Saturday, July 2, 2022

रवींद्र गोयल

किसानों के साथ एक और धोखा है खरीफ फसलों के न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य की घोषणा

सरकार ने 14 खरीफ फसलों (तिलहन, दलहन, गल्ला और कपास) के लिए इस साल के समर्थन मूल्य की घोषणा कर दी है। सरकारी दावे की कहें तो 2022-23 के लिए खरीफ फसलों की एमएसपी में बढ़ोत्तरी, अखिल भारतीय औसत...

पेट्रोल और डीजल की ऊंची कीमतों पर मोदी सरकार का एक और पैंतरा

महंगाई का भूत लगता है अब मोदी सरकार को डराने लगा है। श्रीलंका में जारी आर्थिक बर्बादी जनित उथल-पुथल मोदी सरकार को भयावह सपने दे रही है। नेपाल जैसा विदेशी मुद्रा का संकट आने वाले समय में यहाँ भी...

राजस्थान में पुरानी पेंशन बहाली से नवउदारवाद के पैरोकारों में क्यों है, बेचैनी

अगले साल राज्य में होने वाले चुनावों के मद्देनज़र ही सही, राजस्थान सरकार ने इस बजट में जनवरी 2004 से नियुक्त सरकारी कर्मचारियों के लिए नयी पेंशन योजना की जगह पुरानी पेंशन देने की घोषणा की है। जब से...

सुरक्षा परिषद कक्ष के बाहर लगा पिकासो का चित्र ‘गुवेर्निका’ दिलाता है युद्ध विभीषिका की याद

दुनिया के दस मशहूर चित्रों में से एक, पाब्लो पिकासो का चित्र ‘गुवेर्निका’ है। 1937 में युद्ध की विभीषिका का चित्रण करता यह चित्र अपनी युद्ध विरोधी प्रतीकात्मकता के लिए अपने बनने के समय से ही चर्चित है। मूल...

याराना पूंजीवाद और बैंकिंग घोटाला : किस्सा एबीजी शिपयार्ड लिमिटेड के ऋषि अग्रवाल का

प्रधानमंत्री मोदी जी के वाइब्रेंट गुजरात की एक कंपनी देश के आज तक के सबसे बड़े बैंकिंग घोटाले की जिम्मेवार है। विजय माल्या, नीरव मोदी, मेहुल चोकसी जैसे दिग्गजों को पीछे छोड़ते हुए इस कंपनी पर 23000 करोड़ रुपये के घोटाले...

देश की आर्थिक तबाही के बीच ये कौन हैं जो महंगी कारें, भारी मात्रा में सोना और रिकार्ड दाम पर पेंटिंग की कर रहे...

यह अटपटा लग सकता है कि आज के हत्यारे दौर में, जब देश में करोड़ों लोगों को रोटी के लाले पड़े हैं, रोज़गार बाज़ार में उपलब्ध नहीं हैं, नौजवान आत्महत्या कर रहे हैं, युवा दंपति बच्चों को फांसी लगा...

नवउदारवाद और टपक बूंद सिद्धांत के दिवालियेपन को उजागर करती है वर्ल्ड इनइक्वलिटी रिपोर्ट

7 दिसम्बर, 21 को ज़ारी वर्ल्ड इनइक्वलिटी रिपोर्ट (World Inequality Report*) 2022 रिपोर्ट ने पिछली सदी के आखरी दशक से ज़ारी नवउदारवादी दौर के सबसे बड़े झूठ का पर्दाफाश करते हुए तथ्यों के आधार पर यह स्थापित किया है...

भारतीय कृषि के खिलाफ साम्राज्यवादी साजिश को शिकस्त

भारतीय किसानों ने मोदी सरकार को तीनों कृषि कानून वापस लेने के लिए  बाध्य कर दिया। ये किसानों की जीत न केवल दुनिया के पैमाने पर अनोखी जीत है बल्कि तय है कि यह जीत दुनिया भर में पिछले...

‘संविधान दिवस’ औपचारिकता निभाने का नहीं, कमियों एवं खामियों पर चिंतन और मनन का मौका

26 नवंबर 1949 को संविधान सभा ने संविधान के उस प्रारूप को स्वीकार किया, जिसे डॉ. बीआर आंबेडकर की अध्यक्षता में ड्राफ्टिंग कमेटी ने तैयार किया था। इसी रूप में संविधान 26 जनवरी, 1950 को लागू हुआ और भारत...

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