हरदीप पुरी की बेटी के एप्स्टीन से जुड़ी सामग्री सोशल मीडिया से हटायी जाये : दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी की बेटी हिमायनी पुरी को जेफरी एपस्टीन से जोड़ने वाले ऑनलाइन न्यूज रिपोर्ट्स, सोशल मीडिया पोस्ट्स, वीडियो और अन्य सामग्री को हटाने का निर्देश दिया है।

हिमायनी पुरी ने मानहानि का मुकदमा दायर किया था, जिसमें उन्होंने ‘जॉन डो’ (अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ) आदेश की मांग की ताकि उस सामग्री को हटाया जा सके। उन्होंने हर्जाने के तौर पर 10 करोड़ रुपए की मांग भी की। इस याचिका की सुनवाई करते हुए न्यायाधीश मिनी पुष्करणा ने सोशल मीडिया यूजर्स पर हरदीप सिंह पुरी की बेटी को जेफरी एपस्टीन से जोड़ने वाली सामग्री को प्रकाशित और प्रसारित करने पर रोक लगा दी।

उच्च न्यायालय ने सोशल मीडिया से सामग्री 24 घंटे के भीतर हटाने का निर्देश दिया। हिमायनी पुरी ने याचिका में कहा था कि इंटरनेट पर प्रसारित कई पोस्ट और रिपोर्ट्स में यह गलत दावा किया गया है कि उनका जेफरी एपस्टीन या उसकी आपराधिक गतिविधियों से किसी प्रकार का नेटवर्क या वित्तीय संबंध रहा है।

उनके अनुसार, विभिन्न प्रतिवादियों ने कई डिजिटल, सोशल मीडिया और मध्यस्थ प्लेटफॉर्म पर उनके बारे में झूठे, दुर्भावनापूर्ण और मानहानिकारक बयान प्रकाशित किए। उन्होंने इन कृत्यों में शामिल लोगों से बिना शर्त माफी मांगने की भी मांग की।

याचिका  के अनुसार, प्रतिवादियों द्वारा एक सुनियोजित और दुर्भावनापूर्ण ऑनलाइन अभियान चलाया गया, जिसका मकसद उन्हें जेफरी एपस्टीन और उसकी आपराधिक गतिविधियों से जोड़ना है। लगभग 22 फ़रवरी से शुरू होकर झूठी, भ्रामक और मानहानिकारक पोस्ट, लेख, वीडियो और डिजिटल सामग्री की एक श्रृंखला सोशल मीडिया और मध्यस्थ प्लेटफॉर्म पर प्रकाशित, प्रसारित और प्रचारित की गई; इनमें अन्य के अलावा ‘X’ (पहले ट्विटर), यूट्यूब, इंस्टाग्राम, फेसबुक, लिंक्डइन, डिजिटल समाचार पोर्टल, ब्लॉग और अन्य वेब-आधारित प्रकाशन शामिल हैं।

इसमें आगे कहा गया कि पुरी को “सुनियोजित और प्रेरित तरीके से” निशाना बनाया जा रहा है, जिसका स्पष्ट इरादा भारत और वैश्विक स्तर पर उनकी छवि खराब करना और उन्हें बदनाम करना है।

याचिका  में कहा गया कि प्रतिवादियों ने “मनगढ़ंत और आधारहीन आरोप गढ़े और फैलाए हैं,” जिनमें यह आरोप भी शामिल है कि उनके जेफरी एपस्टीन या उसकी आपराधिक गतिविधियों के साथ प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष व्यापारिक, वित्तीय, व्यक्तिगत या “नेटवर्क” संबंध थे; यह कि उन्हें या जिस फर्म में वह काम करती थीं, उसे जेफरी एपस्टीन या उसके सहयोगियों से “फंडिंग,” “वित्तीय लाभ,” या काला धन मिला था। यह कि कथित तौर पर एक मिस्टर रॉबर्ट मिलार्ड ने उनके साथ मिलकर लेहमैन ब्रदर्स के पतन की साजिश रची थी।

याचिका  में कहा गया, “ये आरोप पूरी तरह से झूठे, दुर्भावनापूर्ण और किसी भी तथ्यात्मक आधार से रहित हैं। प्रतिवादी नंबर 1 से 14 और कई अज्ञात जॉन डो/अशोक कुमार ने रणनीतिक रूप से इन निराधार आरोपों को सनसनीखेज और हेरफेर वाले तरीकों से फैलाया—जिसमें एडिट किए गए वीडियो, गुमराह करने वाले कैप्शन और छेड़छाड़ किए गए थंबनेल शामिल हैं—जिनका मकसद जनता के गुस्से को भड़काना, डिजिटल दुनिया में इन्हें तेज़ी से फैलाना और इसके परिणामस्वरूप वादी की प्रतिष्ठा को अधिकतम नुकसान पहुंचाना है।”

(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और कानूनी मामलों के जानकार हैं।)

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