Monday, July 4, 2022

मनोज सिंह

लोकतंत्र की आत्मा होते हैं शांतिपूर्ण और अहिंसात्मक आंदोलन

बदलते दौर के हिसाब से उभरते बुनियादी अधिकारों और स्वतंत्रता, समानता, न्याय जैसी संकल्पनाओं को अपने सीने में सहेजे समेटे लोकतंत्र और लोकतंत्रिक शासन व्यवस्था की बयार आज पूरे विश्व, सभी महाद्वीपों और सभी देशों में निरंतर निर्विकल्प रूप...

किसानों-मेहनतकशों से अकड़ दिखाने वाले शासक हुए हैं जमींदोज

चंपारण, खेड़ा, बारदोली और बिजौलिया जैसे अनगिनत ऐतिहासिक आंदोलनों के वंशबीजों के साथ सरकार को सहानुभूति, सदाशयता, उदारता और गहरी संवेदनशीलता का परिचय देना चाहिए। चिड़िया-चुरुंग, कीड़े-मकोड़े, कीट-पतिंगे, पशु-पक्षी समेत समस्त जीवित प्राणियों की क्षुधा तृप्ति कराने वाला किसान...

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