Tuesday, March 5, 2024

डॉ. पंकज श्रीवास्तव

मीना भाभी: तुमसा मिला न कोय!

बड़े शौक़ से सुन रहा था ज़माना हमीं सो गये दास्ताँ कहते-कहते... पिछले दिनों समकालीन जनमत में धारावाहिक रूप से प्रकाशित हुए मीना राय के आत्मकथात्मक संस्मरण ‘समर न जीते कोय’ ने हर पढ़ने वाले के दिल में खास जगह बनायी...

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