सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार, 25 अगस्त, को 2013 के बलात्कार केस में ‘तहलका’ के पूर्व प्रधान संपादक तरुण तेजपाल को 3 सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया।
अदालत ने यह निर्देश उस याचिका को खारिज करने के साथ दिया जिसमें तेजपाल ने आत्मसमर्पण करने से छूट मांगी थी।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने तेजपाल को हाल में उस मामले में दोषी ठहराते हुए 10 साल की जेल की सज़ा सुनाई थी।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार न्यायाधीश आलोक अराधे ने तेजपाल की अपील पर आत्मसमर्पण सर्टिफिकेट जमा कराये जाने के बाद 22 सितंबर को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।
तेजपाल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अमन लेखी ने कहा कि किसी आपराधिक अपील को सूचीबद्ध करने से पहले आरोपी के लिए आत्मसमर्पण करना कानूनी रूप से जरूरी नहीं है।
सिब्बल ने 6 अगस्त के बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले का भी हवाला दिया, जिसमें तेजपाल को आत्मसमर्पण करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया गया था।
सिब्बल ने कहा कि ऐसी कोई कानूनी शर्त नहीं है कि अपील सूचीबद्ध होने से पहले तेजपाल को आत्मसमर्पण करना ही होगा।
गोवा सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तेजपाल की याचिका का विरोध करते हुए कहा कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपने फैसले के अमल पर रोक केवल इसलिए लगाई थी ताकि तेजपाल सुप्रीम कोर्ट से समय देने की मांग कर सकें, न कि इसलिए कि उन्हें आत्मसमर्पण की आवश्यकता से पूरी तरह बचने की अनुमति मिल जाए।
उन्होंने आरोपों की गंभीरता पर भी जोर दिया।
अदालत ने कहा कि अपराध की प्रकृति और सुनाई गई सज़ा की जांच किए बिना छूट के लिए तेजपाल की अर्ज़ी पर फ़ैसला नहीं किया जा सकता।
अदालत ने कहा पहले आत्मसमर्पण के मुद्दे पर फैसला करना जरूरी है और सिब्बल से पूछा कि आत्मसमर्पण करने के लिए कितना समय चाहिए? इस पर सिब्बल ने जवाब दिया, “दो सप्ताह।”
इसके बाद अदालत ने तेजपाल की याचिका खारिज करते हुए उन्हें तीन सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया।
तेजपाल को बॉम्बे हाई कोर्ट 10 साल की सज़ा सुना चुकी है।
आरोप है कि 2013 में तेजपाल ने तहलका के गोवा में आयोजित एक कॉनक्लेव के दौरान एक सहकर्मी से बलात्कार किया था। 2021 में गोवा की एक अदालत ने तेजपाल को बरी कर दिया था। बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा पीठ ने हाल में उस फैसले को उलटते हुए दोषी ठहराया था और दस साल की सज़ा सुनाई थी।
(जनचौक ब्यूरो)