Friday, April 19, 2024

चैतन्य नागर

विपक्ष में है तो पक्का हिन्दू-विरोधी होगा

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) विपक्षी एकता के लिए किये जा रहे प्रयासों को किस तरह देखता है, यह जानने में दिलचस्पी होना स्वाभाविक है। आम तौर पर कांग्रेस और अन्य विरोधी दल कहते सुने जाते हैं कि भाजपा...

गुरुबाजी का अखाड़ा और धंधा बन गई है योग की दुनिया

पिछले कुछ सालों से जून का महीना आते-आते योग की इतनी चर्चा होने लगती है कि जो नियमित योगाभ्यास नहीं करता उसके भीतर एक अपराध बोध पैदा होने लगता है! कोविड काल में तो महामारी ने चर्चाओं का बड़ा...

बाबागिरी को बेनकाब करता अकेला बंदा

‘ये दिलाये फतह, लॉ है इसका धंधा, ये है रब का बंदा’। जब ‘सिर्फ एक बंदा काफी है’ शुरू होती है और मनोज बाजपेयी को पहली बार दिखाया जाता है तो बैकग्राउंड में यही गीत सुनाई देता है। बंदा...

सिद्धार्थ ने पलायन नहीं किया था: पलायन दुख से दूर भागने के लिए होता है, सुख से दूर जाने के लिए नहीं

राज ज्योतिषी ने जिस राजा के इकलौते बेटे के संन्यासी बन जाने की भविष्यवाणी कर दी हो उसकी चिंताएं समझी जा सकती हैं। सत्ता के हाथ से खिसक जाने का भय, बेटे के निर्मोही हो जाने की आशंका, कितनी...

दमघोंटू गलियों की बेआवाज़ चीख है ‘गली गुलियाँ’ 

नॉर्वे के पेंटर एडवर्ड मंच की एक पेंटिंग सभी ने देखी होगी। दुनिया में सबसे महंगी बिकने वाली पेंटिंग में इसे शुमार किया जाता है। इसमें एक स्त्री किसी पुल पर खड़ी है और चीख रही है। उसका खुला...

शरद है साल का दूसरा मुस्कुराता वसंत

शरद के कदमों की आहट सुनाई दे रही है? थोड़ा गौर कीजिये, हवा में आर्द्रता कम हुई है; तड़के उठें तो हवा में बदलते मौसम का एक कोमल, सौम्य स्पर्श महसूस होता है। हालाँकि इस साल बारिश पूरी तरह...

विश्व खाद्य दिवस 2022: भूख के मेले में सुपरफ़ूड की चमकती दुकानें

भौतिक देह को अंतिम सत्य मानने वाला चार्वाक दर्शन कहता है: परान्नं प्राप्य दुर्बुद्धे! मा प्राणेषु दयां कुरु, परान्नं दुर्लभं लोके प्राण: जन्मनि जन्मनि।। इसका अर्थ है कि शरीर तो बार-बार जन्म लेगा, उस पर दया करना मूर्खता है।...

‘आदमखोर’ क्यों बन जाता है बाघ?  

एक सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार बिहार के पश्चिमी चम्पारण जिले में आठ अक्टूबर को मारे गए बाघ के बारे में किए गए फैसले के मुताबिक उसे मार गिराना बहुत जरूरी हो गया था। सात अक्टूबर को उसे देखते ही मार...

 गांधी जयंती विशेष: बापू क्या इस भारत को पहचानेंगे भी?  

राष्ट्रपिता गाँधी को रवींद्रनाथ टैगोर ने महात्मा कहा और गांधी जी ने उन्हें गुरुदेव की उपाधि दी। टैगोर ने गाँधी जी को महात्मा सिर्फ इसलिए नहीं कहा क्योंकि वे सिर्फ देशव्यापी राजनीतिक आन्दोलन से जुड़े एक महान नेता थे, जिन्होंने...

उदास ज़िन्दगी में मसखरी की जगह 

हंसी को लेकर आप गंभीर नहीं तो यह ज़रूर जान लें कि आम तौर पर 23 साल की उम्र के आस-पास लोगों का हास्य बोध घटने लगता है। मांसपेशियों के कमज़ोर होने और आंखों की रोशनी के घटने से...

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