प्रत्यक्ष मिश्रा

ऊँची डींगों के बीच ट्रेड डील के साये में किसानों की सहनशक्ति की परीक्षा

अप्रैल 2025 में जब अमेरिका के वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक भारत आए तो धमकी देकर गए कि… Read More

बजट से बेदखल किसान : दिल में तो कभी था ही नहीं, अब ज़ुबान से भी हुआ गायब

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी कहा करते थे कि असली भारत गांवों में बसता है।  उसी भारत के लोग—किसान—हर… Read More

गणराज्य के स्वधर्म की तलाश : समकालीन भारत को परखने की एक ज़रूरी कसौटी

इक्कीसवीं शताब्दी में, जब बीसवीं सदी के विचार अपनी ऊर्जा खो चुके हैं, ठहरकर सोचने का साहस… Read More

दो समानांतर व्यवस्थाएं, एक घातक नतीजा: सामूहिक मताधिकार के बहिष्कार की ओर बढ़ता भारत

जैसा कि 1789 के फ्रांसीसी संविधान में कहा गया कि “कानून आम लोगों की आवाज़ है।” भारत… Read More

दर्द-ए-बिहार : पलायन, बेरोजगारी और ठहरे निवेश की त्रासदी 

बेरोजगारी और पलायन का बिहार के साथ चोली-दामन जैसा रिश्ता जुड़ा है। पिछले दो विधानसभा चुनावों में… Read More

बिहार एसआईआर : आरोपों के सैलाब में गायब होती चुनाव आयोग की पारदर्शिता 

यूं तो पिछले कुछ समय से चुनाव आयोग ने चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने से दूरी बना… Read More