प्रफुल्ल कोलख्यान

विराटता की उद्दंडता के विरुद्ध मनुष्य की लघुता की सहकारी ‎और समवायी ‎विनम्रता की स्वतंत्रता का उपकरण है लोकतंत्र

विचारधारा का सवाल सभ्यता पर विचार करने वाले के मन में कभी-न-कभी जरूर उठता है। यह मानने… Read More

‘मिथ और रियलटी’ की लड़ाई में ‘फेक और फेवरेबल’ का मुकाबला सत्ता के भ्रमास्त्र से है

अब चुनाव की घोषणा हो चुकी है। आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। 2024 का आम… Read More

लोकतांत्रिक राजनीति के ‘दुष्टीकरण’ और ‎‘लुच्चीकरण’ की ‎‎‘राजतांत्रिक राजनीति’ की फांस

भारत इन दिनों विश्वास और अभ्यास के सवाल से जूझ रहा है। चतुर्दिक टकराव से घिर रहा… Read More

सहज बुद्धिमत्ता के सहारे विषाक्त हितैषिता ‎की फांस से ‎‎‘मतबल’ ‎को बाहर रखना जरूरी है

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर भारतीय स्टेट बैंक ने चुनावी चंदा (Electoral Bonds) ‎ से संबंधित कागजात… Read More

तर्कसंगत होने की स्वतंत्रता और विचार लोकतंत्र के कायम और जारी रहने को सुनिश्चित करता है

जीवन में आस्था और विश्वास का अपना महत्व है। आस्था और विश्वास मन को शांत और समृद्ध… Read More

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस: महिला दिवस रिवाज नहीं, इतिहास की गहरी घाटियों से आती हुई आवाज है

आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस ‎है। आज महिला दिवस की प्रेरणा और परिस्थिति को याद करने का दिन… Read More

लोकतंत्र में मतदाताओं को भरोसा की तलाश है, तो चुनावी भरोसा हो सकता है फिजिटली फिट!

भरोसा बचाना और भरोसा के काबिल बने रहना जीवन सबसे बड़ी उपलब्धि होती है। बहुत कुछ खोकर… Read More