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Categories: बीच बहस

धूं-धूं कर जल रहा है धरती का फेफड़ा

पिछले साल ब्राजील के आम चुनाव में जेर बोल्सोनारो की जीत के बाद से ही अमेज़न के वर्षावन जिन्हें लाखों सालों से दुनिया का फेफड़ा कहा जाता है आज गहरे मुसीबत में है। और विश्व का संकट भी गहरा गया है। इसके बारे में एशिया के इस देश में जानकारी बहुत कम मिल पा रही है। एक रिपोर्ट के मुताबिक आग के फैलने की रफ्तार इतनी ज्यादा है कि आग हर मिनट तीन फुटबॉल मैदान जितने इलाके को घेर रही है।

माना जाता है कि ये जंगल पूरी दुनिया का 20% आक्सीजन तैयार करते हैं। इस जंगल की अहमियत बताते हुए बीबीसी के वरिष्ठ पत्रकार शोभन सक्सेना कहते हैं, “अमेज़न दुनिया का सबसे बड़ा रेन फॉरेस्ट है। उसके पेड़ ज़मीन से पानी खींचते हैं। वो पानी भाप बनकर ऊपर जाता है। बाद में बरस जाता है।”
“वहां पर हमेशा गीला सा मौसम रहता है और बारिश बहुत ज़्यादा होती है, दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी नदी अमेज़न वहां से निकलती है। इसका कुल क्षेत्र 55 लाख वर्ग किलोमीटर है। भारत के कुल क्षेत्रफल से क़रीब दोगुने में ये जंगल फैला हुआ है। इसे एक कार्बन सिंक कहा जाता है।”
“यानी दुनिया में जितनी कार्बन डाई ऑक्साइड निकल रही है, उसका क़रीब 20 प्रतिशत ये जंगल सोख लेता है। अगर जंगल यहां कट जाएंगे, यहां से आग लगनी शुरू हो जाएगी तो इसका जो रोल है कार्बन डाई ऑक्साइड को सोखने का, वो ख़त्म हो जाएगा।” अमेज़न रेनफॉरेस्ट दक्षिण अमरीका के कई देशों पेरू, कोलंबिया, बोलीविया, इक्वाडोर और गुयाना तक फैला है। लेकिन इसका सबसे ज़्यादा क़रीब साठ प्रतिशत हिस्सा ब्राज़ील में है।

“ये (जंगल) लिवर है। ये पूरे सिस्टम की सफ़ाई करता है। जब पेड़ जल जाएंगे तो प्रदूषण और बढ़ेगा। क्लाइमेट सिस्टम को रेगुलेट करने के लिए इससे बड़ा कोई एक इको सिस्टम नहीं है। वैसे ही क्लाइमेट की तबाही हो रही है। वैसे ही तापमान बढ़ रहा है। सूखा और बाढ़ बढ़ रहा है।”
वंदना शिवा याद दिलाती हैं कि साल 1992 में अमेज़न को लेकर ही रियो में अर्थ समिट का आयोजन हुआ था।


वंदना शिवा कहती हैं, “मैं अमेज़न के ऊपर से उड़ान भर रही थी। वहां की पर्यावरण मंत्री दिखा रहीं थीं कि कैसे वहां अवैध पोर्ट बनाए गए थे। जंगल काटे गए थे और लोगों को मारा गया था। एक डोरोथी सैंगर नाम की नन थीं। उन पर गोली चलाई गई थी।”
“क्योंकि वो आदिवासियों के साथ खड़ी होती थीं। तब क़ानून सख़्त हुआ और वन की कटाई पर रोक लगी। साथ ही साथ इंडीजेनस लोगों के अधिकार तय हुए। अलग से मंत्रालय बना।”
आज दुनिया भर में इन जंगलों में लगी दो महीने से आग पर ब्राजील के दूतावासों पर उस देश के जागरूक नागरिक, समाजसेवी और NGO प्रदर्शन कर रहे हैं। ब्रिटेन की राजधानी लंदन के अलावा स्पेन की राजधानी मैड्रिड, फ्रांस की राजधानी पेरिस, साइप्रस, कोलंबिया और उरुग्वे में भी लोग सड़कों पर उतरे और अमेज़न के जंगल में लगी आग को लेकर ब्राज़ील के राष्ट्रपति जाएर बोलसोनारो और उनकी सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया। G7 की बैठक में भी यह मुद्दा काफी गरमाया रहा और 20 मिलियन डॉलर की सहायता राशि घोषित की गई, जिसे ब्राजील के राष्ट्रपति ने लेने से साफ़ मना कर दिया।

उनका साफ़ कहना है कि फ़्रांस के राष्ट्रपति मैक्रॉन ने उनका अपमान किया है उन्हें झूठा और मक्कार कहा है, इसके लिए वो माफ़ी मांगें, तभी वह कोई मदद लेने को तैयार होंगे।

ब्राजील के राष्ट्रपति अपनी पत्नी के साथ।



इसके पीछे की कहानी बेहद दिलचस्प लेकिन उतनी ही वीभत्स है। अमेज़न के जंगलों में लगी आग के संदर्भ में इम्मानुएल मैक्रॉन ने धुर दक्षिणपंथी ब्राज़ील के राष्ट्रपति पर झूठ बोलने और पर्यावरण के अपने कमिटमेंट से पीछे हटने का आरोप लगाया था।
इसके जवाब में बोल्सोनारो ने एक फेसबुक मेमे पर टिप्पणी कर पूरे घटनाक्रम को घृणित मोड़ दे दिया जिसमें फ़्रांस के राष्ट्रपति मैक्रॉन की उम्र से काफी बड़ी 66 साल की उनकी पत्नी ब्रिगिट्टी और ब्राजील के राष्ट्रपति की पत्नी जो उनकी तीसरी पत्नी 37 वर्षीय मिशेल की तस्वीर से तुलना है, जिसमें इस बात का मजाक उड़ाते हुए मेमे है “ अब तुम्हें समझ आया कि मैक्रॉन क्यों बोल्सोनारो को परेशान कर रहा है?”
जिस पर बोल्सोनारो द्वारा यह कहकर खिल्ली उड़ाई गई है “उसे और अपमानित मत करो, हहहाहा।”

बोल्सोनारो ने इस बात को बताने से इंकार कर दिया कि यह कमेंट उन्होंने खुद लिखा या उनके स्टाफ ने उनके लिए फेसबुक पर लिखा। जिस पर मैक्रॉन ने G-7 की बैठक में अपनी पत्नी के बारे में अभद्र टिप्पणी को “बेहद अपमानजनक” बताया और ब्राजील की महिलाओं से अपील की कि अपने राष्ट्रपति की टिप्पणी को ब्राज़ील की महिलाओं का अपमान समझें। ऐसे राष्ट्रपति से जल्द से जल्द ब्राजील को मुक्ति मिले।
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का यह ट्वीट बेहद रोचक है।

“ब्राजील के साथ बातचीत के क्रम में मुझे राष्ट्रपति @jairbolsonaro के बारे में पता चला। अमेजन आग मामले में वह बहुत मेहनत कर रहे हैं और सभी तरीके से ब्राजील के लोगों के लिए बेहद उम्दा काम कर रहे हैं- सरल नहीं है। वह और उनके देश को यूएसए का पूरा समर्थन है”।
आपको बता दें कि ब्राज़ील में हुए इस सत्ता परिवर्तन पर निगाहें बड़े बड़े साम्राज्यवादी पूंजीपतियों और अमेरिका और कनाडा की भी है। पिछले एक साल से अमेज़न के जंगलों में अंधाधुंध कटाई जारी है। इन वर्षा वनों में सदियों से रह रहे ब्राजीली आदिवासी ही इसके रक्षक रहे हैं, लेकिन आज वे बेबस हैं।

फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रान की पत्नी से बात करते ट्रंप।


विशालकाय कटाई की मशीनों से जंगल साफ़ किये जा रहे हैं। जो विरोध आदिवासी समूह करते हैं, उन्हें देख लेने और सफाया करने की धमकी आये दिन मिलती रहती है। एक तरफ जंगल काटने वाली लॉबी दिन रात लगी हुई है, वहीँ दूसरी ओर इसे पशुओं के लिए चारागाह, खेती और सबसे अधिक इन जंगलों के गर्भ में छिपे अकूत खनिज सम्पदा पर भूखी दृष्टि गड़ाये अमेरिकन और कनाडियन लॉबी की भूमिका छिपी नहीं है।
डोनाल्ड दृम्प का हर विवादित देश के राष्ट्राध्यक्ष के बारे में बहुत मेहनती और आश्वस्त करने वाला बयान न सिर्फ उस राष्ट्राध्यक्ष की पीठ पर हाथ फेरने वाला दिखता है वह पूरी तीसरी दुनिया के देशों के लिए शोषण और कभी न खत्म होने वाले तृतीय विश्व युद्ध की पृष्ठभूमि भी तैयार कर रहा है। ग्लोबल वार्मिंग और विश्व पर्यावरण को बचाने की यह नाटकीय पहलकदमी बिल्कुल बेमानी साबित हो रही हैं, इसकी बानगी एमनेस्टी इंटरनेशनल ने साफ़ साफ़ तब देखी जब, अमेज़न के जंगलों की पैट्रोलिंग करने वाले हेलीकाप्टरों को जिसे पेट्रोल की जरुरत पड़ती है, के लिए पेट्रोल से भरे टैंकर को अमेज़न के जंगल काटने वाले अपराधी उड़ा देते हैं, ताकि हेलीकाप्टर को जरुरी उड़ान भरने के लिए पेट्रोल न मिल सके।

(ये रिपोर्ट स्वतंत्र टिप्पणीकार रविंद्र सिंह पटवाल ने तैयार की है।)

This post was last modified on August 31, 2019 1:59 pm

Janchowk

Janchowk Official Journalists in Delhi

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