महेंद्र सिंह के शहीद दिवस पर मजदूरों ने वी बी ग्राम जी कानून के विरुद्ध आन्दोलन का बिगुल फूंका

“मनरेगा कानून सख्ती से लागू करो” “केंद्र सरकार होश में आओ” “लड़ेंगे जीतेंगे हम” “दुनिया के मजदूरों एक हों” जैसे गगनभेदी नारों के साथ ग्राम स्वराज मजदूर संघ, मनिका एवं अन्य सामाजिक संगठनों द्वारा लातेहार जिला के मनिका में एक दिवसीय जनाक्रोश रैली हाई स्कूल से निकली और रैली प्रखण्ड परिसर पहुंचकर संकल्प सभा में तब्दील हो गई।

संकल्प सभा में सर्वप्रथम शहीद कामरेड महेंद्र सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की गई और “कामरेड महेंद्र सिंह तुम जिन्दा हो, खेतों में खलिहानों में” “महेंद्र सिंह अमर रहें” “महेंद्र सिंह तेरे अरमानों को, मंजिल तक पहुँचायेगे” जैसे नारे लगाये गए और केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा मनरेगा कानून को ख़त्म कर नया वीबी ग्राम जी लाये जाने के विरोध में रैली में शामिल मजदूरों ने जोरदार विरोध जताया। 

इस अवसर पर भाकपा (माले) के मनिका प्रखण्ड सचिव मुनेश्वर सिंह ने कहा कि “कामरेड महेंद्र सिंह जीवन पर्यंत गरीब-गुरबों के अधिकारों के लिए खेत खलिहानों में संघर्ष करते हुए अपनी जान दे दी। दुश्मनों ने भरी सभा में उनको गोलियों से छलनी कर दिया था।”

झारखण्ड नरेगा वाच के राज्य संयोजक जेम्स हेरेंज ने कहा कि “केंद्र सरकार एक गहरी साजिश के तहत मजदूरों उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित कर रही है। लोकसभा में जल्दबाजी में वीबी ग्राम जी कानून लाना इसी साजिश का हिस्सा है। इस नए कानून में 125 दिनों के काम देने बात सिर्फ छलावा है। जब 12 महीने काम की गारन्टी होने के बाद भी देश में औसतन 53 दिनों से अधिक किसी मजदूर को काम नहीं दे सकी तो 10 महीने में 125 दिन काम देने बात हजम नहीं होती।”

उन्होंने आगे कहा कि “मनरेगा अधिकार-आधारित और मांग-संचालित योजना है, इसमें कोई भी ग्रामीण परिवार काम की मांग किसी भी मौसम में मांग सकता था और सरकार काम देने के लिए बाध्य थी। यह भारत के सभी ग्रामीण क्षेत्रों के लिए लागू है कि जितना काम मांगा जायेगा, उतना फण्ड केंद्र सरकार देगी। इस योजना के तहत केंद्र सरकार अकुशल श्रम मजदूरी का 100% लागत वहन करती है। केंद्र और राज्यों के बीच लगभग 90:10 का अनुपात केंद्र 100%श्रम लागत और 75% सामग्री लागत वहन करती है।

उन्होंने कहा कि विकेंद्रीकृत ग्राम सभाएं स्थानीय जरूरतों के आधार पर योजनाओं का निर्धारण करती थीं और प्राथमिकताएं तय करती थी। ग्रामीण निवासी साल में किसी भी समय (बरसात के समय भी) काम की मांग कर सकते हैं। सामाजिक अंकेक्षण (सोशल ऑडिट) ग्राम सभाओं द्वारा कार्यों का नियमित सामाजिक अंकेक्षण एक प्रमुख जवाबदेही उपकरण है।”

जेम्स हेरेंज ने बताया कि “जबकि नए कानून में राज्य सरकारें फसलों की बुआई और कटाई के चरम कृषि मौसमों के दौरान कुल 60 दिनों की अवधि अधिसूचित करेंगी, जिस दौरान कोई काम न दिया जायेगा और न ही मजदूरी। बायोमैट्रिक प्रमाणीकरण, जिओ फेशियल टेक्नोलॉजी और मोबाईल आधारित निगरानी पर अत्यधिक जोर है, जिससे बहिष्करण का खतरा बढ़ेगा। केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित बजट के आधार पर काम उपलब्ध कराया जायेगा। केंद्र सरकार राज्यों के लिए एक ‘मानक आवंटन’ तय करेगी। इससे अधिक खर्च होने पर राज्य सरकारों को स्वयं वहन करना पड़ेगा।”

संकल्प सभा में जेएमएम प्रखण्ड अध्यक्ष – नगीना बीबी, राजू उरांव, मकलदेव सिंह, मरियम तिर्की, सुखदेव सिंह, सुखमनी देवी, शानियारो देवी, श्यामा सिंह, पचाठी सिंह, जितेन्द्र सिंह, राजेश्वर सिंह आदि लोगों ने भी अपने विचार रखे।

इस अवसर पर आन्दोलन के अगले चरण में 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के दिन सभी ग्राम सभाओं से वीबी ग्राम जी कानून के विरुद्ध प्रस्ताव पारित कर सरकार को भेजने, 22 जनवरी को दिल्ली में “मनरेगा बचाओ संग्राम” में मनिका से अधिक से अधिक लोग शामिल होने, 30 जनवरी को गांधी जी के शहादत दिवस में उपवास का कार्यक्रम और 2 फ़रवरी नरेगा दिवस के दिन रांची के मोराबादी में विशाल जनाक्रोश रैली में हजारों की संख्या में शामिल होने की अपील की गई।

 सभा का संचालन नरेगा सहायता केंद्र के लालबिहारी ने किया।

(विशद कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं।)

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