अभी तक तो यूं माना जाता रहा है कि संघ और भाजपा ही बदले की भावना से काम करती रही हैं। संघ का जन्म ही बदले की भावना का द्योतक है। इसके लिए उन्होंने अंग्रेजों से मिलकर देश के स्वतंत्रता सेनानियों के साथ गद्दारी की जो ऐतिहासिक दस्तावेजों में मौजूद है। भाजपा जब से केंद्रीय सत्ता पर सवार है तब से वे इस लक्ष्य को पाने में जुटे हुए हैं। बाबरी मस्जिद विवाद, गोधरा काण्ड जैसे बड़े मामले इनके इरादों की पुष्टि करते हैं।
देश में मुसलमानों के ख़िलाफ़ लगातार, बेझिझक सरकार से लेकर उसके तमाम क्रियान्वयन क्षेत्रों में उनके साथ सौतेला व्यवहार जारी है। लव-जिहाद और गौकशी को लेकर अब तक चले बुलडोजर से उनको मटियामेट करने का अभियान सुको के आदेश की अवज्ञा करते हुए धड़ल्ले से चल रहा है। अब तो चुनाव आयोग ने घुसपैठियों के साथ मुस्लिम समाज को जोड़कर उन्हें मतदाता सूची से हटाने की जो तैयारी की है उससे उनका देश में अस्तित्व ही समाप्त हो जायेगा।
लगता है, इतने बड़े बदले की भावना के अभियान से भी सरकार को सुकून नहीं मिल रहा है इसलिए अब NSA अजीत डोभाल ने ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग’ में युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि भारत का इतिहास अपमान और बेबसी से भरा रहा है। उन्होंने कहा, ‘हमें अपने अतीत का बदला लेना होगा और भारत को फिर महान बनाना होगा।’ डोभाल ने चेताया कि सुरक्षा खतरों को नजरअंदाज करना सबसे बड़ी त्रासदी होगी और आने वाली पीढ़ियों को यह सबक याद रखना चाहिए।
तो डोभाल साहिब ये बताइए कि क्या तब हमारे देश के लोग बुज़दिल थे। जो देश में घुसने वालों को नहीं रोक सके। इसके लिए जनाब आपको भारतीय संस्कृति की बुनियाद को टटोलना चाहिए जिसमें वसुधैव कुटुम्बकम की सदिच्छा मिलती है। इसलिए भारत में बहुत सी प्रजातियां यहां आईं और बस गईं। आज जिन चितपावनों ने संघ की बागडोर संभाल रखी है। जिनकी खुशी के लिए यह बात की जा रही है ,पहले उनसे बदला लेने की योजना बनाने की तो कोई बात हो।
यहां यह भी गौर करने की बात है जिनके खिलाफ़ नफ़रत का पाठ आज पढ़ाया जा रहा है वे मुसलमान भारत में बाहर से नहीं आए, घुसपैठिए नहीं हैं। वह पीढ़ियों से यहाँ रह रहे हैं। अंग्रेज़ों के ख़िलाफ़ आज़ादी की लड़ाई में इनका अविस्मरणीय योगदान है और विभाजन हुआ तो उन्होंने पाकिस्तान जाने के बजाय भारत को चुना।
हम यह मानते हैं वर्तमान में देशों की सीमा रेखाएं हैं, किंतु दिल तो मिले हुए हैं आज वे हमारे पड़ोसी हैं। भारत की शरणागत सहृदयता से भरपूर प्राचीन नीति के तहत यहां तमाम पड़ोसी देशों के लोग लंबे समय से निवासरत हैं। उनके ख़िलाफ़ मुहिम चलाना और उनके आए पूर्वजों की नई पीढ़ी के ख़िलाफ़ आग लगाने के काम का आह्वान उचित नहीं है। जो आतंकी हैं, ग़लत तरीके से आते हैं उनसे सीमाओं की रक्षा कीजिए जिनकी निगरानी का आपको अधिकार है। बाकी भारत में रह रहे लोगों को मत सताइए। ये देश को कमज़ोर बनाएगा। वैसे भी हमारा देश क्षमाशीलता का भी हामी है।अपराधी को सुधरने का अवसर देता है। उन्हें सुधारिए भी।
दुनिया भर में जब संक्रांति का दौर चल रहा है। ऐसे संकटकाल में बदले की भावना के दरवाजे खोलने के लिए युवाओं को आमंत्रित करना एक बड़ी त्रासदी को जन्म दे सकता है। कृपया, संघी विचारधारा को गले लगाकर देश को गर्त में ना पहुंचाएं एक सरकारी देश रक्षक की हैसियत से काम करें। सरकारें तो बदलती रहती हैं। भारतीय संस्कृति कायम रहे ऐसे प्रयास होने चाहिए।
(सुसंस्कृति परिहार लेखिका और एक्टिविस्ट हैं।)