स्वयंभू स्वामी नित्यानंद की जमानत रद्द, हाइकोर्ट ने दिया गिरफ्तारी का आदेश

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कर्नाटक हाईकोर्ट ने बुधवार को स्व-घोषित भगवान स्वामी नित्यानंद की जमानत रद्द कर दी। हाईकोर्ट ने पुलिस को उसे गिरफ्तार करने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने नित्यानंद को दी गई जमानत रद्द करने के साथ ही जमानत बांड को भी जब्त कर लिया। खुद को भगवान कहने वाले स्वंयभू स्वामी नित्यानंद को भले ही फरार बताया जा रहा है, लेकिन कर्नाटक पुलिस के नजरिए से वह ‘अध्यात्मिक दौरे’ पर हैं।

पिछली 31 जनवरी को अदालत ने नित्यानंद की जमानत रद्द करने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए नोटिस जारी करने का आदेश दिया था, जिस पर जवाब दाखिल करते हुए पुलिस ने सोमवार को कर्नाटक हाइकोर्ट में यही कहा था कि नित्यानंद आध्यात्मिक दौरे पर हैं।

जस्टिस माइकल कुन्हा ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा, ‘क्या यह पहली बार है जब आप अदालत का सम्मन दे रहे हैं? आप कैसे कह सकते हैं कि आपने अदालत के निर्देशों का अनुपालन किया? इसका अर्थ यह है कि आपने उसे अदालत आने को मजबूर किया है। आप खेल खेल रहे हैं?’ 

हालांकि, जांच अधिकारी ने तुरंत क्षमा मांगते हुए ‘सॉरी’ कहा लेकिन, अदालत ने कहा कि वह पुलिस उपाधीक्षक के रवैये पर उचित आदेश जारी करेगी। रामनगर के तृतीय अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय में साल 2010 से नित्यानंद के खिलाफ बलात्कार के मामले में सुनवाई चल रही है। सत्र न्यायालय ने ही उसे जमानत दी थी।

कर्नाटक हाईकोर्ट में मूल शिकायतकर्ता कुरुप्पन लेनिन की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश जॉन माइकल कुन्हा ने नित्यानंद की जमानत रद्द करने का आदेश दिया। कभी नित्यानंद के ड्राइवर का काम करने वाले लेनिन ने अदालत में दायर याचिका में कहा कि नित्यानंद साल 2018 से अदालत में सुनवाई के लिए उपस्थित नहीं हो रहा है, इसलिए उसकी जमानत रद्द कर दी जाए।

नित्यानंद अंतिम बार पांच जून 2018 को सत्र न्यायालय के समक्ष उपस्थित हुआ था और बाद में उसने अदालत में आना बंद कर दिया। शिकायतकर्ता लेनिन का दावा है कि नित्यानंद एक एक्सपायर हो चुके पासपोर्ट का उपयोग कर देश से भाग गया है। याचिका में मांग की गई है कि 2010 के रेप केस में नित्यानंद की जमानत रद्द की जाए।

नित्यानंद पर धारा 376 (बलात्कार), 377 (अप्राकृतिक यौन संबंध), 420 (धोखाधड़ी), 114 (आपराधिक अभियोग), 201 (साक्ष्य मिटाना, गलत जानकारी देना), 120बी (आपराधिक षड्यंत्र) के साथ ही दंड संहिता की अन्य धाराओं के तहत भी अभियोग चल रहे हैं।

इससे पहले कर्नाटक पुलिस ने हाईकोर्ट में कहा था कि नित्यानंद देश छोड़ कर नहीं भागा है। नित्यानंद बिड़दी आश्रम में नहीं हैं, क्योंकि वह एक आध्यात्मिक दौरे पर हैं, इसलिए उसके नाम पर जारी नोटिस अर्चनानंदा नामक आश्रम में उसकी सहयोगी को दिया गया। हालांकि अर्चनानंदा ने हाईकोर्ट के सामने कहा कि उसे नित्यानंद के बारे में कोई जानकारी नहीं है और पुलिस ने जबर्दस्ती नोटिस तामील कर दिया।

नित्यानंद ने दावा किया था कि वह अभी भी भारत में है। लेनिन ने कहा है कि पिछले डेढ़ साल से नित्यानंद मामले की सुनवाई के लिए कोर्ट में पेश नहीं हो रहा है। इस दौरान 45 से अधिक बार सुनवाई हुई। करुप्पन की यचिका का विरोध करते हुए सरकारी वकील ने कहा कि ट्रायल कोर्ट में उसकी तुरंत उपस्थिति अनिवार्य नहीं है। याचिकाकर्ता के वकील ने जवाब दिया कि अभियुक्त अदालत को चकमा दे रहा है। जब अभियुक्त मुकदमे का सामना करने के लिए ही उपलब्ध नहीं है तो अभियोजन पक्ष क्या चुप बैठा रहे।

अदालत की नोटिस देने में मिली नाकामी के आधार पर जमानत रद्द करने में कोई बाधा नहीं है, लेकिन सरकारी वकील ने फिर इसका यह कहते हुए विरोध किया कि अभियुक्त ने किसी भी जमानत शर्त का उल्लंघन नहीं किया है। अगर याचिकाकर्ता ट्रायल कोर्ट द्वारा पारित छूट के आदेश से खुश नहीं है तो उसको चुनौती देनी चाहिए न कि जमानत रद्द करने की मांग करनी चाहिए। जमानत रद्द करने पर हाइकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था।

गौरतलब है कि नित्यानंद नवंबर 19 के आखिर से गायब है। उनके खिलाफ गुजरात में एक बच्चे का अपहरण कर उसका उत्पीडऩ करने का मामला दर्ज है। उस पर वर्ष 2010 में भी बलात्कार का मामला दर्ज हुआ था, जिसमें जमानत मिल गई थी। बताया जाता है कि वह इक्वाडोर में है। रेप और अपहरण मामले में फरार चल रहे नित्यानंद की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

इंटरपोल ने गुजरात पुलिस की अपील पर नित्यानंद के खिलाफ ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी कर दिया है। नित्यानंद पिछले साल से फरार चल रहा है। इसके अलावा रेप और अपहरण के आरोपी नित्यानंद के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की प्रकिया भी शुरू कर दी गई है।

कर्नाटक में येदियुरप्पा की भाजपा सरकार भले ही हाईकोर्ट में नित्यानंद को बचाने की कोशिश कर रही हो, दिसंबर 2019 में ही विवादास्पद भगोड़े स्वयंभू बाबा नित्यानंद को लेकर भारत सरकार ने उनका पासपोर्ट रद्द कर दिया था और नये पासपोर्ट की उसकी याचिका भी खारिज कर दी थी।

यही नहीं मंत्रालय ने विदेशों में स्थित सभी मिशनों और पोस्टों को नित्यानंद के बारे में सतर्क कर दिया था। नित्यानंद के पासपोर्ट की वैधता 2018 में समाप्त होने से पहले ही उसे रद्द कर दिया गया था और नये पासपोर्ट के लिए उसके आवेदन को भी खारिज कर दिया गया, क्योंकि उसके खिलाफ मामले लंबित हैं।

गौरतलब है कि पुलिस देश भर में भगोड़े नित्यानंद उर्फ राजशेखरन की तलाश कर ही रही थी कि खबर आई कि उसने दक्षिण अमरिकी महाद्वीप के मध्य में इक्वाडोर के पास एक द्वीप को खरीदकर उस पर एक नया देश हिंदू राष्ट्र ‘कैलासा’ बसा दिया है। अब उसके पास उसका खुद का पासपोर्ट भी है। कथित देश कैलासा की वेबसाइट के मुताबिक यह सीमा रहित राष्ट्र है, जिसे दुनिया भर के बेदखल हिंदुओं ने बसाया है, जिन्हें उनके अपने देश में प्रामाणिक रूप से हिंदू धर्म का अभ्यास करने की अनुमति नहीं है।

इक्वाडोर दूतावास ने एक बयान में इस बात से साफ-साफ इनकार किया है कि उसने नित्यानंद को शरण दी या उसकी सरकार ने इक्वाडोर के आसपास या किसी दूर दराज के क्षेत्र में दक्षिण अमेरिका में कोई जमीन या द्वीप खरीदने में मदद की।

बिदादी आश्रम में ही पहली बार विवादित धर्म गुरु का पहला कारनामा 2010 में सामने आया था। एक अभिनेत्री के साथ आपत्तिजनक स्थिति में उसका एक वीडियो वायरल हो गया था और इसके बाद करीब आठ साल तक वह गुमनामी में चला गया। एक साल पहले वह अपने नए अवतार में प्रकट हुआ। इस बार वह भूरे रंग के कपड़े और शेर की खाल पहने हुए था। उसकी दाढ़ी मूंछ बढ़ी हुई थी। वह हाथ में त्रिशूल लिए था और गले में मनके की माला पहनी थी।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और कानूनी मामलों के जानकार हैं। वह इलाहाबाद में रहते हैं।)

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