Saturday, October 23, 2021

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culture

विघटन और विखंडन में विश्वास करने वाले नहीं समझ सकते हैं गंगा-जमुनी तहजीब

विश्व हिन्दू परिषद के महासचिव मिलिन्द परांडे ने हाल (सितम्बर, 2021, 'दि टाइम्स ऑफ इंडिया') में कहा कि गंगा-जमुनी तहजीब (जिसे भारत में हिन्दू और मुस्लिम संस्कृति के संगम के लिए प्रयुक्त किया जाता है) एक अप्रासंगिक और खोखली...

उनके तालिबान तालिबान हमारे वाले संत !

अपने 20 साल के नाजायज और सर्वनाशी कब्जे के दौरान अफ़ग़ानिस्तान से लोकतान्त्रिक संगठनों, आंदोलनों और समझदार व्यक्तियों का पूरी तरह सफाया करने के बाद अमरीकी उसे तालिबानों के लिए हमवार बनाकर, उन्हें इस खुले जेलखाने की चाबी थमाकर...

लेखक और सांस्कृतिक संगठनों ने बयान जारी कर डीयू के पाठ्यक्रम से लेखिकाओं की रचनाओं को हटाने का किया विरोध

(लेखक और सांस्कृतिक संगठनों ने दिल्ली विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम से मशहूर लेखिका महाश्वेता देवी समेत तीन लेखिकाओं की रनचाओं को निकाले जाने का विरोध किया है। इस सिलसिले में उन्होंने एक साझा बयान जारी किया है। पेश है उनका...

जब तिहाड़ जेल में भ्रष्टाचार का यह आलम है तो बाकी जेलों में क्या होगा मी लार्ड!

क्या आप जानते हैं जेलों में पैसे के बल पर सभी सुख सुविधा उपलब्ध रहती है। जेल चाहे दिल्ली की तिहाड़ जेल हो या देश के किसी भी प्रदेश की पैसा फेंक ऐश कर की संस्कृति है। जितना बड़ा...

भारतीय समाज में बर्बरता और क्रूरता की इंतहा था केरल का स्तन टैक्स

लगभग संपूर्ण भारतीय इतिहास हमेशा से, हर काल में कुछ घोर जातिवादी वैमस्यता, वर्णवादी अशिष्टता की कलुषित विचारधारा अपने मन मस्तिष्क और दिल में रखने वाले कुछ निकृष्ट व अमानवीय व दरिंदे पुरूषों द्वारा लिखा गया है, जो इस देश के 85 प्रतिशत बहुजनों, आदिवासियों, शूद्र...

ख़त्म हो अब जानलेवा वीआईपी कल्चर

इस देश की जनता अगर भुलक्कड़ न होती तो बहुत सारी चीजें आसानी से ठीक हो जातीं.....अगर आपको याद हो तो भाजपा की ओर से संभावित प्रधानमंत्री का चेहरा बने नरेन्द्र मोदी एक और जुमला, जिस पर भुलक्कड़ जनता...

असम की संस्कृति और अस्मिता की रक्षा की गारंटी, चाय बागानों के मजदूरों को मिलेंगे रोजाना 365 रुपये: प्रियंका गांधी

“असम की धरती माँ की जय। इसके हरे-भरे बाग़ानों की जय। बाग़ानों में सुबह से शाम तक कड़ी धूप में काम करती श्रमिकों की जय। प्रदेश के नदियों, जाति जनजाति की जय। यहां की बहुरंगी संस्कृति की जय। यहाँ...

किसान आंदोलनः हिंदुत्व के महाख्वाब से बाहर आकर अपनी जड़ों की तरफ लौटने को तत्पर गांव

हां, दिल के करीब है खेती-किसानी। और, दिमाग के? ढेरों सवाल उमड़ पड़ते हैं। खेती करना घाटे का सौदा है; यहां तो बस जिंदगी थमी सी रहती है; काम करते जाओ बैल की तरह और बस उस जैसा ही...

किसान आंदोलन: श्रमण बनाम ब्राह्मण संस्कृति का टकराव

संघ-भाजपा गठजोड़ द्वारा कारपोरेट-पूंजपीतियों के हित में लाए गए नए कृषि कानून के खिलाफ किसान आंदोलन चरम पर है। वर्तमान समय में इस आंदोलन को कई नजरिए से व्याख्यायित किया जा रहा है। जिसमें उच्च जातीय-उच्च वर्गीय एवं परजीवी...

अतीत के किसान आंदोलनों से क्यों अलग और खास है यह आंदोलन!

कुछ भयानक प्रदूषित महानगरों को छोड़कर मुझे तो भारत का हर हिस्सा सुंदर लगता है। कुछ सूबे/इलाके ज्यादा अच्छे लगते हैं, जैसे पंजाब, केरल, बंगाल-असम-झारखंड-छत्तीसगढ़ के कुछ इलाके, गोवा, महाराष्ट्र के कुछ इलाके और कश्मीर भी! पर पंजाब का...
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मोदी का महाजुमला है 26 करोड़ के वैक्सीनेशन को 100 करोड़ बताना

“जब एन-95 मास्क और ग्लव्स आ जाये तो उन्हें मेरी क़ब्र पर पहुंचा देना। वहां ताली और थाली भी...
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