Monday, December 6, 2021

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आसनसोल: बेरोजगारी और देह व्यापार की अंधेरी गलियों में घुटती नाबालिग बच्चियां

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देश की आजादी की 75वीं वर्षगांठ मानयी जा रही है। इन 75 सालों में देश में कई तरह के बदलाव देखने को मिले हैं। टेक्नोलॉजी की दुनिया में हम विश्व का छठा सबसे बड़ा देश हैं, रक्षा के क्षेत्र में तकनीकी रूप से हम धीरे-धीरे आत्मनिर्भर होते जा रहे हैं, स्पेस विज्ञान के क्षेत्र में रोज नए आयाम गढ़ रहे हैं, ऐसे ही कई मुकाम हासिल किए हैं हमने मुल्क के आज़ाद होने के बाद। इतना कुछ होने के बाद भी कुछ चीजें ऐसी हैं जिन पर अभी भी काम होना बाकी है। कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर बहस करना जरुरी है। ऐसा ही एक मुद्दा है भारत में देह व्यापार। जिसकी बदनाम गलियों में कई मासूम जानें तंग कमरों में अपना दम तोड़ देती हैं।

ऐसी ही एक जगह है आसनसोल (पश्चिम बंगाल) की रेडलाइट एरिया। जहां कई मासूम लड़कियां वहां से निकलने की जद्दोजहद में अपनी जान गंवा दे रही हैं। पिछले दिनों पश्चिम बंगाल बाल अधिकार संरक्षण के निर्देश पर जिला प्रशासन और पुलिस संयुक्त छापेमारी कर लड़कियों को रेडलाइट एरिया से रिहा करवाया गया। रिहा करवाई गई सभी 45 लड़कियों में ज्यादातर नाबालिग थीं। जिन्हें सेक्स वर्कर के तौर पर काम कराया जा रहा था। इस खबर के प्रकाश में आते ही पूरी शहर में हड़कंप मच गया।

इस खबर के बाद पूरी रेडलाइट एरिया का काला सच सबके सामने परत दर परत बाहर आने लगा। जहां धड़ल्ले से मजबूर नाबालिग लड़कियों की तस्करी की जा रही थी। हालांकि बाद में यह आश्वान दिया कि लड़कियों की जांच कर उन्हें उनके घर पहुंच दिया गया। इसके दूसरे दिन जब एक बार फिर छापेमारी के इरादे से आसनसोल दुर्गापुर पुलिस आयुक्त अजय कुमार ठाकुर पहुंचे तो वहां हड़कंप मच गया।

दिशा जनकल्याण की अंधेरी गलियों में नाबालिकों की खरीद फरोख्त का काम खुलेआम चल रहा था। इन बदनाम गलियों में कुछ लोगों का नाम भी सामने आया। जिसमें एक दम्पति का नाम सबसे ज्यादा सुर्खियों में आया वो है गौतम गोस्वामी और उसकी पत्नी सपना विश्वास। बंग आवाज की खबर के अनुसार गौतम समेत तीन अन्य आदमी यहां महिलाओं की खरीद फरोख्त करने के साथ जुआ खिलवाने का काम करते थे। इस इलाके में प्रतिबंधित ड्रग्स और दूसरे अन्य नशे का कारोबार का कारोबार तेजी से फल-फूल रहा है।

देश में बढ़ती बेरोजगारी और लॉकडाउन ने लोगों की कमर तोड़ कर रख दी है। ऐसे में बड़ी संख्या में नाबालिग लड़कियों का रेड लाइट एरिया से रेस्क्यू करना अपने आप में एक बड़ा सवाल है। एनसीआरबी की 2016 की रिपोर्ट के अनुसार पश्चिम बंगाल में मानव तस्करी के 3,113 मामले दर्ज किए थे। इसमें 2,687 लड़कियों के तस्करी के मामले थे। वहीं एनसीआरबी की 2020 की रिपोर्ट के अनुसार महाराष्ट्र के बाद पश्चिम बंगाल मानव तस्करी में दूसरे नंबर पर है।

पश्चिम बंगाल में मानव तस्करी के कई कारणों में से एक बड़ा कारण गरीबी है। गरीब परिवार के परिजनों को पैसे और विवाह का प्रलोभन दे लड़कियों को झांसे में फंसा कर अन्य को बेंच दिया जाता है, तो कई बार दलालों के धोखे में आ लड़कियां मानव तस्करी का शिकार बन जाती हैं। आंकड़ों की बात करें तो साल 2018 में कोलकाता में 2,548 महिला तस्करी के मामले दर्ज किए गए थे। नदिया जिला इन सबका हब बनता जा रहा है। मानव तस्करी के 2017 में 1,708 मामले दर्ज किए गए वहीं 2018 में 2,468 मामले दर्ज किए गए थे। जिन महीलाओं को रेस्क्यू किया गया था उनमें से ज्यादातर महिलाओं को विवाह के झांसे, मजूदरी के नाम, बैंड पार्टियों में डांस करने के नाम पर बेंच दिया गया था।

हो सकता है आसनसोल से पकड़ी गई लड़कियां ज्यादातर काम की तलाश में घर से बाहर निकली होंगी और उन्हें काम के काम पर रेडलाइट की अंधेरी गलियों में बैठा दिया गया होगा। 

(पश्चिम बंगाल से स्वतंत्र पत्रकार पूनम मसीह की रिपोर्ट)

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