मोदी के आलोचकों पर एलन मस्क के ट्विटर की सेंसरशिप का फैलता जाल

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मानवाधिकारों के हनन पर बीबीसी वृत्तचित्र को सेंसर करने में भारत सरकार का साथ देने के दो महीने बाद ट्विटर फिर अभिव्यक्ति के खिलाफ असाधारण रूप से बड़ी कार्रवाई करने में भारत का सहयोग कर रहा है।

पिछले सप्ताह, सिख कौमपरस्त नेता अमृतपाल सिंह की धरपकड़ के लिए भारत सरकार ने तीन करोड़ की आबादी वाले उत्तरी राज्य पंजाब में इंटरनेट बंदी कर दी। बंदी ने पंजाब में इंटरनेट और एसएमएस संप्रेषण को पंगु कर दिया (कुछ भारतीय उपयोगकर्ताओं ने द इंटरसेप्ट को बताया कि बंदी मोबाईल डिवाइस को लेकर लक्षित थी।)

पंजाब पुलिस ने जहां सिंह के सैकड़ों संदिग्ध अनुयाइयों को हिरासत में लिया, वहीं भारत सरकार के अनुरोध पर देश-विदेश के 100 से ज्यादा राजनीतिज्ञों, कार्यकर्ताओं और पत्रकारों के ट्विटर अकाउंट भारत में ब्लॉक किये गये। सोमवार को, बीबीसी न्यूज़ पंजाबी का अकाउंट भी ब्लॉक किया गया। यह कुछ महीनों में दूसरी बार है कि भारत सरकार ने ट्विटर का इस्तेमाल कर देश में बीबीसी सेवाओं का गला घोंटने की कोशिश की है। कनाडा के प्रमुख प्रगतिशील सिख नेता और पीएम नरेंद्र मोदी के आलोचक जगमीत सिंह (अमृतपाल से कोई संबंध नहीं) का ट्विटर अकाउंट भी भारत में नहीं दिख रहा था।

मालिक और सीईओ एलन मस्क के नेतृत्व में ट्विटर ने सेंसरशिप घटाने और प्लेटफॉर्म पर भिन्न स्वरों के व्यापक दायरे को जगह देने का वायदा किया है। लेकिन जनवरी में बीबीसी वृत्तचित्र की मस्क द्वारा सेंसरशिप और वृत्तचित्र साझा करने वाले हाइ-प्रोफाईल अकाउंट के खिलाफ हस्तक्षेप पर इंटरसेप्ट की रिपोर्ट के बाद एलन मस्क ने कहा था कि इस मुद्दे पर ध्यान देने के लिए उनके पास समय नहीं है। मस्क ने 25 जनवरी को लिखा, “यह मैंने पहली बार सुना है। मेरे लिए यह संभव भी नहीं है कि दुनिया भर में ट्विटर के हर मुद्दे को रातोंरात हल करूं, वह भी साथ-साथ टेस्ला और स्पेसएक्स के संचालन समेत अन्य काम करते हुए।”

दो महीने बाद, उन्हें अब भी समय नहीं मिला है। एलन मस्क ने पहले ट्विटर सीईओ पद छोड़ने की भी बात की है, लेकिन उनकी इस घोषणा के बाद उस दिशा में कोई प्रगति होती नहीं दिखी।

जहां नरेंद्र मोदी के दमन का फोकस पंजाब पर है, ट्विटर से गठजोड़ देशव्यापी है, जिससे सरकार के आक्रामक कदम पर जनता के बीच चर्चा बाधित हो रही है। आलोचकों का कहना है कि कंपनी सरकारी दबाव की स्थितियों में प्लेटफॉर्म को स्वतंत्र रूप से संचालित करने की अपनी बुनियादी कसौटी पर विफल हो रही है।

मानव अधिकार वकील और जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी लॉ सेंटर में कानून के प्रोफेसर अर्जुन सेठी ने कहा, “भारत में, ट्विटर, फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया कंपनियां आज अधिनायकवाद की सेवक बन चुकी हैं। वह केवल भारत से ऑपरेट किये जाने वाले ही नहीं, विश्व भर के सोशल मीडिया खाते ब्लॉक करने के अनुरोध को नियमित रूप से स्वीकार कर रही हैं।”

पंजाब 80 और 90 के दशक में सिखों के लिए अलग स्वतंत्र देश स्थापित करने के इच्छुक अलगाववादी आंदोलन को लक्षित सरकार के कठोर अलगाववादविरोधी अभियान का स्थल था। कुछ समय पहले, पंजाब में कृषि बाज़ारों को नियंत्रण मुक्त करने के लिए लाये विधेयकों के खिलाफ किसान समूहों के व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए। सरकार और प्रतिरोध आंदोलनों के बीच संघर्ष ने ज़मीन पर दमनकारी स्थितियों को बढ़ावा दिया।

पंजाब पर केंद्रित मानवाधिकार संगठन इंसाफ के एक सह निदेशक सुखमान धामी का कहना है, “पंजाब वास्तव में पुलिस राज बन चुका है। भारत में छोटे राज्यों में से एक होने के बावजूद, यहां पुलिसकर्मियों, थानों, नाकों की सर्वाधिक घनता है, जो कि भारत के कई बहुसंख्यक-अल्पसंख्यक राज्यों के साथ है, और यहां बड़ी संख्या में सैन्य उपस्थिति भी हैं क्योंकि इसकी सीमाएं पाकिस्तान और कश्मीर से लगी हैं।

नरेंद्र मोदी की हिंदू राष्ट्रवादी सरकार ने अमृतपाल सिंह के अनुयाइयों की गिरफ्तारी के अपने प्रयासों को सही ठहराया है इस दावे के साथ कि वह अलगवावाद को बढ़ावा दे रहा था और हाल के भाषणों में “सांप्रदायिक भाईचारे को बिगाड़” रहा था।

फरवरी के अंतिम दिनों में सिंह के अनुयाइयों ने पंजाब के एक पुलिस थाने को घेर लिया अपने कुछ साथियों को छुड़ाने के लिए। भारतीय मीडिया के अनुसार वह हमला सरकार के प्रतिसाद का कारण है।

ट्विटर ब्लॉक होने और इंटरनेट बंदी के कारण, भारतीय समाचार संस्थानों, जो खुद सत्तारूढ़ सरकार और उसके सहयोगियों के अंगूठे के नीचे दबा हुआ महसूस कर रहे हैं, ने अमृतपाल सिंह कहां हो सकता है, की अटकलों से वायुतरंगों को भर दिया है। मंगलवार को, भारतीय समाचार रिपोर्टों ने दावा किया कि सामने आई सीसीटीवी फुटेज में सिंह चेहरा ढंके और बिना पगड़ी के दिल्ली के आसपास घूम रहा है।

मोदी सरकार ने जनता को एक खतरनाक, कट्टरपंथी उपदेशक की कहानी बताई है जिसे किसी कीमत पर रोका जाना जरूरी है। नरेंद्र मोदी के असहिष्णु और अधिनायकवादी राष्ट्रवाद में उनकी कार्रवाई को संदर्भ में रखने के असहमत लोगों के प्रयास ट्विटर ने दबा दिये हैं।

अर्जुन सेठी ने द इंटरसेप्ट को बताया, “पंजाब के अंदर भी लोग एक दूसरे तक पहुंचने में अक्षम हैं और विदेशों में बसे लोग अपने परिजनों, दोस्तों और सहयोगियों से संपर्क नहीं कर पा रहे।” उन्होंने कहा, “भारत दुनिया में ब्लैकआउट लागू करने में अग्रणी है और व्यापक सेंसरशिप और गलत सूचनाओं के अभियान के हिस्से के रूप में नियमित रूप से ब्लैकआउट लागू करती रहती है। पंजाब में अत्याचारों का दस्तावेजीकरण करने वाले मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को ब्लॉक किया जाता है और ज़मीन पर क्या हो रहा है, उसके बारे में जानकारी देने वाले विदेश में बसे कार्यकर्ताओं को भी ब्लॉक किया जाता है।”

नरेंद्र मोदी की सरकार ने ट्विटर को दबाने की कोशिश एलन मस्क के टेकओवर करने से भी पहले शुरू कर दी थी। ट्विटर इंडिया के कर्मचारियों को सरकारी आलोचकों को ब्लॉक करने से मना करने पर धमकाया गया है और देश के अंदर अन्य तरह के दबाव झेलने पड़े हैं। जिस समय एलन मस्क ने कंपनी की बागडोर ली थी, भारत सरकार के अनुरोधों को मानने की दर केवल 20 फीसदी थी। ऐसा लगता है कि ट्विटर इंडिया के स्टाफ में 90 फीसदी की कटौती करने वाल भारी छंटनी के बाद, प्लेटफॉर्म सरकारी दबाव में ज्यादा झुकने लगा है जैसा कि सरकार के आलोचकों को सेंसर करने की इसकी कार्रवाई अब दर्शाती है।

एलन मस्क, जिन्होंने लगातार ट्विटर के अधिग्रहण को स्वतंत्र अभिव्यक्ति की जीत करार दिया है, ने अपनी नीति जहां ट्विटर ऑपरेट करता है, उन देशों की सरकार का सम्मान करते हुए बनाई है। एलन मस्क ने पिछले साल ट्वीट किया था, “जैसा मैंने कहा है, मेरी तरजीह देशों के कानून के अनुकूल रहना है। यदि नागरिक कुछ भी प्रतिबंधित करना चाहते हैं, तो वह करने के लिए कानून पास कराएं, अन्यथा उसे मंजूरी देनी चाहिए।”

आलोचकों का कहना है कि सरकार के अनुरोधों के सामने झुकने की एलन मस्क की नीति खतरनाक और गैरजिम्मेदार है, क्योंकि यह सरकारों को असुविधाजनक अभिव्यक्ति को दबाने में सक्षम बनाती है और शासन की किसी शाखा से अनुरोध आना और अदालत से कोई आदेश आना एक ही बात नहीं है, पिछले स्वामित्व के तहत, ट्विटर लगातार मोदी प्रशासन समेत सरकारी अधिकारियों के ऐसे अनुरोधों के खिलाफ लड़ता था।

अमृतपाल सिंह और उसके समर्थकों के खिलाफ तलाशी अभियान जारी है, बड़ी संख्या में पंजाबियों की आबादी जिन विदेशों में है, वहां विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं जिनमें लंदन में भारतीय दूतावास पर विद्रूप विरोध शामिल है। इसके बावजूद, नरेंद्र मोदी इंटरनेट बंदी पर कायम हैं।

धामी ने कहा, “मुख्य बात जो भारत सरकार हासिल करना चाहती है वह नरेंद्र मोदी की छवि को बचाना है। उनमें ऐसी किसी भी बात के प्रति शून्य सहिष्णुता है जो नरेंद्र मोदी की छवि को नुकसान पहुंचा सकती हो और उन्हें सबसे ज्यादा यही बात उकसाती है कि नरेंद्र मोदी की छवि पर हमला हो रहा है।”

(द इंटरसेप्ट से साभार। रेयान ग्रिम और मुर्तज़ा हुसैन की रिपोर्ट का महेश राजपूत ने अनुवाद किया है।)

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