सुधा भारद्वाज की रिहाई के लिए भिलाई में निकाला गया मार्च

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रायपुर।  भीमा कोरेगांव में हुई हिंसा और कथित शहरी नक्सलियों से संबंध के आरोप में गिरफ्तार वकील और सामाजिक कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज की रिहाई के लिए भिलाई में सोमवार को मोर्च निकाला गया। छत्तीसगढ़ भिलाई गोलीकांड की 27 वीं बरसी पर सुधा भारद्वाज को रिहा करने की आवाज मजदूर संगठनों ने बुलन्द किया। मजदूर संगठनों ने सरकार से सुधा भारद्वाज की बिना शर्त रिहाई की मांग की। 

बता दें कि इसी भिलाई में सुधा भारद्वाज ने मजदूरों के संग उनके हक-अधिकारों को लेकर लंबे समय तक संघर्ष किया है। 

गौरतलब है कि सुधा भारद्वाज को ‘शहरी नक्सल’ बताकर भीमा-कोरेगांव केस के सिलसिले में पिछले साल 6 जून को गिरफ़्तार किया गया है। सुधा भारद्वाज के अलावा इस मामले में पिछले साल जिन लोगों को गिरफ़्तार किया गया था उनमें अधिवक्ता सुरेंद्र गाडलिंग, सुधीर धवले, दलित चिंतक महेश राउत, मुंबई स्थित टाटा इंस्टीट्यूट फॉर सोशल स्टडीज़ (टिस) की शोमा सेन और नागपुर विश्वविद्यालय की रोना विल्सन शामिल हैं।

छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा समिति द्वारा भिलाई गोलीकांड की 27वीं बरसी पर एक जुलाई को शहीदी दिवस का आयोजन किया गया। मार्च में सभी मजदूर संगठनों के लोग शामिल हुए। इस अवसर पर एसीसी चौक पर स्थित शहीद शंकर गुहा नियोगी की स्थापित मूर्ति पर माल्यार्पण कर रैली की शक्ल में छावनी चौक से पॉवर हाउस चौक होते हुए, सेक्टर-1 बचत स्तंभ चौक पर सभा स्थल के रूप में तब्दील हो गयी। फिर उसी जगह पर शहीद परिवारों के श्रद्धांजलि दी गई।

जानकारी है कि  शहीद दिवस छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा के बैनर तले अपने विभिन्न मांगों को लेकर 1 जुलाई 1992 को मजदूर किसान रेल रोको आंदोलन करने भिलाई के पॉवर हाउस रेलवे स्टेशन के पास प्रदर्शन कर रहे, तभी पुलिस ने इन मजदूरों पर गोलियों की वर्षा कर दी, जिसमें 17 मजदूरों की मौत हो गई थी, उनकी इसी शहादत को याद करके प्रतिवर्ष 1 जुलाई को मजदूर नेता शहीद दिवस मनाते आ रहे हैं।

छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा समिति के कलादास डहरिया ने कहा कि  छत्तीसगढ़ में जन अधिकारों की लड़ाई में अगुवाई करने वाली वकील सुधा भारद्वाज ने पिछले 3 दशकों में जन आंदोलनों में अहम भुमिका निभाई हैं और एक वकील के रूप में उन्होंने अनगिनत मुकदमों में मेहनतकशों का पक्ष रखा है दुर्ग, भिलाई, बलौदा बाजार, हिरमी आदि जगहों में मजदूरों को न्यूनतम वेतन, बोनस और गैर कानूनी तौर पर उन्हें काम से बेदखल करना आदि प्रकरणों में उन्होंने अदालत से दलित शोषित वर्ग के पक्ष में ऐतिहासिक फैसले हासिल किये हैं कोरया, रायगढ़, सरगुजा, बस्तर से लेकर राजनांदगांव और रायपुर तक गैर कानूनी भूमि अधिग्रहण और वन अधिकार संबंधित मुकदमों में आदिवासियों और किसानों को न्याय दिलाया है। स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत रायपुर, भिलाई और अन्य जगहों में शहरी बस्तियों को उजाड़कर लोगों को विस्थापित किये जाने के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ी है। अन्याय और दमन के खिलाफ जन संघर्षों में सुधा भारद्वाज ने सड़क और कोर्ट की लड़ाई में शामिल होकर साहस के साथ समर्थन दिया है ।

आज 1 जुलाई को शहीदों को याद करने के साथ-साथ हम सब ऐसे राजकीय दमन, निजीकरण और हिंसा के खिलाफ मेहनतकश जनता के हक की लड़ाई के लिये आवाज उठा रहे हैं। 

(रायपुर से जनचौक संवाददाता तामेश्वर सिन्हा की रिपोर्ट।)

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