गोपाल अग्रवाल

समाजवादियों के पास है सुचारू व्यवस्था

अर्थव्यवस्था के सभी अनुमान ढलान की ओर हैं। वर्तमान सत्ता-पार्टी अफवाहों की विशेषज्ञ है। व्यवस्था संभालना इनको नहीं आता। पशुपालन, खेती, उद्योग, चिकित्सा…

4 weeks ago

नफरत और घृणा के ध्वजाधारियों के अंत की शुरुआत

नागरिक के दैनिक जीवन की बेहतरी के लिए योजनाओं की रूपरेखा व पढ़ाई-दवाई पर कोई राजनीतिक दल ठोस समयबद्ध कार्य योजना…

2 months ago

चुनावों में रणनीति के मोर्चे पर विपक्ष खा रहा है मात

असम चुनाव परिणाम के बाद धीरे-धीरे परिकल्पनाओं की परतें खुल रही हैं। कांग्रेस का आरोप है कि असम जातीय परिषद…

3 months ago

अभी बात पश्चिमी बंगाल की, उत्तरप्रदेश की बाद में करेंगे

अभी बात पश्चिमी बंगाल की, उत्तर प्रदेश की बाद में करेंगे। वामपंथियों के किले के ध्वस्त होने पर टीले जितना…

3 months ago

मौतों के पीछे लीची नहीं, असल वजह है कुपोषण

बिहार लीची की खेती के लिए मशहूर है। मुजफ्फरपुर की लीची देश विदेश में लोकप्रिय है। गर्मियों में वहां लीची…

4 months ago

रोजगार के मामले में प्रयागराज के बाद मेरठ फिसड्डी

बात चौंकाने वाली है, किन्तु भारत सरकार के राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय (National Sample Survey Office) की रिपोर्ट बताती है कि बेरोजगारी…

5 months ago

टोपी का रंग और उसकी राजनीति

'विधान मंडल पहनावे अथवा भाषाओं को परिभाषित, निर्देशित अथवा  उपहासित करने का सभाकक्ष नहीं है।’ सत्तर के दशक की बात…

5 months ago

राजनीति की धमनियों में है युवा खून की दरकार

यदि कोई बीमार है, पचास तरह की बीमारियां हैं, जुकाम से लेकर सारे शरीर में दर्द, दिल भी खराब, जिगर…

6 months ago

छोटे उद्योगों को अर्थव्यवस्था के आकाश में ऊंचा उड़ने का हौसला देने की जरूरत

गंगा किनारे एक करोड़ दीयों में इतना प्रकाश नहीं कि भटके पथिक को रास्ता दिखा दें परंतु गांव की झोपड़ी…

8 months ago

बिजली का काम लोगों की जिंदगी में अंधेरा नहीं, प्रकाश करना है!

किसी जुगनू की तरह मुझे उड़ जाने दो  घने अंधेरे में जरा रोशनी तो फैलाने दो  बीसवीं सदी में यह काम…

8 months ago
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