Wednesday, December 8, 2021

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विकास नारायण राय

योगेन्द्र यादव को खेद प्रकट करना चाहिए

मुझे स्वयं को योगेन्द्र यादव का प्रशंसक स्वीकारने में तनिक भी हिचक नहीं है। भारत की संसदीय राजनीति में वे एक आदर्श व्यवहार स्थापित करते लगते हैं और सामयिक मुद्दे पर उनकी नपी-तुली टिप्पणी कई बार अमेरिका के राष्ट्रपति...

केवल एक ही पक्ष ने ही किया था लखीमपुर में सोचा समझा नरसंहार

लखीमपुर खीरी हिंसा दो पक्षों ने की थी। लेकिन, उनमें से एक ही, मोदी सरकार के गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र द्वारा संचालित पक्ष ही, कानूनी रूप से हत्या की सजा का हकदार है। यहां किसान नेता राकेश टिकैत...

लोकतंत्र में ‘शासक’ नहीं कानून का चलता है राज

गत दिनों गोरखपुर में मनीष गुप्ता की पुलिस द्वारा नृशंस हत्या की तरह आज लखीमपुर खीरी में भी किसानों के बर्बर हत्याकांड को संभव करने वाली यूपी पुलिस का ‘ठोक दे’ब्रांड मुंह छिपाता फिर रहा है। यह रोज नहीं...

निर्णय और नेतृत्व से अनुपस्थित स्त्री ही है असुरक्षित!

स्त्री सुरक्षा के मुद्दे को एक सामान्य समीकरण के रूप में देखा जा सकता है- जहाँ स्त्री नेतृत्व और निर्णय की भूमिका में नहीं होगी, वहाँ असुरक्षित रहेगी | सामाजिक ही नहीं, राजनीतिक ही नहीं, धार्मिक स्पेस में भी...

यूपी चुनाव पर जिन्ना का साया

उत्तर प्रदेश चुनाव प्रचार में ओवैसी के मुस्लिम मतदाताओं में धुआंधार प्रचार के सन्दर्भ में भाजपा/आरएसएस की रणनीतिक समझ को सावरकर-जिन्ना के हिन्दू राष्ट्र-मुस्लिम राष्ट्र नैरेटिव से तुलना करने वालों की कमी नहीं है। ओवैसी का सीधा तर्क है...

इस्लामोफोबिया से पुलिस को छुटकारा दिलाइये मी लार्ड!

सीजेआई यानी देश के सर्वोच्च पदस्थ न्यायाधीश की घोर न्यायिक हताशा को समझना होगा। इस्लामोफोबिया यानी ‘राष्ट्र/हिन्दू को इस्लाम/मुसलमान से खतरा’ से डराने का समीकरण, जो भाजपा की चुनावी रणनीति का हिस्सा होता है, रोजमर्रा की पुलिसिंग को भी...

राखी बांधती बहनें और उनकी ’सुरक्षा’ में तालिबानी भाई

रक्षाबंधन के दिन, जब भारत में भाई अपनी बहनों की रक्षा के प्रति बेहद सजग होते हैं, पुलिस को भी संतुष्ट होना चाहिए कि स्त्रियां अपेक्षाकृत अधिक सुरक्षित होंगी जबकि ऐसा नहीं होता। बल्कि, उलटे, भारी आवागमन को देखते...

वंचितों की हकमारी न साबित हो नया आरक्षण संशोधन विधेयक

आरक्षण के मुद्दे पर चुनावी राजनीति से प्रेरित मोदी सरकार ने दो सोचे समझे कुटिल कदम उठाये हैं। एक, जाति-आधारित जनगणना न कर, घोर जातिवादी सवर्ण मानसिकता को भुनाने के लिए। और दूसरा, 127वें संविधान संशोधन के माध्यम से,...

खोरी बाशिंदों के सपनों को कब्र में बदलने के कई हैं गुनहगार

‘वन भूमि से समझौता नहीं किया जा सकता।’ सुप्रीम कोर्ट के इस घोषित निश्चय के चलते, दो महीने से अरावली वन क्षेत्र में शक्ल ले रही विस्थापन त्रासदी का लब्बोलुवाब रहा कि खोरी नामक श्रमिक बस्ती का अंत हो...

मी लॉर्ड! खोरी में ‘कानून का शासन’ है या ‘कानून द्वारा शासन’?

15 जुलाई की प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी की अपने निर्वाचन क्षेत्र बनारस की भव्य यात्रा में शहर के लिए 1500 करोड़ से अधिक की विकास योजनाओं की सौगात शामिल थी। देश के एलीट और सुविधा प्राप्त वर्गों के लिए इससे...

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सरकार की तरफ से मिले मसौदा प्रस्ताव के कुछ बिंदुओं पर किसान मोर्चा मांगेगा स्पष्टीकरण

नई दिल्ली। संयुक्त किसान मोर्चा को सरकार की तरफ से एक लिखित मसौदा प्रस्ताव मिला है जिस पर वह...