आप सिर्फ प्रो टेम चेयरमैन हैं, चुने हुए अध्यक्ष नहीं; जल्द कराएं चुनाव : मनन कुमार मिश्रा से सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा प्रो टेम चेयरमैन हैं और चुने हुए अध्यक्ष नहीं और बीसीआई के चुनाव कराने का निर्देश दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि मिश्रा की अगुवाई वाली बीसीआई अब अकेले कोई बड़ा नीतिगत फैसला नहीं ले सकती। ऐसे फैसलों में अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल की सक्रिय भागीदारी और सहमति जरूरी होगी।

सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि मनन कुमार मिश्रा लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए स्थायी अध्यक्ष नहीं हैं। वह फिलहाल कार्यवाहक यानी प्रो-टेम अध्यक्ष की तरह हैं। उनका अधिकार राज्य बार काउंसिलों के नए चुनाव और नई बीसाआई बनने तक सीमित रहेगा।

सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक मौजूदा पदाधिकारी फिलहाल बीसीआई का नियमित और प्रशासनिक काम संभालेंगे। बड़े नीतिगत फैसले लेने का अधिकार उनके पास नहीं होगा। यह आदेश उन याचिकाओं पर आया है, जिनमें मनन मिश्रा को बीसीआई अध्यक्ष पद से हटाने की मांग की गई थी।

याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि बिहार से भाजपा के राज्यसभा सांसद मनन मिश्रा 2012 से लगातार बीसीआई अध्यक्ष पद पर हैं। याचिकाकर्ताओं ने बीसीआई के बनाए ‘पर्ल फर्स्ट’ ट्रस्ट को लेकर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि मनन कुमार मिश्रा समेत कई लोग इसमें व्यक्तिगत क्षमता में लाइफ मैनेजिंग ट्रस्टी हैं। ट्रस्ट गोवा में अंतरराष्ट्रीय कानूनी शिक्षा एवं अनुसंधान विश्वविद्यालय चलाता है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नई बीसीआई के गठन पर फैसला सभी राज्य बार काउंसिलों के चुनाव के बाद होगा। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों से दो सप्ताह में दो महिला सदस्यों के मनोनयन की प्रक्रिया पूरी करने को कहा गया है। इसके बाद नई राज्य बार काउंसिलें अपने अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और बीसीआई प्रतिनिधि का चुनाव करेंगी। अगली सुनवाई 17 सितंबर को होगी।

मनन कुमार मिश्रा लंबे समय से बीसीआई के चेयरमैन हैं। याचिका में कहा गया है कि बीसीआई नियम 12(2) के तहत चेयरमैन का कार्यकाल दो साल का होता है। इसके बावजूद अप्रैल 2025 की अधिसूचना में उनका कार्यकाल 17 अप्रैल 2025 से 16 अप्रैल 2030 तक बताया गया। याचिकाकर्ता ने इसे चुनौती देते हुए नए सिरे से चुनाव कराने की मांग की है।

मिश्रा हाल में नालसार के छात्रों से जुड़े विवाद के बाद भी चर्चा में आए थे। छात्रों के एक वर्ग की दीक्षांत समारोह में सीजेआई को बुलाये जाने पर आपत्ति करने को लेकर बीसीआई ने 2026 बैच के नालसार छात्रों के एनरोलमेंट पर रोक लगाने का निर्देश दिया था। बाद में बीसीआई ने अपना फैसला वापस लिया और मिश्रा ने छात्रों से माफी भी मांगी। इसके बाद बीसीआई के भीतर से भी उनके इस्तीफे की मांग उठी और उनके लंबे कार्यकाल व कामकाज को लेकर सवाल सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गए।

(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और क़ानूनी मामलों के जानकार हैं।)

Leave a Reply