आकृति चौधरी की रिहाई के हाईकोर्ट के आदेश से सरकारी झूठ का पर्दाफाश हुआ : भाकपा (माले)

लखनऊ। भाकपा (माले) ने कहा है कि नोएडा मजदूर आंदोलन के सिलसिले में गिरफ्तार सामाजिक कार्यकर्ता व छात्रा आकृति चौधरी पर से राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) हटाने, उन्हें रिहा करने और मुआवजा देने के इलाहाबाद हाइकोर्ट के आदेश से योगी सरकार के झूठ का पर्दाफाश हुआ है।

पार्टी के राज्य सचिव सुधाकर यादव ने आज एक बयान में कहा कि आकृति चौधरी के साथ के साथ लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार व समाजसेवी सत्यम वर्मा पर भी नोएडा मजदूर आंदोलन से जुड़े फर्जी आरोपों के तहत रासुका लगाया गया था। बुधवार के हाइकोर्ट के आदेश के आलोक में वर्मा पर से भी रासुका हटाकर उन्हें रिहा किया जाना चाहिए।

राज्य सचिव ने कहा कि इसके पहले सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को दिए आदेश के तहत जंतर मंतर आंदोलन से संबंधित छात्रों-युवाओं पर दिल्ली समेत विभिन्न राज्यों में दर्ज सभी एफआईआर निरस्त कर दिए। उन्होंने कहा कि इसी तरह की कार्रवाई नोएडा मजदूर आंदोलन के सिलसिले में भी होनी चाहिए और मजदूरों सहित सामाजिक कार्यकर्ताओं पर दर्ज सभी एफआईआर रद्द किए जाने चाहिए।

माले नेता ने कहा कि इलाहाबाद हाइकोर्ट ने दिल्ली विवि की पूर्व छात्रा आकृति जो नुक्कड़ नाटक कर्मी भी हैं, को गलत आरोपों में फंसाने और मनमाने तरीके से रासुका जैसे कठोर कानून लगाने से नाराज होकर उन्हें पांच लाख रुपया मुआवजा देने का आदेश भी दिया है, जो जिलाधिकारी के वेतन से दिया जाएगा। राज्य सचिव ने कहा कि यह योगी सरकार के मुंह पर जोरदार तमाचा है। यह सरकार को अपनी गिरेबान में झांकने की हिदायत जैसा है। 

माले नेता ने उम्मीद जताई कि सरकार उच्चतम व उच्च न्यायपालिका के उक्त आदेशों से सबक लेकर सभी राजनीतिक बंदियों को रिहा करेगी और मजदूरों-किसानों के अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले कार्यकर्ताओं की जासूसी करने और उनके निजी डेटा जुटाने से कदम पीछे खिंचेगी।

(प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित)

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