारिज

एक जुलाई की सुबह कश्मीर के बारामूला जिले के सोपोर में बशीर अहमद ख़ान नामक 64 वर्षीय व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी गई। बशीर अहमद के अलावा दीप चंद नामक एक सीआरपीएफ जवान की भी मौत हो गई।

पुलिस के आधिकारिक बयान के मुताबिक हमला सोपोर के मॉडल टाउन इलाके के पास कल सुबह करीब 7:30 बजे हुआ जब 179 बटालियन के जवान इलाके की पेट्रोलिंग के लिए गुजर रहे थे। 

सीआरपीएफ के जवान अपने वाहन में सवार थे और क्षेत्र में चेक प्वाइंट ड्यूटी के लिए तैयार थे। तभी पास की मस्जिद से हमला हुआ। हमले में सीआरपीएफ के एक हेड कांस्टेबल दीप चंद वर्मा और 65 वर्षीय नागरिक बशीर अहमद खान की मौत हो गई, जबकि सीआरपीएफ के तीन जवान भोय राजेश, दीपक पाटिल और नीलेश चावड़े को चोटें आईं। 

तीनों घायल सीआरपीएफ कर्मियों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। हमले के बाद, हमलावरों को पकड़ने के लिए क्षेत्र को घेरा गया था। हालांकि, इस संबंध में कोई गिरफ्तारी नहीं हुई।

वहीं मरहूम बशीर अहमद के बेटे फारूक अहमद का कहना है कि बुधवार की सुबह 6 बजे, “वे फज्र की नमाज के तुरंत बाद सोपोर के लिए रवाना हो गए। तीन साल का बबलू (आयद) ने अपने नाना के साथ जाने के लिए जोर दिया। जब वह नहीं माना, तो उसके नाना उसे साथ ले जाने के लिए तैयार हो गए। गोली लगने पर बबलू उनकी गोद में था। आपने देखा होगा कि कैसे वह अपने नाना को जगाने की कोशिश कर रहा था, पेशे से ठेकेदार बशीर अहमद घरेलू काम से सोपोर के रास्ते हंदवाड़ा जा रहे थे। 

3 साल का अयाद जहाँगीर (बबलू) प्रत्यक्षदर्शी है

मरे पड़े बशीर अहमद ख़ान के पेट पर बैठे अयाद की फोटो कल सोशल मीडिया पर वायरल हुई। इस तस्वीर के आने के बाद कई तरह के आरोपों ने जन्म लिया। घटना के समय का एक वीडियो भी वायरल हुआ है जिसमें सीआरपीएफ के जवान मरहूम बशीर अहमद ख़ान की लाश को कुचलते हुए दिख रहे हैं।

घटना के बाद घर पहुँचा तीन वर्षीय बच्चा आयद एक वीडियो में घटना के बारे में बता रहा है। वो ये भी बता रहा है कि पुलिस ने मारा।

बशीर ख़ान की बीवी एक वीडियो में, चीखते हुए आरोप लगा रही हैं कि सरकारी बलों ने उनके शौहर को मारा और फिर बच्चे को उनके शरीर के ऊपर बिठा दिया। मारे गए युवक की पत्नी को उसके घर पर विलाप करते हुए देखा जा सकता है, “उन्होंने उसे मार डाला और उसके बाद उसके तीन वर्षीय पोते को उसके शरीर पर रख दिया। बच्चे के कपड़े उसके दादाजी के खून से लथपथ हैं। वह आतंकवादी नहीं थे। वह एक छोटे कर्मचारी थे।”

वहीं मरहूम बशीर ख़ान की बेटी ने अपने एक बयान में ‘द कश्मीर वालेला’ को बताया कि उसके पिता को कार से नीचे लाया गया और गोली मारकर हत्या कर दी गई। “मेरे पिता को गोली मारने वाले को मार डालो, मेरे तीन साल के बेटे की दुर्दशा की कल्पना करो, कि उस पर क्या बीती होगी? उन्होंने यह भी नहीं सोचा कि एक मासूम बच्चा उनके साथ है।”

मरहूम के बेटे सुहैल अहमद सीआरपीएफ की क्रॉस फायरिंग में मौत होने की थियरी पर सवाल उठाते हुए पूछते हैं कि बशीर ख़ान फायरिंग के बीच अपनी कार से क्यों बाहर आए होंगे? जबकि उनकी कार पर कोई गोली का निशान नहीं है। वे कहते हैं कि वह क्रॉस-फायरिंग में मारा गया था। तब उन्हें वाहन के अंदर ही मर जाना चाहिए था।”

वहीं मरहूम के बड़े बेटे का कहना है कि- घटना के बाद लोगों ने मुझे फोन किया और बताया कि तुम्हारे वालिद साहेब की सीआरपीएफ ने कार से उतारकर गोली मार दिया है। उनसे साथ उनका नाती मेरे बहन का तीन साल का बच्चा था उसको उनके गोद में रखकर ही गोली मार दिया ऐसा वहां मौजूद लोगों का कहना है। हमने ये सुना है कि वहां पर मिलिटेंट ने सीआरपीएफ वालों पर हमला किया था उनमें उनके कुछ लोग हताहत हुए थे। उन्होंने उसका सारा गुस्सा हमारे वालिद साहेब पर उतार दिया और उन्हें कार से उतारकर उन्हें गोलियों से भून दिया। हालांकि उनकी उम्र 65 वर्ष है। ये कोई बहुत बहादुरी का काम नहीं किया है। यह कोल्ड ब्लडेड मर्डर है। कितनी बहादुर है हिंदोस्तान की फौज़। और लद्दाख में सिटिंग डक्स की तरह चीनियों के हाथों उनकी बखरियां बनाई गईं। और कश्मीरियों पर पूरी बहादुरी दिखाते हैं वो। निहत्थे बूढ़े व्यक्ति की हत्या करके हिंदोस्तान की फौज ने अपनी बहादुरी का प्रदर्शन किया है।” 

आतंकियों के डर से सीआरपीएफ पर आरोप लगा रहे घर वाले – आईजी विजय कुमार 

आईजी विजय कुमार ने बशीर ख़ान के परिवार के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि “ मैं उन लोगों से पूछना चाहता हूँ क्यों वे वहां घटनास्थल पर मौजूद थे? क्या उन्होंने खुद देखा है कि किसने फायर किया है?” पुलिस बल पर अपने पिता की हत्या करने का आरोप लगाकर श्रीनगर से सर्कुलेट किया जा रहा वीडियो संदेश पूरी तरह से आधारहीन है। मिलिटेंट के डर से मरहूम का बेटा-बेटी ऐसा वीडियो जारी किए हैं”। साथ ही आई जी विजय कुमार ने दावा किया कि सरकारी बलों की ओर से कोई बदले की कार्रवाई नहीं की गई। 

अब अगर आई जी साहेब के ही तर्क से ये सवाल पूछा जाए कि आप वहां मौजूद थे क्या? आखिर आपको कैसे पता कि वो आतंकियों के डर से सीआरपीएफ पर अपने पिता की हत्या का आरोप लगा रहे हैं। इसका ये भी अर्थ निकलता है कि आईजी साहेब पूर्वाग्रह से ग्रस्त हैं और उन्हें लगता है कि मिलिटेंट का मरहूम बशीर ख़ान के घर परिवार आना जाना है। 

वहीं पुलिस महानिरीक्षक, विजय कुमार ने पत्रकारों को जानकारी देते हुए आगे कहा कि “गोलीबारी के समय वहां कोई पब्लिक मूवमेंट नहीं था। मिलिटेंट ने स्थानीय मस्जिद के परिसर में एक पूरी मैगजीन और एक इस्तेमाल की हुई मैगजीन जिसमें से 30 गोलियां दागी गई थीं, छोड़कर भागे थे।”

वहीं वायरल फोटो के सवाल पर विजय कुमार ने कहा, “मोबाइलों के साथ ऑपरेशन क्षेत्र में जाना गलत है। मैं यह सुनिश्चित करूंगा कि ऑपरेशन के लिए जा रही पुलिस टीमें अपने साथ मोबाइल नहीं ले जायेंगी, जिससे उनके जीवन को खतरा हो सकता है।”

जुल्फिकार हसन, एडीजी सीआरपीएफ कहते हैं कि यह एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। कुछ लोग इसे दूसरा मोड़ देना चाहते हैं ये कहकर कि मरहूम बशीर ख़ान को सीआरपीएफ ने कार से उतारकर शूट कर दिया। ये पूरी तरह से झूठ है।

वहीं सोपोर पुलिस का बयान है कि गलत ख़बर फैलाने वालों के खिलाफ़ सख़्त कार्रवाई की जाएगी।

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कश्मीरी नेताओं की प्रतिक्रिया

पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती ने अपनी मां के हैंडल से ट्वीट किया: “सोपोर में 65 वर्षीय नागरिक की मौत के कारण के बारे में दो संस्करण। परिवार ने अपने खून खराबे के लिए CRPF को जिम्मेदार ठहराया है। ”

नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने सुरक्षा बलों पर खुद को अच्छे लोगों के रूप में दिखाने के लिए बच्चे को ‘प्रोपगैंडा टूल’ के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। “कश्मीर में खूनी हिंसा में सब कुछ एक प्रोपगैंडा टूल बन जाता है। 

पुलित्जर से क्यों चिढ़ा है दक्षिणपंथी गैंग

वहीं नफ़रत और घृणा से भरे भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने नाना की लाश पर बैठे बच्चे की तस्वीर को ट्वीट करके ‘पुलित्जर लवर्स’ लिखते हुए किंचिंत मनुष्यता का भी अपना दावा खो दिया। https://twitter.com/sambitswaraj/status/1278236535536656390?s=19

तो दूसरी तरफ प्रोपगैंडा चैनल जी न्यूज ने इस फोटो को पुलित्जर कब करके हत्या का जश्न मनाया।

आखिर दक्षिणपंथी गैंग को पुलित्जर से इतनी नफरत क्यों है। इसका जवाब इतना भी मुश्किल नहीं है। यदि इसी साल के मई महीने में लौटकर देखें तो। 5 मई 2020 को एसोसिएट प्रेस (एपी) के तीन फोटो पत्रकार मुख्तार खान, यासीन डार और चन्नी आनंद रात पुलित्जर पुरस्कार हासिल करने वाले लोगों की सूची में शुमार हैं। आनंद जम्मू में रहते हैं जबकि यासीन और मुख्तार श्रीनगर के निवासी हैं। चन्नू आनंद पिछले 20 सालों से एपी के साथ काम कर रहे हैं। देर रात इन प्रतिष्ठित पुरस्कारों की घोषणा हुई। इन तीनों ने घाटी के सामान्य जनजीवन के साथ ही प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों की तस्वीरों को भी दुनिया तक पहुंचाया। कश्मीर को तोड़कर कश्मीरी अवाम को लॉकडाउन करने वाली वर्तमान दक्षिणपंथी सरकार भारतीय सेना और अर्द्धसैन्य बलों की बर्बरता को बयां करती कश्मीर की तस्वीरों को पुलित्जर पुरस्कार मिलने से इनका नंगापन पूरी दुनिया के सामने आ गया इसी कारण ये लोग पुलित्जर पुरस्कार से इतने तिलमिलाए हुए हैं।

प्रेस कान्फ्रेंस में साल 2020 में अब तक 118 आतंकियों को मारने का दावा

पुलिस महानिरीक्षक, कश्मीर, विजय कुमार ने कहा कि 2020 के पहले छह महीनों में 118 आतंकवादी मारे गए थे। उनमें से 11 पाकिस्तानी थे और 107 स्थानीय थे।

उन्होंने आगे कहा कि – “घाटी में 118 मारे गए आतंकवादियों में से सबसे अधिक 57 हिज्ब-उल-मुजाहिदीन से जुड़े थे, इसके बाद लश्कर-ए-तैयबा के 24 आतंकवादी, जैश-ए-मुहम्मद के 22, अंसार गजवत-उल-हिंद के सात प्रत्येक सदस्य थे। कश्मीर में एक अल-कायदा से संबद्ध, और इस्लामिक स्टेट जम्मू-कश्मीर और अल बदर आतंकवादी संगठन का एक आतंकवादी।

इसके अलावा विजय कुमार ने 12 आतंकवादियों की एक हिट-लिस्ट भी जारी की, जो आने वाले दिनों में कश्मीर में सेना के शीर्ष लक्ष्य होंगे।

कुमार ने कहा, “अगले दो महीनों में जैश के लंबो भाई पहला लक्ष्य होंगे, जबकि यह एक अन्य आतंकवादी वलीद भाई, जो एक आईईडी विशेषज्ञ हैं, दूसरा लक्ष्य होगा और तीसरा लक्ष्य गाजी रफीक होगा, जो जैश का प्रमुख है।”लक्ष्य 

सूची में लश्कर के आतंकवादी उस्मान और सोपोर में सजाद, शोपियां में इश्फाक डार, बडगाम के यूसुफ कांतारू और सोपोर के नासिर हैं।

आईजीपी ने कहा कि “कश्मीर में हिज्ब प्रमुख डॉ. सैफुल्लाह, जिला कमांडर बडगाम फारूक, अशरफ मौलवी और एक अन्य आतंकवादी भी हिट लिस्ट में हैं।”

विजय कुमार ने आगे कहा कि “पिछले साल के मुकाबले इस साल स्थानीय आतंकवादी भर्ती में 48 प्रतिशत की गिरावट आई है। जनवरी 9 से जून 2019 तक छह महीने की अवधि में 129 युवा आतंकवादी रैंकों में शामिल हुए थे। इस साल, 67 युवाओं ने बंदूक उठाई और उनमें से 24 बंदूकधारियों की मौत हो गई, जबकि 12 गिरफ्तार किए गए और बाकी आतंकवादी सक्रिय हैं।”

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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