Monday, December 6, 2021

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यूपी ग्राम पंचायत चुनाव, यानि घर-घर कोरोना

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29 अप्रैल को चौथ व आखिरी चरण के साथ ही उत्तर प्रदेश के 75 जिलों के 58,194 ग्राम पंचायतों में ग्राम पंचायत चुनाव संपन्न हो गये। ग्राम प्रधान, बीडीसी व जिला पंचायत के लिए मतदान एक साथ कराये गये हैं। ऐेसे में कोरोना काल में यूपी के हर एक गांव में जमकर चुनावी रैली, मीटिंग और प्रचार प्रसार हुआ है जिसके चलते कोरोना संक्रमण उत्तर प्रदेश के तमाम गांवों में पहुंच गया है। कहीं-कहीं तो पूरे गांव को बुखार खांसी और बलगम आ रहा है। यूपी के हजारों गांव अपना गंध व स्वाद खो चुके हैं।

15 अप्रैल को पहले चरण में 18 जिलों की ग्राम पंचायतें में चुनाव हुआ। प्रयागराज जिले के ग्राम आटा निवासी आरएसएस कार्यकर्ता दुर्गेश शुक्ला (32 वर्ष) की कोरोना से मौत हो गई। दुर्गेश की मौत से तीन दिन पहले ही उनके पिता छबिनाथ शुक्ला की भी कोरोना से मौत हो गई थी। गौरतलब है कि दुर्गेश ग्राम पंचायत के चुनाव प्रचार में लगे हुए थे और वो उसी दौरान कोरोना संक्रमित हो गये।

आरएसएस कार्यकर्ता दुर्गेश शुक्ला

वहीं चिलौड़ा ग्रामसभा में जिला पंचायत सदस्य के प्रचार में लगे एक युवक की कोरोना से मौत हो गई है। 

15 अप्रैल को होने वाले चुनाव के लिए 7 अप्रैल को चुनाव चिन्ह मिलने के बाद से ही चुनाव प्रचार ने ज़ोर पकड़ लिया। अबकि बार समय कम था। तो सारे ग्राम प्रधान, बीडीसी और जिला पंचायत सदस्य अपने दल बल के साथ प्रचार में टूट पड़े। 

पाली गांव निवासी हरिनिवास पांडेय की तबीयत पहले से भी नासाज़ थी। सर्दी खांसी बलगम बुखार था। वर्तमान ब्लॉक प्रमुख गीता सिंह के पति राकेश बहादुर सिंह गांव से बीडीसी प्रत्याशी के तौर पर खड़े हुए। गांव के ही एक ठाकुर वकील शंकर सिंह से दूर की नातेदारी थी। शंकर सिंह सवर्ण घरों के लोगो को लामबंद करने के लिए हरिनिवास पांडेय को लेकर राकेश बहादुर के साथ गांव में घर घर घुमा लाये। 15 अप्रैल को जिस दिन मतदान था हरिनिवास पांडेय की तबीयत ज़्यादा खराब हो गई। सांस लेने में तकलीफ़ के चलते एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। जहां तीन दिन बाद जांच में उन्हें कोरोना संक्रमित पाया गया। अब तक पाली गांव में में कुल 8-10 लोग कोरोना संक्रमित पाये गये हैं। इसके अलावा आस पास के पुरवों फजिलापुर, गिरधरपुर में भी कई लोग कोरोना संक्रमित पाये गये हैं। कोरोना के लक्षण गांव के और भी कई लोगों में है लेकिन जब तक जांच नहीं होती तब तक उनकी गिनती नहीं हो सकती। 

रंगकर्मी पुंज प्रकाश बताते हैं कि उनके गांव लालगंज बैसवारा में भी 15 अप्रैल को ग्राम पंचायत चुनाव के बाद दर्जनों लोग बीमार पड़े हैं। कई लोगो को कोरोना संक्रमित पाया गया है।

चंदौली जिले के इलिया थाना क्षेत्र के जिगना गांव निवासी सोनू यादव बताते हैं कि उनके माता पिता को कोरोना संक्रमित हो गये हैं। गांव में एक सप्ताह पहले कोरोना से एक मौत भी हुई है। चंदौली जिले में 26 अप्रैल को चुनाव हुआ है। सोनी बताते हैं कि गांव में कई लोगो को कोरोना संक्रमण ने लक्षण हैं। 

वहीं चंदौली ज़िला के चकिया तहसील के सिकंदरपुर गाँव की फरीदा जमाल बताती हैं कि दो दिन पहले मेरी माँ कई दिन से तेज़ बुखार खांसी उल्टी में पड़ी रहीं, सीएमओ और सरकारी अस्पताल को कोरोना टेस्ट के लिए दो दिन फोन किया लेकिन कोई भी फोन नहीं उठा रहा है। कोई भी प्राइवेट डॉ देखने के लिए तैयार नहीं है। हेल्पलाइन नंबर लाल पैथोलॉजी को फ़ोन कर रहे हैं तो लाल पैथोलॉजी से कहा कि टेस्टिंग किट नहीं है।

हिंदी भाषा के साहित्यकार केशव तिवारी जिला प्रतापगढ़ स्थित अपने गांव जोखू का पुरवा में कोरोना हाल कुछ यूँ सुनाते हैं- “गांव में हूँ कारोना आ गया है यहां भी लोग छुपा रहें हैं। एक शिक्षा मित्र 6 माह की गर्भवती स्त्री जिसकी चुनाव डयूटी थी कि मौत हो गई। आज ही हो के आया हूँ। परिवार के अन्य लोगों के जांच की कोई व्यवस्था नहीं है। कोई सरकारी टीम नहीं पहुची। बहुत भयावह है ये।

“साहित्यकार सुभाष चंद्र कुशवाहा जिला कुशीनगर के जोगिया जनूबी पट्टी व फाजिलनगर ग्राम पंचायतों का ज़िक्र करते हुए बताते हैं कि- “कोविड का कहर गांवों में पहुंच चुका है। विगत साल ऐसा नहीं हुआ। मास्क खरीद कर प्रयोग करना गरीबों के वश में नहीं।  हम लोगों ने सैकड़ों की संख्या में सर्जिकल मास्क बांटे हैं। बाद में देखा कि दस दिन बाद भी किसान उन्हीं मास्कों को लगाते रहे यानी वे मास्क लगाने की वैज्ञानिक विधि नहीं जानते और गरीबी के कारण मास्क पर पैसा नहीं खर्च कर सकते। गांवों में बुखार, बदन दर्द, दस्त, गले में खरांस को लोग मौसमी बीमारी या काम धंधे की वजह से थकान, कमजोरी समझ रहे हैं। कोई सलाह देने वाला नहीं। कोई जांच की सुविधा नहीं। आप जांच करा कर देखेंगे, ज्यादातर  मामले कोविड के निकलेंगे। सबसे मुसीबत वाली बात तो यह है कि कोविड मरीज की कैसे देखभाल करें? आम जनता नहीं जानती। मरने पर शव के पास लोग बैठकर रोते हैं। शव को छूते हैं। इन मौतों को कोविड रिकॉर्ड में शामिल नहीं किया जाता। साबुन से हाथ धोते रहने या सेनेटाइजेशन की व्यवस्था गांवों में नहीं है। गाँव-गाँव में प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं द्वारा जांच कराई जाए तो स्थिति स्पष्ट हो। उसके बाद पॉजिटिव मरीजों को आइसोलेशन में रखा जाए अन्यथा स्थिति गंभीर होगी।

ग्राम पंचायत चुनाव में ड्युटी करने वाले 706 शिक्षको व कर्मचारियों की मौत

उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ ने गुरुवार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्य चुनाव आयोग को पत्र भेजकर पंचायत चुनाव में ड्यूटी के दौरान 706 प्राथमिक शिक्षकों और बेसिक शिक्षा विभाग के कर्मचारियों की मौत की जानकारी देते हुए मांग की है कि पंचायत चुनाव की दो मई को होने वाली मतगणना टाल दी जाए।

मुख्यमंत्री, राज्य चुनाव आयोग और बेसिक शिक्षा मंत्री को यह पत्र भेजे जाने की पुष्टि प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा ने की है। प्राथमिक शिक्षक संघ द्वारा दी गई इस सूची में 72 जिलों में 706 शिक्षकों-कर्मचारियों के नाम दर्ज़ हैं, जिनकी चुनाव ड्यूटी के दौरान कोरोना संक्रमण के कारण मृत्यु हुई है। 

इस सूची के अनुसार सबसे अधिक आजमगढ़ में 34 शिक्षकों-कर्मचारियों की मौत हुई है. गोरखपुर और इलाहाबाद में 28-28, लखनऊ में 20, रायबरेली में 26, जौनपुर में 23 शिक्षकों-कर्मचारियों की कोरोना संक्रमण से मौत हुई है। डॉ. शर्मा ने अपने ट्विटर हैंडल पर भी इस बारे में लिखा है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मुख्य सचिव, मुख्यमंत्री कार्यालय के साथ-साथ कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी, पूर्व मुख्यमंत्री एवं सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को टैग करते हुए लिखा है कि ‘प्रति घंटे बेसिक शिक्षकों की मौत हो रही है। गुरुवार सुबह तक 600 थी जो अब 706 हो गई है। शिक्षकों की जान की रक्षार्थ राज्य निर्वाचन आयोग से दो मई की मतणना स्थगित कराने की कृपा करें।”

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