Friday, October 22, 2021

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अडानी को अमेरिका ने दिया बड़ा झटका, शेयर सूचकांक डॉओ जोंस से किया बाहर

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अडानी पोर्ट्स को अमेरिका में तगड़ा झटका लगा है। अडानी पोर्ट्स को अमेरिकी शेयर सूचकांक डॉओ जोंस ने बाहर कर दिया है। एस एंड पी डॉओ जोंस इंडाइसिस ने कहा कि भारत की अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड को म्यांमार की सेना (जिस पर इस साल तख्तापलट के बाद मानवाधिकार हनन का आरोप है) के साथ व्यापारिक संबंधों के कारण अपने सूचकांक से हटाया है, लेकिन क्या यह वास्तव में अकेला कारक है? नहीं, क्योंकि पिछले दिनों श्रीलंका सरकार ने कोलबों में विकसित किए जाने वाले एक प्रोजेक्ट से अडानी ग्रुप को बाहर कर दिया था। भारत, जापान और श्रीलंका के बीच हुए एक त्रिपक्षीय समझौते के तहत कोलंबो बंदरगाह के ईस्ट कंटेनर टर्मिनल को विकसित किया जाना था। भारत की तरफ से इस टर्मिनल में अडानी पोर्ट्स को निवेश करना था, लेकिन श्रीलंका सरकार ने अडानी पोर्ट्स के अनुबंध को एकतरफा रद्द कर दिया, तब तो इसमें मानवाधिकार हनन का एंगेल नहीं था। दरअसल अडानी पोर्ट्स के भारत से बाहर के विस्तार के बाद वैश्विक ताकतें सतर्क हो गई हैं और अडानी पोर्ट्स के खिलाफ लगातार बाधाएं खड़ी कर रही हैं।

गौरतलब है कि पिछले दिनों फाइनेंशियल टाइम्स ने अपनी एक रिपोर्ट में खुलासा किया था कि गौतम अडानी का बढ़ता व्यापारिक साम्राज्य भारत ही नहीं अंतर्राष्ट्रीय आलोचनाओं का केंद्र बनता जा रहा है। कुछ लोग मानते हैं कि पूंजी भारत के मध्य वर्ग की कीमत पर कुछ ही कॉरपोरेट घरानों में केंद्रित होती जा रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य की संपत्ति कुछ ही हाथों में सीमित होने से एकाधिकार बढ़ रहा है और प्रतिस्पर्धा घट रही है। अडानी की नए करार करने की भूख और राजनीतिक पहुंच ने क्रोनी कैपिटलिज्म को पीछे छोड़ दिया है और एकाधिकार पूंजीवाद की और तेजी से बढ़ रही है।

गौतम अडानी का सबसे बड़ा माईनस प्वाईंट उनका ऋणों पर आश्रित होना है। कभी भी देश में अडानी की प्रतिकूल सरकार आ गई और देश के विनिर्माण क्षेत्र में मोदी सरकार द्वारा जिस तरह बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थाओं पर शिकंजा कसा गया है वैसा कुछ कदम उठाया तो अडानी का आर्थिक साम्राज्य ध्वस्त होने से कोई चमत्कार ही बचा पाएगा। अडानी समूह ने कर्ज चुकाने में कभी देरी नहीं की न ही डिफॉल्ट किया, लेकिन किन्ही कारणों से यदि एक बार डिफॉल्ट शुरू हुआ तो अडानी समूह को अनिल अंबानी की रिलायंस बनते देर नहीं लगेगी।

डेटालिक के आंकड़ों के अनुसार, 11 नवंबर तक अडानी ग्रुप का कुल बकाया ऋण 30 बिलियन डॉलर से अधिक हो गया है, जिसमें 7.8 बिलियन डॉलर का बांड और 22.3 बिलियन डॉलर का ऋण शामिल है। क्रेडिट सुइस ने 2015 के हाउस ऑफ डेट रिपोर्ट में चेतावनी दी थी कि अडानी समूह बैंकिंग क्षेत्र के 12 प्रतिशत कर्ज लेने वाली 10 कंपनियों में सबसे ज्यादा गंभीर तनाव में है। फिर भी अडानी समूह विदेशी बैंकों या संस्थानों से उधार लेकर हरित ऊर्जा (ग्रीन एनर्जी) के लिए धन जुटा रहा है।

म्यांमार की सेना पर इस साल तख्तापलट के बाद मानवाधिकार हनन का आरोप है। अडानी ग्रुप देश का सबसे बड़ा निजी मल्टी-पोर्ट ऑपरेटर है जो सैन्य समर्थित म्यांमार आर्थिक निगम से लीज पर ली गई भूमि पर यांगून में 290 मिलियन डॉलर का पोर्ट बना रहा है। गुरुवार 15 अप्रैल को इंडेक्स खुलने से पहले इसे हटा दिया जाएगा। फरवरी में सैन्य तख्तापलट के बाद 700 से ज्यादा लोग मारे गए थे। आंग सान सू की नेतृत्व वाली सरकार को सत्ता से बेदखल किया जा चुका है।

इस खबर का अडानी पोर्ट्स के शेयर पर भी असर साफ दिखाई दिया। दोपहर करीब एक बजे BSE सेंसेक्स पर शेयर 3.77 फीसद की गिरावट के साथ 28.10 रुपये लुढ़क कर 716.40 रुपये पर पहुंच गया है। फिलहाल, अडानी पोर्ट्स की मार्केट कैप करीब 1.45 लाख करोड़ रुपये है। म्यांमार सेना पर मानवाधिकार हनन के आरोप के बावजूद अडाणी समूह ने उनसे व्यापारिक समझौता किया। इसके चलते अडाणी पोर्ट को एस एंड पी इंडेक्स से हटाने का निर्णय लिया गया है।

दरअसल कुछ दिनों पहले अडानी समूह के म्यांमार सेना के साथ हुई इस डील की पोल ऑस्ट्रेलिया के एबीसी न्यू्ज चैनल ने खोली थी। चैनल की रिपोर्ट के मुताबिक भारत के अडानी ग्रुप ने मिलिट्री के साथ यंगून शहर में एक बंदरगाह तैयार करने की डील की है।  इस डील के बाद म्यांमार इकोनॉमिक कॉरपोरेशन के लिए एक लीज डील के जरिए इस बंदरगाह को डेवलप करना था। अडानी ग्रुप इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए म्यांमार इकोनॉमिक कॉरपोरेशन को लैंड लीज फीस के तौर 30 मिलियन डॉलर की रकम दे रहा था। यंगून रीजन इनवेस्टमेंट कमीशन की तरफ से लीक डॉक्यूीमेंट्स के हवाले से कही है।  इस पूरी डील की कीमत 52 मिलियन डॉलर बताई जा रही है। इसमें से 22 मिलियन डॉलर बाद में मिलने की बात कही गई है।

अमेरिका और ब्रिटेन ने मार्च में म्यांमार की सेना से जुड़ी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए थे। बाइडेन प्रशासन ने जिन कंपनियों पर प्रतिबंध लगाया है, उसमें म्यांमार इकोनॉमिक कॉरपोरेशन और म्यांमार इकोनॉमिक होल्डिंग पब्लिक कंपनी लिमिटेड और एक सरकारी जेम्स कंपनी शामिल है। इस कंपनी का नाम सामने नहीं आ पाया है। अमेरिका के ट्रेजरी डिपार्टमेंट ऑफिस ऑफ फॉरेन असेट्स कंट्रोल ने 25 मार्च को प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया था।

(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और इलाहाबाद में रहते हैं।)

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