Saturday, October 16, 2021

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कौन है नितिन राज, आखिर क्यों पड़ी है योगी सरकार उनके पीछे?

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यदि आप छात्र हैं तो सिर्फ़ पढ़िए पढ़ने के अलावा यदि आपकी रुचि देश की राजनीति में है और अगर आप देश के वर्तमान हालात से दुखी हैं और प्रतिरोध में खड़े हो रहे हैं तो आपकी खैर नहीं। इस पर भी यदि आप दलित वर्ग से ताल्लुक रखते हैं और वैचारिक रूप से लेफ्टिस्ट हैं तब तो जान लीजिए कि आपकी शामत ही आ गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को काला झंडा दिखाने वाले छात्र नितिन को 22 साल की उम्र में पुलिस ने पांचवीं बार गिरफ्तार करके जेल भेज दिया है। बता दें कि नितिन राज आइसा के उत्तर प्रदेश के राज्य उपाध्यक्ष हैं। वहीं नितिन राज की रिहाई की जमानत याचिका दूसरी बार मजिस्ट्रेट ने खारिज करके 22 जनवरी की तारीख दे दी है।

16 मार्च 2020 को ठाकुरगंज थाना, लखनऊ में CAA-NRC प्रोटेस्ट को लेकर दर्ज हुई FIR नंबर 0142/2020 में 23 लोगों के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी संशोधन अधिनियम 2008 की धारा 66, आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम 1932 की धारा 7, भारतीय दंड संहिता की धारा 505, 427, 353, 283, 188, 149, 147, 145 के तहत मामला दर्ज किया गया था। पुलिस की FIR में प्रदर्शनकारियों पर उत्तेजक और भड़काऊ नारे लगाते हुए और पुलिसकर्मियों को धक्का देते हुए आगे बढ़ने, पोस्टर लगाने समेत कई आरोप लगाए गए थे।

गरीब दलित परिवार से ताल्लुक है नितिन का
नितिन राज का परिवार लखनऊ में एक जनता क्वार्टर में रहता है। नितिन की मां आंगनबाड़ी वर्कर हैं और पिता वेद प्रकाश कबाड़ का व्यापार करते हैं। नितिन के 80 वर्षीय बुजुर्ग दादा सुंदर लाल डिफेंस से रिटार्यड हैं। नितिन के जेल जाने से उससे भावनात्मक रूप से प्रगाढ़ जुड़ाव रखने वाले सुंदर लाल का रो-रो कर बुरा हाल है। पोते के जेल जाने के गम में न वो खाते हैं, न पीते हैं, न सोते हैं। बस एक ही रट है, मेरा नितिन जेल से कब छूटेगा।

उनकी मां चिंतित हैं कि वो आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से आती हैं, और बेटे को अगर जमानत नहीं मिलती है तो उसका भविष्य चौपट हो जाएगा।

बहन सृष्टि बताती हैं कि हम दो बाई बहन हैं। भाई का जेएनयू में एडमिशन हुआ है। कॉल लेटर आ गया है। वो बीबीएयू में मॉस कम्युनेशन से पोस्टग्रेजुएट हैं। बीबीएयू में भी पीएचडी के लिए क्वालिफाई किया है। बहुत दयालु हैं। उऩका किसी के साथ कहीं कोई ईशू नहीं है।

राजनीतिक दबाव में नहीं हो रही नितिन की जमानत!
नितिन के पिता वेद प्रकाश बताते हैं कि उनका बेटा क्रिमिनल नहीं है, लेकिन ये सरकार और प्रशासन उसके साथ क्रिमिनल की तरह ट्रीट कर रही है। जानबूझ कर फंसा दिया गया है। 15 मार्च 2020 को घर से गया और 16 मार्च को सीएए-एनआरसी के खिलाफ प्रोटेस्ट में जेल भेज दिया। हम उसके करियर को लेकर परेशान हैं।

वेद प्रकाश बताते हैं कि ऐसी कोई भी धारा नहीं लगी है, जिसमें 3 साल से ज़्यादा की सजा हो, लेकिन सरकार जमानत नहीं होने दे रही है। बताने वाले कह रहे हैं कि राजनीतिक दबाव है, इसके कारण जमानत नहीं हो रही है। योगी आदित्यनाथ को काला झंडा दिखाने के बाद से लखनऊ पुलिस नितिन के पीछे पड़ी है।

योगीराज में दलित-मुस्लिम निशाने पर
घर के बाहर ऑल इंडिया प्रोग्रेसिव वूमेन एसोसिएशन (AIPWA) की सह-सचिव मीना सिंह नितिन की गार्जियन हैं, और नितिन को बहुत करीब से जानती हैं। मीना सिंह बताती हैं कि नितिन बहुत ही शांत स्वभाव का है इसलिए मैं ज़्यादा परेशान हूं। हां उसमें समझदारी भी है और जहां आवाज़ उठानी हो वहां अपनी बात बुलंदी से कहता है।  

मीना सिंह बताती हैं कि नितिन के ऊपर ऐसी कोई संगीन धारा नहीं लगी है कि उसे जमानत न मिल सके। बावजूद इसके मजिस्ट्रेट ने जमनात नहीं दी और नितिन को जेल भेज दिया गया। मीना सिंह बताती हैं कि नितिन स्वभाव से बहुत ही सीधा और पढ़ने वाला लड़का है। दो बार उसने नेट क्वालिफाई किया है।

लखनऊ में इंटर पासआउट करके जब वो लखनऊ यूनिवर्सिटी आया तो उसका रुझान आइसा की ओर बढ़ा। आइसा के छात्र उसे अच्छे लगे होंगे, इसलिए वो आइसा के साथ जुड़ गया। जेएनयू में उसका सारा डॉक्युमेंट सबमिट है। वहां से कभी भी बुलावा आ सकता है। अगर जमानत नहीं मिलती है तो उसकी पढ़ाई का नुकसान हो जाएगा। मूलतः तो वो छात्र ही है।   

मीना सिंह बताती हैं, “मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जब राज्य के मुख्यमंत्री बने तब जून 2017 में छात्र निधि के पैसे से लखनऊ विश्वविद्यालय में कार्यक्रम होने वाला था, जिसमें मुख्यमंत्री आ रहे थे। तब कई छात्र संगठनों ने मुख्यमंत्री को काला झंडा दिखाया। उसमें आइसा की ओर से नितिन भी शामिल था। योगी आदित्यनाथ को काला झंडा दिखाए जाने के मामले में तमाम छात्रों के खिलाफ़ मुक़दमा दर्ज कर लिया गया। इसमें नितिन राज, पूजा शुक्ला और समाजवादी छात्र संगठन के दर्जनों छात्रों को जेल भेज दिया गया, और करीब 27 दिन बाद जमानत मिली थी। उस समय से ही नितिन राज पुलिस के निशाने पर है। वो किसी भी प्रोटेस्ट में शामिल होता है तो पुलिस उसे सबसे पहले टारगेट करती है।”

बता दें कि 6 जून, 2017 को लखनऊ विश्वविद्यालय प्रशासन ने शिवाजी महाराज के 1674 में हुए राज्याभिषेक को याद करते हुए एक कार्यक्रम का आयोजन किया था। इस कार्यक्रम का पूरा खर्चा (लगभग 25 लाख) छात्र-निधि में जमा पैसों से उठाया जा रहा था, जोकि ज़ाहिर तौर पर अनैतिक था और उस पर तुर्रा यह कि इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के बतौर योगी आदित्यनाथ को ही बुलाया गया था। नितिन ने तेरह अन्य छात्रों के साथ मिलकर योगी आदित्यनाथ को कैंपस आने पर काला झंडा दिखाया।

यह योगी के मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके खिलाफ पहला मुखर विरोध था। यह स्पष्ट था कि योगी जैसे अलोकतांत्रिक मिजाज़ के लोगों को यह हरगिज़ भी बर्दाश्त नहीं होना था। नितिन राज समेत सभी चौदह छात्रों को एक लोकतंत्र में रहने के नाते अपने ‘विरोध के अधिकार’ का उपयोग करने के ‘अपराध’ में जेल भेज दिया गया। जेल जाने के दौरान, जेल में और जेल से निकलने के बाद भी उन्होंने तमाम प्रताड़नाएं झेलीं।

लखनऊ विश्वविद्यालय प्रशासन ने उन्हें इस शर्त पर उनकी डिग्री दी कि वे दोबारा इस संस्थान में प्रवेश नहीं लेंगे। इन तमाम प्रताड़नाओं के बाद भी नितिन में लड़ने और पढ़ने का जज़्बा खत्म नहीं हुआ। उन्होंने लखनऊ स्थित बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्विद्यालय (BBAU) में एमए (जनसंचार) में दाख़िला लिया।

सीएए एनआरसी आंदोलन के बाबत वो बताती हैं, “पिछले साल सीएए-एनआरसी आंदोलन शुरू हुआ तो आंदोलन के तीसरे-चौथे दिन नितिन राज लखनऊ के घंटाघर में चल रहे विरोध-प्रदर्शन में शामिल होने के लिए गए थे, तो पुलिस ने उसे सड़क पर ही धर लिया। उसका थैला चेक किया और गाली-गलौच करते हुए उसे गिरफ्तार कर के ले जा रहे थे, तभी महिलाएं विरोध में खड़ी हों गई तो छोड़ दिया।”

उन्होंने बताया कि दूसरी बार गया तो फिर पुलिस उसे पकड़ कर ले गई। तब वकीलों का एक समूह थाने जाकर उसे निजी मुचलके पर छुड़ा कर ले आया। तीसरी बार 16 मार्च को पुलिस पहले से ही घात लगाकर बैठी थी और उसे धरना स्थल पर पहुंचने के पहले ही सड़क पर से उठा लिया। उसे वैन में बिठाकर मारा-पीटा और फोन छीनकर स्विचऑफ कर दिया। मीना जी बताती हैं कि उसके बाद हमें परिचितों ने फोन करके बताया कि नितिन को फिर से पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

मीना सिंह ने बताया कि हम फोन करके पूछते रहे कि नितिन किस थाने में हैं और पुलिस हमें घुमाती रही। हजरतगंज पुलिस को फोन करते तो वो कहती ठाकुरगंज थाना देख लीजिए, ठाकुरगंज थाने कॉल करते तो वो कहते कि केसरबाग़ थाने देख लीजिए। ऐसा करके वो हमें घुमाते रहे। पुलिस अधिकारियों से बात करने के बाद रात के 12 बजे पता चला कि ठाकुरगंज थाने की पुलिस गिरफ्तार करके ले गई है। इसके बाद इन लोगों ने दबिश देकर दो लड़कों को और गिरफ्तार कर लिया। दूसरे दिन फिर सबको जेल भेज दिया गया।

उन्होंने कहा कि सुनवाई की प्रक्रिया में हम थे और उसी दौरान कोविड-19 महामारी फैली तो पैरोल हो गया। 15 दिन बाद पैरोल पर छोड़ दिया गया था। पैरोल पीरियड खत्म होने के पहले से हम जमानत के लिए लगे हुए हैं, लेकिन तारीख मिलते-मिलते 12 जनवरी की तारीख मिली तब तक 5 जनवरी 2021 को पैरोल की अवधि खत्म हो गई और नितिन को दोबारा से गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया।

योगी राज में दलित समुदाय के लोगों पर हमले को लेकर मीना सिंह कहती हैं, “सीएए-एनआरसी के खिलाफ़ आंदोलन में शामिल लोगों को अब तक परेशान किया जा रहा है। अल्पसंख्यकों के बाद अगर किसी को ज़्यादा परेशान किया है सरकार ने तो वो दलित बहुजन समाज के लोगों को, जबकि उस आंदोलन में लेफ्ट, डेमोक्रेट, प्रगतिशील, बुद्धिजीवी तबके के लोग लगे हुए थे, लेकिन दलितों को ज़्यादा टारगेट किया गया है। जैसे मैं खुद वहां कई बार गई।

मीना सिंह ने बताया कि नितिन मेरे साथ ही गया था, लेकिन हमें कभी परेशान नहीं किया गया, लेकिन उसे बहुत परेशान किया गया। एसआर दारापुरी को पुलिस ने परेशान किया, जबकि वो खुद प्रशासनिक अधिकारी रह चुके हैं। तो कह सकते हैं कि मुस्लिमों के बाद दलितों की संख्या ज़्यादा है, जिन्हें इस योगी सरकार द्वारा टारगेट किया गया है।”

उन्होंने कहा कि दलित-मुस्लिम और महिलाएं इस सरकार में निशाने पर हैं। बलात्कार की घटनाओं का अगर आंकड़ा देखें तो अधिकांश पीड़ित दलित समुदाय की स्त्रियां हैं। यूपी में जब से योगी सरकार आई है यहां मुस्लिम, दलित और महिलाओं पर हमले होते रहे हैं। बस इसी बात का शिकार नितिन भी हुए, क्योंकि वह दलित हैं। इस सरकार में पुरानी वर्णवादी व्यवस्था फिर से लागू हो गई है। सरकार और कोर्ट मिलकर बता रहे हैं कि आप छात्र हैं तो राजनीति मत कीजिए, महिला हैं तो घर से बाहर मत निकलिये। दलित मुस्लिम और महिलायें कैसे सर उठा सकते हैं।

नितिन की रिहाई के लिए हो रहे प्रदर्शन
नितिन राज की गिरफ़्तारी को गैर-कानूनी करार देते हुए उनके संगठन आइसा समेत कई मंचों से उनकी रिहाई की मांग उठ रही है। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (JNUSU) द्वारा जारी एक पोस्टर में यह अपील की गई है कि CAA-NRC के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे जेएनयू छात्र नितिन राज को तत्काल रिहा किया जाए। इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ भवन, जेएनयू परिसर समेत कई जगहों पर नितिन राज की रिहाई के लिए प्रदर्शन हुए हैं।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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