मनोज सिंह

लोकतंत्र की आत्मा होते हैं शांतिपूर्ण और अहिंसात्मक आंदोलन

बदलते दौर के हिसाब से उभरते बुनियादी अधिकारों और स्वतंत्रता, समानता, न्याय जैसी संकल्पनाओं को अपने सीने में सहेजे समेटे…

5 months ago

किसानों-मेहनतकशों से अकड़ दिखाने वाले शासक हुए हैं जमींदोज

चंपारण, खेड़ा, बारदोली और बिजौलिया जैसे अनगिनत ऐतिहासिक आंदोलनों के वंशबीजों के साथ सरकार को सहानुभूति, सदाशयता, उदारता और गहरी…

8 months ago