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यूपी में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से विद्युत व्यवस्था अस्त-व्यस्त, डिप्टी सीएम समेत कई मंत्रियों के घरों की बिजली गुल

लखनऊ/ प्रयागराज। पूर्वांचल की बिजली व्यवस्था के निजीकरण के विरोध में प्रदेश भर में उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड के कर्मियों के साथ ऊर्जा निगम के अभियंताओं ने कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया है।

बिजली कर्मचारियों का प्रदर्शन सोमवार सुबह दस बजे से मुख्य अभियंता वितरण कार्यालय में शुरू हुआ। अधिकारियों और कर्मचारियों ने पहले ही बैठक में सहमति बनाई है कि अगर किसी की गिरफ्तारी हुई तो सामूहिक रूप से गिरफ्तारी दी जाएगी।

प्रयागराज में पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के खिलाफ रात 12 बजे के बाद से बिजली कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया।

ओबरा तथा अनपरा की छह यूनिट से उत्पादन बंद है

हड़ताल का असर पूरे प्रदेश में दिख रहा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सभी जिलों के कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया है। मेरठ, मुजफ्फरनगर, बागपत, बिजनौर, शामली, सहारनपुर आदि जिलों में कर्मचारी धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं।आजमगढ़ जिले के अधिकतर क्षेत्रों में विद्युत व्यवस्था ठप हो गई है।

बता दें कि निजीकरण के विरोध में विद्युत कर्मचारियों का कार्य बहिष्कार सोमवार की सुबह जैसे ही शुरू हुआ वैसे ही ओबरा और अनपरा की कुल छह इकाइयों से उत्पादन बंद हो गया। अनपरा व ओबरा की कुल छह इकाइयों से उत्पादन बंद होने से कुल 1830 मेगावाट का उत्पादन प्रभावित हुआ है। अनपरा अ की 210 मेगावाट की क्षमता वाली तीन इकाई यानी 630 मेगावाट, अनपरा ब की 500 मेगावाट वाली दो इकाई यानी 1000 मेगावाट उत्पादन बंद हुआ। वहीं ओबरा में 10वीं इकाई से 200 मेगावाट का उत्पादन बंद हुआ है। इस तरह से कुल 1830 मेगावाट का उत्पादन बंद है। कर्मचारियों के कार्य बहिष्कार की वजह से इन्हें चालू करने में दिक्कत हो रही है।

विद्युत संघर्ष समिति के संयोजक मनोहर सिंह व सह संयोजक राणा प्रताप ने कहा कि सरकार ऊर्जा निगम को निजी हाथों में बेचना चाहती है, जिसे हम नहीं होने देंगे। ऊर्जा निगम का निजीकरण होते ही लाखों कर्मचारियों का नुकसान होगा। वहीं प्रदेश की करोड़ों की संख्या में जनता पर बिजली महंगाई की मार पड़ेगी। यहां पर निजी कंपनियां बिजली महंगी बेचेंगी। दोनों नेताओं ने कहा कि कार्य बहिष्कार कर हम सरकार को ऊर्जा निगम के निजीकरण नहीं करने के लिए संदेश देना चाहते हैं। हमारा मकसद बिजली आपूर्ति बाधित करना या व्यवस्था में व्यवधान पैदा करना नहीं है।

कल निजीकरण के विरोध में बिजलीकर्मियों ने शक्तिभवन से जीपीओ स्थित गांधी प्रतिमा स्थल तक कैंडल मार्च निकाला। इस दौरान संगठन के कार्यवाहक अध्यक्ष छोटे लाल दीक्षित ने कहा कि प्रबंधन को निजीकरण का अड़ियल रवैया छोड़कर व्यवस्था सुधारने का प्रयास करना चाहिए।

सामूहिक गिरफ्तारी की तैयारी

अधिकारी से लेकर कर्मचारी तक सभी ने उप केंद्र छोड़ दिया है। ऐसे में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती लोगों को बिना किसी व्यवधान के बिजली आपूर्ति करना है। रविवार रात तक जिले के प्रशासनिक अधिकारी मंथन करते रहे। बिजली कर्मचारियों का प्रदर्शन सोमवार सुबह दस बजे से मुख्य अभियंता वितरण कार्यालय में शुरू हो गया है। अधिकारियों और कर्मचारियों ने पहले ही बैठक कर इसकी रूपरेखा तय की थी। उनका कहना है कि अगर किसी की गिरफ्तारी हुई तो सामूहिक रूप से गिरफ्तारी दी जाएगी। बिजली कर्मचारियों ने संकेत दिया है कि उनकी मांगे न मानी जाने पर ये हड़ताल लंबा खिंच सकता है। और बिजली कर्मचारी जल्द ही जेल भरो आंदोलन भी शुरु कर सकते हैं।

शाहजहांपुर में ड्यूटी पर तैनात लेखपाल मौके से भाग निकले

विद्युत व्यवस्था प्रभावित न हो इसके लिए शासन ने मंडलायुक्त, जिलों के डीएम और पुलिस अफसरों को अलर्ट कर दिया है। ऊर्जा प्रबंधन और जिला प्रशासन ने बिजली सप्लाई बहाल रखने के लिए पुलिस के पहरे के साथ कई वैकल्पिक इंतजाम किए, लेकिन फॉल्ट के आगे सभी फेल हो गए। अधिकांश ग्रामीण और शहरी इलाकों में कल दोपहर बाद से ही बिजली गुल है। वैकल्पिक व्यवस्था के तहत शाहजहांपुर के कलान में ड्यूटी पर तैनात लेखपाल मौके से भाग निकले।

बिजली विभाग में ड्यूटी लगाने पर डिप्लोमा इंजिनियरों का विरोध

बिजली कर्मचारियों के कार्य बहिष्कार करने के बाद उनकी जगह डिप्लोमा इंजिनियरों की ड्यूटी लगाई जा रही है। डिप्लोमा इंजिनियरों ने इस फैसले के विरोध के साथ बिजली कर्मचारियों के आंदोलन को समर्थन देने का ऐलान किया है। राजभवन रोड स्थित महासंघ कार्यालय में सोमवार को हुई बैठक में उप्र डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ- लोक निर्माण के अध्यक्ष हरिकिशोर तिवारी ने कहा कि लोक निर्माण समेत ज्यादातर विभागों के इंजीनियर बिजली के काम के लिए प्रशिक्षित नहीं हैं। ऐसे में उन्हें ड्यूटी पर लगाना खतरनाक है।

निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मचारी सोमवार को पूरे दिन कार्य बहिष्कार पर रहे। इस दौरान फॉल्ट की मरम्मत सहित उपभोक्ता सेवाओं से जुड़े कामकाज प्रभावित रहे। यहां तक कि ऊर्जा मंत्री के आवास सहित कई इलाकों में बिजली संकट रहा। संविदा बिजलीकर्मियों ने विधि एवं न्याय मंत्री बृजेश पाठक को ज्ञापन देकर समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग की।

जबकि इस दौरान यूपी पावर एवं निविदा संविदा कर्मचारी संघ के प्रदेश महामंत्री देवेंद्र पांडेय ने मांग उठाई कि संविदा कर्मियों को मस्टररोल के तहत सीधे विभाग से वेतन भुगतान किया जाए। और ईपीएफ, ईएसआई के नाम पर बीते 19 साल में हुए घोटाले की जांच करवाई जाए।

निजीकरण के खिलाफ शुरू हुई बिजली कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल से प्रदेश में उपमुख्यमंत्रियों के आवास से लेकर आम आदमी तक लाखों लोगों के घर अंधेरे में रहे। कर्मचारियों की हड़ताल से पूर्वांचल के एक बड़े हिस्से में सारी रात बिजली की आपूर्ति नहीं हो सकी। राजधानी लखनऊ में उपमुख्यमंत्री, ऊर्जा मंत्री समेत कुल 36 मंत्रियों सहित हजारों घरों में पावर सप्लाई का काम नहीं हो सका।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

This post was last modified on October 6, 2020 9:52 am

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