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टीआरपी और फोलोअर्स फर्जीवाड़े के जरिये होता है करोड़ों का वारा न्यारा

मुंबई क्राइम ब्रांच द्वारा जुलाई 2020 के मध्य में सोशल मीडिया पर फर्जी फॉलोअर्स स्कैम के पर्दाफाश की सुर्खियां अभी सूखी भी नहीं थीं कि मुंबई पुलिस ने फॉल्स टीआरपी रैकेट का भांडाफोड़ कर विवादास्पद एंकर अर्नब गोस्वामी के रिपब्लिक टीवी सहित अन्य टीवी चैनलों को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

मुंबई पुलिस के कमिश्नर परमबीर सिंह ने बताया है कि मुंबई क्राइम ब्रांच ने नए रैकेट का खुलासा किया है। इसका नाम ‘फॉल्स टीआरपी रैकेट’ है। ये रैकेट करोड़ों रुपये के राजस्व का मुनाफा कमा रहा था। इस मामले में पुलिस कमिश्नर ने सीधे तौर पर रिपब्लिक टीवी को आरोपी मानते हुए कहा कि चैनल ने पैसे देकर रेटिंग बढ़ाई। टीआरपी रैकेट के जरिए पैसा देकर टीआरपी को मैन्युपुलेट (हेरफेर) किया जा रहा था। आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 409 और 420 के तहत कार्रवाई की जा रही है।

मुंबई पुलिस को दो अन्य चैनलों का पता चला है, जिनके नाम फख्त मराठी और बॉक्स सिनेमा हैं। ये चैनल पैसा देकर लोगों के घरों में चैनल चलवाते थे। इस मामले में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है और 8 लाख रुपये जब्त किए गए हैं। मुंबई पुलिस की ओर से इस रैकेट की जानकारी सूचना प्रसारण मंत्रालय और भारत सरकार को भेजी जा रही है।

मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यह अपराध है, चीटिंग है। हम इसे रोकने के लिए जांच कर रहे हैं। फॉरेंसिक एक्सपर्ट की मदद ली जा रही है। जो आरोपी पकड़े गए हैं, उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि दो छोटे चैनल फख्त मराठी और बॉक्स सिनेमा भी इसमें शामिल हैं। इसके मालिक को कस्टडी में लिया गया है। हंसा की शिकायत पर केस दर्ज किया गया है। ब्रीच ऑफ ट्रस्ट और धोखाधड़ी का केस दर्ज किया गया है। पुलिस कमिश्नर ने कहा कि रिपब्लिक टीवी में काम करने वाले लोग, प्रमोटर और डायरेक्टर के इसमें शामिल होने का अंदेशा हैं। जांच जारी है। जिन लोगों ने विज्ञापन दिया, उनसे भी पूछताछ की जाएगी कि क्या उन पर दबाव तो नहीं था।

इस बीच ‘फॉल्स टीआरपी रैकेट’ में  रिपब्लिक टीवी ने खुद पर लगे आरोपों को झूठा करार दिया है। इतना ही नहीं, मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह के खिलाफ आपराधिक मानहानि का केस करने की बात कही है। रिपब्लिक टीवी ने अपने बयान में कहा है कि मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने रिपब्लिक टीवी के खिलाफ झूठे आरोप लगाए हैं, क्योंकि हमने सुशांत सिंह राजपूत केस की जांच में उन पर सवाल उठाए थे। रिपब्लिक टीवी मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह के खिलाफ आपराधिक मानहानि का केस दायर करेगी। बार्क की किसी भी रिपोर्ट में रिपब्लिक टीवी का जिक्र नहीं है। भारत के लोग सच्चाई जानते हैं।

दरअसल टेलीविजन विज्ञापन इंडस्ट्री करीब 30 से 40 हजार करोड़ रुपये की है। विज्ञापन की दर टीआरपी रेट के आधार पर तय की जाती है। किस चैनल को किस हिसाब से विज्ञापन मिलेगा, यह तय किया जाता है। अगर टीआरपी में बदलाव होता है तो इससे रेवेन्यू पर असर पड़ता है। कुछ लोगों को इससे फायदा होता है और कुछ लोगों को इससे नुकसान होता है। टीआरपी को मापने के लिए बार्क संस्था है। यह अलग-अलग शहरों में एक मशीन लगाते हैं, देश में करीब 30 हजार पीपल्स मीटर लगाए गए हैं। मुंबई में करीब 10 हजार पीपल्स मीटर लगाए गए हैं। पीपल्स मीटर इंस्टॉल करने का काम मुंबई में हंसा नाम की संस्था को दिया गया था। जांच के दौरान ये बात सामने आई है कि कुछ पुराने वर्कर जो हंसा के साथ काम कर रहे थे, टेलीविजन चैनल से डाटा शेयर कर रहे थे।

वे लोगों से कहते थे कि आप घर में हैं या नहीं हैं, चैनल ऑन रखिए, इसके लिए पैसे दिए जाते थे। वहीं, कुछ व्यक्ति जो अनपढ़ हैं, उनके घर में अंग्रेजी का चैनल चल रहा था। हंसा के पूर्व वर्कर को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इसी आधार पर जांच बढ़ाई गई, दो लोगों को गिरफ्तार करके कोर्ट में पेश किया गया है और उन्हें 9 अक्टूबर तक कस्टडी में भेजा गया है। एक आरोपी के पास से 20 लाख रुपये जब्त किए गए हैं, जबकि बैंक लॉकर में 8.5 लाख रुपये मिले हैं।

टीआरपी का मतलब है टेलिविजन रेटिंग पॉइंट। इसके जरिए यह पता चलता है कि किसी टीवी चैनल या किसी शो को कितने लोगों ने कितने समय तक देखा। इससे यह पता चलता है कि कौन सा चैनल या कौन सा शो कितना लोकप्रिय है, उसे लोग कितना पसंद करते हैं। इससे तय होता है कि किस चैनल की लोकप्रियता कितनी होती है। जिसकी जितनी ज्यादा टीआरपी, उसकी उतनी ज्यादा लोकप्रियता। अभी बार्क  इंडिया (ब्रॉडकास्ट आडियंस रिसर्च काउंसिल ऑफ इंडिया) टीआरपी को मापती है। पहले यह काम टीएएम करती थी।

फेक टीआरपी का षड़यंत्र रचने वाले आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता यानी आईपीसी की धारा 420 लगाई गई है। पकड़े गए आरोपियों को आईपीसी की धारा 420 के तहत धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा करने का आरोपी बनाया गया है। अगर कोई भी किसी शख्स को धोखा दे, बेईमानी से किसी भी व्यक्ति को कोई भी संपत्ति दे या ले, या किसी बहुमूल्य वस्तु या उसके एक हिस्से को धोखे से खरीदे-बेचे या उपयोग करे या किसी भी हस्ताक्षरित या मुहरबंद दस्तावेज में परिवर्तन करे, या उसे बनाए या उसे नष्ट करे या ऐसा करने के लिए किसी को प्रेरित करे तो वह भारतीय दंड संहिता की धारा 420 के अनुसार दोषी माना जाता है।

फेक टीआरपी का दोषी पाए जाने पर किसी एक अवधि तक सजा दी जा सकती है, जिसे 7 साल तक बढ़ाया जा सकता है। साथ ही दोषी पर आर्थिक दंड भी लगाया जा सकता है या फिर दोनों भी। यह एक गैर-जमानती संज्ञेय अपराध है। किसी लोक सेवक या बैंक कर्मचारी, व्यापारी या अभिकर्ता के विश्वास का आपराधिक हनन करने पर भारतयी दंड संहिता की धारा 409 के तहत कार्रवाई की जाती है। आईपीसी की धारा 409 के अनुसार, जो भी कोई लोक सेवक के नाते अथवा बैंक कर्मचारी, व्यापारी, फैक्टर, दलाल, अटॉर्नी या अभिकर्ता के रूप में किसी प्रकार की संपत्ति से जुड़ा हो या संपत्ति पर कोई भी प्रभुत्व होते हुए उस संपत्ति के विषय में विश्वास का आपराधिक हनन करता है, उसे दोषी करार दिया जा सकता है।

गौरतलब है की इसी तरह सोशल मीडिया पर लोगों का स्टेटस इस बात से भी बढ़ता है कि उसके कितने फॉलोअर्स हैं। 14 जुलाई 2020 को मुंबई क्राइम ब्रांच ने एक ऐसे रैकेट का भंडाफोड़ किया था, जो फॉलोअर्स बढ़ाने के लिए बड़ी-बड़ी सिलेब्रिटीज से संपर्क करता था। यही नहीं, इस रैकेट के लोग लाखों लोगों से मोटी रकम लेकर किसी को बदनाम करने और समाज में अफवाह उड़ाने का भी काम करते थे। इस केस में पुलिस ने एक आरोपी को कुर्ला से गिरफ्तार किया था। यह पूरा रैकेट बॉलिवुड की एक महिला सिंगर की शिकायत से ओपन हुआ। सिंगर के नाम का किसी ने इंस्टाग्राम में प्रोफाइल बनाया और उस अकाउंट के हजारों फर्जी फॉलोअर्स भी बढ़ा दिए। फिर इस रैकेट से जुड़े लोगों ने बॉलिवुड के अलग-अलग लोगों से संपर्क किया। उस सिंगर का नाम लिया कि उसने हमें इतने लाख रुपये दिए हैं, कि हम लोग उसके हजारों फॉलोअर्स बढ़ा दें। आप लोग भी यह काम करवा सकते हैं।

आरोपियों ने अलग-अलग लोगों को बताया कि ज्यादा फॉलोअर्स से मार्केट में टीआरपी अच्छी हो जाती है। अच्छी टीआरपी से काम भी मिलता है और उस काम की कीमत भी ज्यादा मिलती है। इसी तरह अलग-अलग बिजनेस से जुड़े लोगों ने भी उससे संपर्क किया। गिरफ्तार आरोपी ने पूछताछ में बताया था कि वह इंस्टाग्राम, टिकटॉक फेसबुक और इसी तरह अन्य सोशल मीडिया के 176 अकाउंट बना चुका है और इन अकाउंट्स में उससे पांच लाख से ज्यादा फर्जी फॉलोअर्स बनाए हैं। उसने दावा किया कि देश में कई लाख लोगों के करोड़ों फर्जी फॉलोअर्स हैं। अब जांच इस बात की भी हो रही है कि वे कौन-कौन लोग हैं, जिन्होंने वाकई फर्जी फॉलोअर्स बनाए।

मुंबई पुलिस ने कई सेलिब्रिटीज और हाई प्रोफाइल यूजर्स के सोशल मीडिया पेज को ट्रैक किया है, जिनमें कई सारे फर्जी और पेड फॉलोअर्स देखने को मिले हैं। इन सेलिब्रिटीज के अलावा कई हाई प्रोफाइल यूजर्स जिनमें बिल्डर्स, स्पोर्ट्स पर्सन्स और बॉलीवुड पर्सनालिटीज शामिल हैं।

मीडिया की टीआरपी हो या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ज्यादा से ज्यादा फॉलोअर्स दिखने का मामला हो सभी अधिक से अधिक पैसा कमाने का खेल है। सेलिब्रिटीज अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ज्यादा से ज्यादा फॉलोअर्स बढ़ाने की कोशिश करते हैं, ताकि उनके ज्यादा से ज्यादा ब्रांड्स के साथ पेड पार्टनरशिप हो सके। सेलिब्रिटीज अपने सोशल मीडिया फॉलोअर्स की संख्या बढ़ाने के लिए कई बार उन एजेंसियों के संपर्क में रहते हैं जो पैसे लेकर फॉलोअर्स, लाइक और कमेंट्स को बढ़ाते हैं। सेलिब्रिटीज अपने फॉलोअर्स को बढ़ाने के लिए पैसे भी खर्च करते हैं। फॉलोअर्स बढ़ाने वाली तमाम एजेंसियों का एक फॉलोअर बढ़ाने का, एक लाइक और कमेंट का रेट तय होता है। एजेंसीज इसके लिए चार्ज करती हैं और फर्जी फॉलोअर्स या बॉट द्वारा इस पूरे प्रोसेस को अंजाम देते हैं।

इसका फायदा इन एजेंसियों के साथ-साथ सेलिब्रिटीज को भी होता है। सेलिब्रिटीज के फॉलोअर्स बढ़ने की वजह से उनके पास ज्यादा ब्रांड्स से पेड पार्टनरशिप के ऑफर आएंगे और वो गाढ़ी कमाई कर सकेंगे। हालांकि, यह एक साइबर क्राइम है। किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फर्जी अकाउंट क्रिएट करना साइबर क्राइम में आता है, क्योंकि आप फर्जी अकाउंट में अपनी गलत जानकारी भरते हैं। इसकी वजह से डिजिटल स्पेस का बैलेंस प्रभावित होता है।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और कानूनी मामलों के जानकार हैं। वह इलाहाबाद में रहते हैं।)

This post was last modified on October 9, 2020 12:57 pm

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