जहानाबाद-अरवल में मानवाधिकारों के हनन के 9 मामलों पर पीयूसीएल की जनसुनवाई

जहानाबाद। लोक स्वातंत्र्य संगठन (पीयूसीएल) की ओर से जहानाबाद-अरवल जिले में गरीबों, दलितों और कमजोर तबकों पर हो रहे हमले, हाजत में मौत, मॉब लिंचिंग, जमीन से बेदखली तथा प्रशासनिक दमन एवं मानवाधिकारों के हनन से जुड़े मामलों को लेकर शनिवार को जहानाबाद के शालीमार गेस्ट हाउस में जनसुनवाई का आयोजन किया गया। जनसुनवाई में कुल 9 मामलों की सुनवाई हुई, जिसमें 21 लोगों ने उपस्थित होकर अपने बयान और गवाही दर्ज कराई।

जनसुनवाई के लिए गठित जूरी ने पीड़ितों, परिजनों और प्रत्यक्षदर्शियों की गवाही सुनी तथा विभिन्न मामलों में प्रशासनिक भूमिका, पुलिस की कार्यशैली और न्याय से वंचित किए जाने की स्थितियों की जानकारी ली।

जूरी की ओर से एएन सिन्हा इंस्टीट्यूट के पूर्व निदेशक डीएम दिवाकर ने गवाहियों को सुनने के बाद अपने प्रेस वक्तव्य में कहा कि सरकार संविधान, लोकतंत्र तथा दलितों-गरीबों के पक्ष में काम नहीं कर रही है। यह स्थिति बेहद चिंताजनक है।

उन्होंने कहा कि जनसुनवाई में सामने आए मामले यह दिखाते हैं कि कमजोर तबकों को न्याय, सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन का अधिकार देने के बजाय प्रशासनिक तंत्र कई जगह दबंगों और अपराधियों के पक्ष में खड़ा दिखाई देता है।

चैती पिपर की घटना स्वच्छ भारत अभियान की विफलता का प्रमाण

चैती पिपर की घटना को लेकर जूरी ने कहा कि यह सरकार के स्वच्छ भारत अभियान की विफलता का भी प्रमाण है। गांव में गरीबों और दलितों को बुनियादी सुविधाओं से वंचित रखा गया है तथा अपराधियों को प्रशासनिक संरक्षण मिलना गंभीर चिंता का विषय है। जूरी ने गांव में स्थायी पुलिस कैंप स्थापित करने, बालू माफियाओं पर तत्काल कार्रवाई करने और आरोपित अपराधियों की गिरफ्तारी की मांग की।

जूरी ने कहा कि विष्णु डॉन का बेल रद्द किया जाना चाहिए तथा क्षेत्र में सक्रिय बालू माफियाओं पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही बच्चियों की शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए। इस मामले में रूनी देवी और रूबी देवी ने अपनी गवाही दर्ज कराई।

अनिल सिंह कुशवाहा की हाजत में मौत की जांच की मांग

अरवल जिले के हैबतपुर निवासी अनिल सिंह कुशवाहा की हाजत में हुई मौत के मामले में जूरी ने गंभीर चिंता व्यक्त की। जूरी ने कहा कि मामले की जांच पुलिस अधीक्षक के निर्देश में निष्पक्ष तरीके से कराई जानी चाहिए तथा दोषी पुलिसकर्मियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।

पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिए जाने की भी मांग की गई। इस मामले में अनिल कुशवाहा की बेटी लवली कुमारी ने गवाही दी। उनके अलावा अभिषेक और विजेंद्र कुशवाहा ने भी अपनी बात रखी और घटना से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्यों को सामने रखा।

परियावां में दलितों पर दबंगई* और जमीन कब्जे का मामला

परियावां के मामले में जूरी ने कहा कि दबंग तत्व दलितों को गांव में सम्मानपूर्वक बसने नहीं देते और लगातार उन्हें प्रताड़ित करते हैं। उनकी जमीनों पर कब्जा किया जाता है तथा सामाजिक जीवन में भी उन्हें अपमानित और नियंत्रित करने की कोशिश की जाती है।

जूरी ने विशेष रूप से कहा कि दलितों को शादी-विवाह जैसे सामाजिक अवसरों पर हर्ष और उत्सव मनाने तक की आजादी नहीं दी जाती। आजाद भारत में ऐसी स्थिति अकल्पनीय और लोकतंत्र के लिए शर्मनाक है। जूरी ने आरोपितों की गिरफ्तारी तथा पीड़ित परिवारों को न्यायसंगत सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की।

इस मामले में कारी देवी और धानो देवी ने गवाही दी।

रागिनी देवी की मौत के मामले में कानूनी कार्रवाई की मांग

अरवल जिला अस्पताल में रागिनी देवी की मौत के मामले में जूरी ने कहा कि मौत के लिए जिम्मेदार अस्पताल प्रशासन और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। जूरी ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट को सार्वजनिक करने तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।

इस मामले में रागिनी देवी के पति आकाश ने गवाही दी। मामले से जुड़े घटनाक्रम में भाकपा-माले के पूर्व विधायक महानंद सिंह पर भी मुकदमा दर्ज किया गया था। उन्होंने भी जनसुनवाई में उपस्थित होकर अपनी बात रखी और गवाही दर्ज कराई।

गरीबों की जमीन से बेदखली पर प्रशासनिक कार्रवाई की मांग

गरीबों की जमीन से बेदखली से जुड़े मामलों में जूरी ने कहा कि अंचलाधिकारी के आदेश के खिलाफ जिला पदाधिकारी के समक्ष अपील की जानी चाहिए। साथ ही पीड़ितों को अनुसूचित जाति/जनजाति आयोग सहित संबंधित संवैधानिक संस्थाओं के समक्ष भी अपनी शिकायत रखने का अधिकार है।

जूरी ने कहा कि भेलावर, रानीपुर और पीताम्बरपुर समेत कई गांवों में गरीबों की जमीन से बेदखली और दबंगों द्वारा कब्जे की शिकायतें सामने आई हैं। ऐसे मामलों में प्रशासन को गरीबों के पक्ष में खड़ा होना चाहिए और जमीन संबंधी अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए।

मो. जावेद की पीट-पीटकर हत्या पर चिंता

जहानाबाद में मो. जावेद की पीट-पीटकर हत्या के मामले पर जूरी ने कहा कि यह कानून को धत्ता बताने वाली घटना है। किसी व्यक्ति को कानून अपने हाथ में लेकर पीट-पीटकर मार डालना लोकतांत्रिक और संवैधानिक व्यवस्था के लिए बेहद गंभीर चुनौती है।

जूरी ने कहा कि ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए तथा प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भीड़ हिंसा और कानून हाथ में लेने की प्रवृत्ति को किसी भी स्थिति में संरक्षण न मिले।

जनसुनवाई के दौरान जूरी ने कहा कि सभी मामलों में पीड़ितों को न्याय, सुरक्षा और सम्मान दिलाने के लिए संबंधित प्रशासनिक एवं संवैधानिक संस्थाओं के समक्ष आवश्यक पहल की जाएगी।

जनसुनवाई के लिए गठित जूरी में डीएम दिवाकर के अलावा एडवोकेट गोपाल कृष्ण, एडवोकेट इमरान, पीयूसीएल, बिहार इकाई के महासचिव सरफराज, मीरा दत्त आदि शामिल थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता एवं संचालन सुमिता जायसवाल ने की।

(प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित)

Leave a Reply