यूपी निकाय चुनाव: मुसलमानों का वोट बांटने के लिए भाजपा ने 300 से अधिक पसमांदा उम्मीदवार खड़े किए

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उत्तरप्रदेश। राज्य में लोकल बॉडी चुनाव होने जा रहा है जहां सभी पार्टियां अपनी जोर आजमाइश करती दिखाई देंगीं। राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस राज्य में, 760 यूएलबी (अर्बन लोकल बॉडी) में 14,684 पदों के लिए चुनाव होंगे, जिनमें 17 मेयर पद और 1,420 पार्षद पद शामिल हैं।

4 और 11 मई को वोटिंग होगी और परिणाम 13 मई आएंगे। इस चुनाव की खास बात यह है कि इस बार बीजेपी एक चुनावी प्रयोग करने जा रही है जो पिछले चुनाव से अलग है। इस बार बीजेपी ने मुस्लिम समुदाय के पिछड़े तबके खासकर पसमांदा मुसलमानों को टारगेट किया है और उन्हें बड़ी संख्या में टिकट देकर मैदान में उतारा गया है।

कुल 14,684 सीटों में से करीब 350 टिकट मुस्लिम उम्मीदवारों को दिया है। भाजपा ने इस बात पर जोर दिया है कि इन 350 सीटों के 90 प्रतिशत उम्मीदवार पसमांदा समाज के हैं। इनमें से ज्यातर टिकट वहां दिए गए हैं जहां इनकी तादाद ज्यादा है।

नगरपालिका के अध्यक्ष से लेकर नगरपालिका के सलाहकारों तक कई पदों के लिए टिकट दिए गए हैं। बीजेपी के खिलाफ उत्तरप्रदेश में बढ़ रहे मुसलमानों के गुस्से के बावजूद निकाय चुनाव में इतनी बड़ी संख्या में टिकट देना आखिर क्या साबित करता है।

दरअसल बीजेपी एक तरह का प्रयोग करती दिख रही है। यह एक लिटमस टेस्ट की तरह है। पार्टी ने 2024 लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया है। इस कदम से पार्टी यह देखना चाहती है कि 2024 के लिए मुसलमानों में उनकी कितनी स्वीकार्यता रहनेवाली है।

उत्तरप्रदेश में मुसलमानों की आबादी कुल आबादी का लगभग 20 प्रतिशत है जबकि पसमांदा मुस्लिम नेताओं का मानना है कि अपने मुस्लिम समुदाय में इनकी तादाद राज्य में 85 प्रतिशत है।

बीजेपी नेताओं का मानना है कि मुफ्त अनाज वितरण के लाभार्थियों में पसमांदा समुदाय के लोगों की संख्या ज्यादा है। इसलिए निकाय चुनाव में इनका अधिकतम वोट बीजेपी के पक्ष में आ सकता है।

उन शहरों में जो मुस्लिम बहुल क्षेत्र हैं वहीं सबसे ज्यादा उम्मीदवारों को टिकट दिया गया है। वो क्षेत्र हैं मुरादाबाद, रामपुर, मुजफ्फरनगर, अमरोहा, और बिजनौर। वाराणसी और गोरखपुर में पार्टी ने तीन मुस्लिम महिलाओं को भी टिकट दिया है।

बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के राज्य अध्यक्ष बासित अली कहते हैं इन क्षेत्रों में मुस्लिमों में बीजेपी के प्रति आकर्षण बढ़ा है और इस बार बीजेपी अच्छा करेगी।

जबकि मोमिन अंसार सभा के अकरम अंसारी कहते हैं कि बीजेपी मुसलमानों की आंखों में धूल झोंक रही है। उन्हें उम्मीदवार बनाकर मैदान में तो उतार दिया लेकिन कभी ज़मीन पर उनसे जुड़ने का कोई प्रयास नहीं किया और ना ही उनके मसायल को जानने की कोशिश की है।

अंसारी आगे कहते हैं दक्षिणपंथी नेताओं के नफरत भरे स्पीच से यहां के मुसलमान अनजान नहीं हैं। उनके भाषण और धमकियों ने इस समुदाय को बीजेपी के करीब आने से रोक दिया है। मुस्लिमों को टिकट देने के पीछे बीजेपी की असल मंशा को लेकर राजनीतिक हलकों में भी बहस चल रही है।

यह आमतौर पर माना जा रहा है कि पार्टी का उद्देश्य मुसलमान समुदायों के बीच उनकी सामाजिक स्थिति के आधार पर उनके बीच की खाई को चौड़ा करना और उनकी एकता को तोड़ना है। आनेवाले निकाय चुनाव के परिणाम बताएंगे कि बीजेपी का यह प्रयोग कितना सफल या असफल रहनेवाला है।

(आज़ाद शेखर जनचौक के सब एडिटर हैं।)

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