Wednesday, December 8, 2021

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किसान आंदोलन: श्रमण बनाम ब्राह्मण संस्कृति का टकराव

संघ-भाजपा गठजोड़ द्वारा कारपोरेट-पूंजपीतियों के हित में लाए गए नए कृषि कानून के खिलाफ किसान आंदोलन चरम पर है। वर्तमान समय में इस आंदोलन को कई नजरिए से व्याख्यायित किया जा रहा है। जिसमें उच्च जातीय-उच्च वर्गीय एवं परजीवी...

अतीत के किसान आंदोलनों से क्यों अलग और खास है यह आंदोलन!

कुछ भयानक प्रदूषित महानगरों को छोड़कर मुझे तो भारत का हर हिस्सा सुंदर लगता है। कुछ सूबे/इलाके ज्यादा अच्छे लगते हैं, जैसे पंजाब, केरल, बंगाल-असम-झारखंड-छत्तीसगढ़ के कुछ इलाके, गोवा, महाराष्ट्र के कुछ इलाके और कश्मीर भी! पर पंजाब का...

हीरा सिंह मरकामः गोंडवाना का सूरज अस्त हो गया

कुछ ही समय पूर्व कोरोना संक्रमण के चलते पूर्व विधायक मनमोहन शाह बट्टी के असामयिक निधन के बाद दादा हीरा सिंह मरकाम जी की मृत्यु की दुखद खबर मिली। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे। दादा जी...

राम और रावण: दो चरित्र और उन्हें देखने का दो नजरिया

(भारतीय इतिहास, परंपरा और उसकी संस्कृति में बहुत सारी चीजें विवादित रही हैं। उनमें सर्वाधिक विवाद उसकी पौराणिक कथाओं को लेकर रहा है। क्योंकि न तो उनका कोई साक्ष्य मिलता है और न ही तथ्यों की कसौटी पर वे...

पतनशील हिंदू और पूंजी की संस्कृति की दुरभिसंधि: अंधकार युग की ओर बढ़ता भारत

भारत में उत्तर से लेकर दक्षिण और पूरब ले लेकर पश्चिम तक आरएसएस (संघ), भाजपा एंव अन्य आनुषंगिक संगठनों और कार्पोरेट घरानों का वर्चस्व केवल एक राजनीतिक और आर्थिक परिघटना नहीं है, उससे ज्यादा कहीं गहरे व्यापक स्तर पर...

भौतिकवाद से दूर आदिवासी साहित्य में जीवन सौंदर्य

प्रख्यात विद्वान और 22 भारतीय भाषाओं की लोक-कथाओं का संकलन और संपादन करने वाले एके रामानुजन ने लोक साहित्य को कुछ यूं व्याखायित किया है: “लोक साहित्य भारतीय पिरामिड का वह आधार है जिस पर शेष समस्त भारतीय साहित्य...

पूर्वाग्रहों और अंतर्विरोधों से भरी शिक्षा नीति

राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 चौंतीस वर्षों के अंतराल के बाद आई इस सदी की पहली संपूर्ण शैक्षिक नीति है। किसी भी नीतिगत दस्तावेज से हमें उस समय की सरकार की नीतियों और नीयत दोनों का पता चलता है। ऐसे...

पुण्यतिथि पर विशेष: इस्लाम को शरीर और हिंदू धर्म को मस्तिष्क की संज्ञा देते थे स्वामी विवेकानंद

स्वामी विवेकानंद देश के महानतम प्रज्ञा पुरुष थे। 4 जुलाई, उनकी 118वीं पुण्यतिथि है। साल 1902 में आज ही के दिन पश्चिम बंगाल के बेलूर मठ में ध्यानावस्था में उन्होंने अपनी आखिरी सांस ली थी। महज 39 साल की...

विराट व्यक्तित्व के मालिक थे जवाहरलाल नेहरू

स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से एक, पंडित जवाहर लाल नेहरू का भारतीय इतिहास में अविस्मरणीय योगदान है। परतंत्र भारत में पंडित नेहरु का महत्व जहां देश को स्वतंत्र कराने के लिए किए गए उनके अथक प्रयासों के...

बलराज साहनी: सिनेमा-संस्कृति और लोकाचार के अमिट हस्ताक्षर

बलराज साहनी होना या बनना सबके बूते की बात नहीं और शायद इसीलिए उन  सरीखी शख्सियत जिसे दुनिया कहते हैं, एक ही हुई! जिसका जन्म 1 मई 1913 को हुआ। यानी समूची दुनिया में मनाए जाते मजदूर दिवस के...
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सरकार की तरफ से मिले मसौदा प्रस्ताव के कुछ बिंदुओं पर किसान मोर्चा मांगेगा स्पष्टीकरण

नई दिल्ली। संयुक्त किसान मोर्चा को सरकार की तरफ से एक लिखित मसौदा प्रस्ताव मिला है जिस पर वह...
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