केंद्रीय ट्रेड यूनियनों द्वारा आहूत देशव्यापी हड़ताल के समर्थन में पटना व रांची जोरदार प्रदर्शन व रैली

संयुक्त ट्रेड यूनियनों द्वारा पूर्व आयोजित कार्यक्रम के तहत आज 12 फरवरी को आहूत एक दिवसीय आम हड़ताल के समर्थन में देश के अन्य राज्यों सहित बिहार की राजधानी पटना और झारखंड की राजधानी रांची में वाम एवं धर्मनिरपेक्ष राजनीतिक दलों तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों के संयुक्त आह्वान पर केंद्र सरकार की मजदूर–किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ जोरदार प्रतिवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया।

भारत–अमेरिका ट्रेड डील के बहाने अमेरिकी साम्राज्यवाद के समक्ष आत्मसमर्पण और श्रम कानूनों को कमजोर करने की साजिश के विरोध में जहां भाकपा (माले) के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता पटना की सड़कों पर उतरे वहीं झारखंड के रांची स्थित अल्बर्ट एक्का चौक को वाम एवं धर्मनिरपेक्ष राजनीतिक दलों तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा जाम कर व्यापक प्रदर्शन किया गया।

पटना के डाकबंगला चौराहे पर आयोजित सभा को संबोधित करते हुए भट्टाचार्य ने कहा कि मजदूरों की इस ऐतिहासिक हड़ताल को खेत मजदूरों, किसानों, छात्रों और नौजवानों का व्यापक समर्थन मिला है, जो सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ बढ़ते जनाक्रोश को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लाए गए 4 श्रम कोड मजदूरों को अधिकारविहीन बनाने और पूंजीपतियों की मनमानी को कानूनी संरक्षण देने की साजिश हैं। ये श्रम कोड मजदूरों को संगठित होने और अपने अधिकारों के लिए लड़ने से कमजोर करने का प्रयास हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार किसानों के ऐतिहासिक आंदोलन ने 3 कृषि कानूनों को वापस लेने के लिए सरकार को मजबूर किया, उसी प्रकार मजदूरों के संघर्ष से 4 श्रम कोड भी वापस कराए जाएंगे।

मनरेगा के मुद्दे पर बोलते हुए उन्होंने ने कहा कि यह कानून खेत मजदूरों और ग्रामीण गरीबों को रोजगार की गारंटी देने के लिए बना था। मजदूर संगठनों की मांग है कि मनरेगा के तहत 200 दिन का रोजगार और कम से कम 600 रुपये प्रतिदिन मजदूरी सुनिश्चित की जाए। लेकिन इसके विपरीत, मोदी सरकार ने मजदूरों के साथ विश्वासघात किया है और ऐसी नीतियां लागू की हैं जिनसे ग्रामीण बेरोजगारी और बढ़ेगी।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने देश की खेती-किसानी को बहुराष्ट्रीय कंपनियों और अमेरिका के हितों के सामने गिरवी रख दिया है। कृषि क्षेत्र को विदेशी दबावों के लिए खोलना राष्ट्रीय हितों के खिलाफ है और देश की 60 प्रतिशत आबादी के जीवन पर सीधा आघात है।

कार्यक्रम में ऐक्टू, खेग्रामस, अखिल भारतीय किसान महासभा, रसोइया संघ, आपदा मित्र, रात्रि प्रहरी सहित विभिन्न संगठनों के संयुक्त नेतृत्व में बुद्ध स्मृति पार्क से सैकड़ों की संख्या में मजदूरों, किसानों, छात्र-नौजवानों और स्कीम वर्कर्स ने जुलूस निकाला. यह जुलूस शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए डाकबंगला चौराहे पर सभा में परिवर्तित हुआ।

इसके पूर्व, सुबह 9 बजे ऑटो चालक संघ के नेतृत्व में स्टेशन रोड से एक जुलूस निकाला गया, जो शहर के विभिन्न इलाकों से गुजरते हुए डाकबंगला चौराहे पर मुख्य कार्यक्रम में शामिल हुआ।

रांची में आयोजित कार्यक्रम भाकपा माले के राज्य सचिव कॉमरेड मनोज भक्त, कॉमरेड प्रकाश बिप्लव, माकपा के महेंद्र पाठक, भाकपा के नेतृत्व में बड़ी संख्या में तृणमूल कांग्रेस एवं समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने भी भागीदारी की। सामाजिक संगठनों में झारखंड जन अधिकार मंच, आदिवासी संघर्ष मोर्चा तथा आइसा ऐपवा, ट्रेड यूनियनों में एक्टू, सीटू और एटक के साथ सैकड़ों मजदूर–किसान और युवा उपस्थित रहे।

प्रदर्शनकारियों ने “चार लेबर कोड वापस लो”, “वी बी ग्रामजी योजना वापस लो”, “अमेरिका परस्त नीति बंद करो”, “काला कानून वापस लो”, “मजदूर–किसान एकता जिंदाबाद” जैसे गगनभेदी नारे लगाए। इसके बाद एक रैली अल्बर्ट एक्का चौक से कचहरी चौक तक निकाली गयी।

वहीं झारखंड के बेरमो कोयलांचल क्षेत्र में केंद्रीय ट्रेड यूनियनों द्वारा आहूत देशव्यापी आम हड़ताल कोयला उद्योग, पब्लिक सेक्टर, परिवहन, ट्रांसपोर्ट निर्माण क्षेत्र में सफल रहा। हड़ताल से कोयला उत्पादन, ढुलाई और रैक लोडिंग और निर्माण क्षेत्र पर व्यापक प्रभाव पड़ा।

(विशद कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं।)

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