आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एज में भारत के प्रवेश के मायने

Estimated read time 5 min read

क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) संपूर्ण मानवता के लिए एक बड़ा वरदान साबित होने जा रहा है या यह उसके अस्तित्व के लिए खतरा साबित होने जा रहा है – इस प्रकार की बहसें अब बासी हो चुकी हैं। AI क्रांति लगभग सात दशक से भी ज़्यादा पुरानी हो चुकी है – क्योंकि इसकी शुरुआत 1950 में एलन ट्यूरिंग के मशीन इंटेलिजेंस के आईडिया से हो गई थी। मानवता अपने खात्मे के करीब नहीं पहुंच गई है। इसके उलट AI के कई व्यावहारिक उपयोग पहले से ही मानव प्रगति में बड़े पैमाने पर अपना योगदान दे रहे हैं। और, ज़ाहिर है इससे वे भले ही यदि विनाश नहीं ला रहे हैं, लेकिन बड़े पैमाने पर उथल-पुथल तो अवश्य पैदा कर रहे हैं।

यहां तक कि 1970 के दशक की शुरुआत में ही और तकरीबन 80 के दशक तक AI ने चिकत्सकीय निदान प्रदान करने के साथ साथ आर्थिक क्षेत्र में वित्तीय पूर्वानुमान, शेयर बाजार में निवेश, विपणन प्रबंधन और यहां तक ​​कि कुछ क्षेत्रों में उत्पादन प्रक्रिया को नए सिरे से डिजाइन करने में सफलता हासिल करनी शुरू कर दी थी। 1990 के दशक तक आते-आते हमने यात्रा और खरीदारी संबंधी सलाह से संबंधित ग्राहक सेवा में उनके प्रश्नों के लिए मशीन से जवाब सुनना शुरू कर दिया।

21वीं सदी में बिग डेटा के उभरने- यानी, किसी भी क्षेत्र से संबंधित डेटा की दिमाग झकझोर देने वाली मात्रा को स्टोर कर सकने वाले विशाल कंप्यूटर सर्वर और डेटा एनालिटिक्स के लिए एल्गोरिदम या कंप्यूटर प्रोग्राम के विकास ने मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की क्रांति के भीतर एक और क्रांति की शुरुआत कर दी थी। इंटरनेट ऑफ थिंग्स के इस युग में, जीवन कभी भी वैसा नहीं रहा जैसा कि 20वीं सदी में था।

हालांकि, सभी हर नई तकनीक अपने साथ विध्वंसकारी पहलू लिए होती है। इसी के मद्देनजर, पिछले दो दशकों के दौरान की नई बहस AI के द्वारा उत्पादकता में वृद्धि के कारण अर्थव्यवस्था पर होने वाले सकारात्मक प्रभाव बनाम नौकरियों के विस्थापन से होने वाले नकारात्मक प्रभाव के बारे में रही है। इसलिए आज के दिन श्रमिक आंदोलन का पूरा फोकस श्रम प्रक्रिया और रोजगार पर AI और संबंधित प्रौद्योगिकियों के पड़ने वाले प्रभाव पर केंद्रित है।

यह मुद्दा कुछ हद तक जटिल है। जहां एक तरह नई AI-संबंधित डिजिटल प्रौद्योगिकियों एवं ऑटोमेशन की वजह से जो नौकरियां खत्म हो रही हैं, उनका अनुमान लगाया जा सकता है, तो दूसरी ओर बिग डेटा-समर्थित AI एप्लीकेशन्स के चलते तकनीकी संवर्द्धन की वजह से अर्थव्यवस्था में उत्पन्न नई नौकरियों को आसानी से मापना संभव नहीं है।

इसके चलते बड़ी संख्या में मौजूदा श्रमबल को विस्थापन का दंश झेलना पड़ेगा, चाहे आगे चलकर लंबे अंतराल में कितनी भी नई नौकरियों की गुंजाइश बने। ऐसे में श्रमिक संगठनों के सामने फौरी चुनौती सरकार को विस्थापित श्रमिकों के लिए पुनर्वास उपाय लागू करने के लिए मजबूर करना होना चाहिए, ताकि राज्य के द्वारा तकनीकी परिवर्तन की प्रक्रिया को इस तरह से संचालित किया जाये, जिसमें समाज में विध्वंश और श्रमिक वर्ग को होने वाला कष्ट कम से कम हो। कंपनी मालिकों और सरकार की कीमत पर श्रमिकों के कौशल को उन्नत करने के अवसरों की तलाश करना इस विशाल तकनीकी परिवर्तन के प्रति श्रमिक प्रतिक्रिया का एक प्रमुख घटक है।

मार्क्सवादी परंपरा में तकनीकी परिवर्तन को लेकर दोहरा रुझान रहा है। जहां एक तरफ, मार्क्स ने तकनीकी प्रगति के क्षेत्र में होने वाले हर नए कदम का स्वागत किया। उन्होंने ब्रिटिश साम्राज्यवाद के द्वारा भारत में रेलवे की शुरूआत की भूरि-भूरि सराहना की थी, जिसने सामंती सामाजिक व्यवस्था के साथ-साथ उसकी क्रूर जाति व्यवस्था को व्यापक पैमाने पर चोट पहुंचाई। लेकिन, इसके साथ ही मार्क्स ने तकनीक के विकास के साथ श्रमिकों के अलगाव को भी उजागर किया।

यह अलगाव न सिर्फ उसके श्रम के उत्पादों से था बल्कि पूंजीवादी श्रम प्रक्रिया के चलते यह उसके मानवीय स्वभाव से भी अलगाव की वजह बन गया था, जहाँ वे विशालकाय पूंजीवादी मशीन के मात्र दांते और बोल्ट बनकर रह गए हैं। 1857-58 में फ्रेगमेंट ऑन मशीन इन ग्रुंड्रिस शीर्षक वाले अपने आकर्षक नोट में, मार्क्स ने पूंजीवादी उत्पादन में यह वास्तविक स्वरुप में लागू हो पाती, उससे काफी पहले ही ऑटोमेशन और श्रम प्रक्रिया पर इससे पड़ने वाले प्रभाव को अनुमानित कर लिया था। मार्क्स के अनुयायियों को भी AI के जबर्दस्त क्रांतिकारी स्कोप को लेकर भी इसी तरह का दोहरा रवैया अपनाना होगा।

भारत में AI का विस्तार

80 के दशक, यहां तक कि 90 के दशक में भी भारत में AI का प्रसार मुख्यतया आईआईटी और भारतीय विज्ञान संस्थान जैसे शैक्षणिक एवं शोध संस्थानों तक ही सीमित रहा। लेकिन पिछले दो दशकों से बड़े पैमाने पर AI का व्यावसायिक एवं औद्योगिक उपयोग होना शुरू हो चुका था। मौजूदा दौर में माइक्रोसॉफ्ट इंडिया, टाटा एलेक्सी, इनफ़ोसिस, विप्रो, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेस, HCL टेक्नोलॉजी, Accenture AI Labs और Tech Mahindra जैसी IT कंपनियों के अलावा AI एप्लीकेशन में अपनी सेवाएँ देने वाली कई AI स्टार्ट-अप कंपनियां भी उभरी हैं।

इसी के साथ मीडिया में भी इस बात का जबर्दस्त प्रचार हुआ है कि भारत दुनिया में AI सुपरपॉवर बनकर उभरने जा रहा है। यदि हम मीडिया हाइप को एक तरफ रख दें, तो अभी भी AI की पहुँच काफी मामूली है – भारत में AI बाज़ार इस वर्ष 8 बिलियन डॉलर तक पहुँचने की उम्मीद है और 2030 तक इसके प्रति वर्ष 40% की तेज रफ्तार से बढ़ने की उम्मीद है। अगर आपके बैंक में कुछ पैसे हैं, तो AI स्टॉक में निवेश करना सबसे बेहतर दांव हो सकता है!

इस पृष्ठभूमि में, हाल ही में प्रकाशित दो प्रकाशन भारत में AI की संभावनाओं के बारे में काफी कुछ बताते हैं। इनमें से एक गूगल की रिपोर्ट है, जिसका शीर्षक है एन AI ऑपर्चुनिटी एजेंडा फ़ॉर इंडिया, जिसे नवंबर 2024 में जारी किया गया था। दूसरा नवीनतम प्रकाशन जनवरी 2025 में कॉर्पोरेट कंसल्टेंसी फर्म अर्न्स्ट यंग के द्वारा प्रकाशित किया गया है, जिसका शीर्षक है हाऊ मच प्रोडक्टिविटी कैन GenAI अनलॉक इन इंडिया?

गूगल की रिपोर्ट में विस्तार से बताया गया है कि भारत में AI किस तरह से गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा तक पहुँच में सुधार ला सकता है, कृषि उत्पादकता और स्थिरता को मजबूती प्रदान कर सकता है, शैक्षिक और रोज़गार के अवसरों में सुधार ला सकता है। इतना ही नहीं, यह भारत की भाषाई एवं सामाजिक-सांस्कृतिक विविधता के बीच संचार में क्रांति ला सकता है और साथ ही सार्वजनिक सेवा वितरण में सुधार के अलावा वित्तीय क्षेत्र के संचालन में असंख्य तरीकों से दक्षता को बढ़ा सकता है, चाहे वो स्टॉक या प्रतिभूतियों में निवेश करना हो या ऋण वितरण के संचालन में हो।

गूगल रिपोर्ट क्लाउड कंप्यूटिंग सुविधाओं के साथ-साथ डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, सरकारी डेटाबेस में सुधार लाने और IA युग के लिए आवश्यक कानूनी ढाँचे को लागू करने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डालती है। रिपोर्ट में AI युग के लिए श्रम कौशल कार्यक्रमों को आधुनिक बनाने और नए डिजिटल AI युग में संक्रमण में श्रमिकों का समर्थन करने के माध्यम से AI-रेडी श्रमबल तैयार करने पर भी ध्यान दिया गया है।

वहीं अर्न्स्ट एंड यंग (EY) की रिपोर्ट में भारतीय उद्यमों के द्वारा AI तकनीक को अपनाने को लेकर उनकी तैयारी की स्थिति पर सर्वेक्षण के निष्कर्ष दिए गए हैं – इसमें खासकर तकनीकी सेवाओं, लाइफ साइंसेज एवं वित्तीय सेवाओं के बारे में जानकारी प्रदान की गई है। रिपोर्ट में अगले कुछ वर्षों के दौरान AI को अपनाने वाले उद्यमों में भारी उछाल की आशंका जताई गई है। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि EY की यह रिपोर्ट विस्तार से इस तथ्य को रेखांकित करती है कि AI में यह बदलाव भारत में 3.8 करोड़ कर्मचारियों पर किस तरह अपना प्रभाव डालने जा रहा है। इस लेख में हम EY रिपोर्ट की मुख्य बातों का सार-संक्षेप प्रस्तुत करेंगे।

भारत में AI पर अर्न्स्ट एंड यंग की रिपोर्ट की प्रमुख बातें

संक्षेप में कहें तो अर्न्स्ट एंड यंग की रिपोर्ट बताती है कि AI के माध्यम से भारतीय उद्योग में उत्पादकता 2.61% तक बढ़ सकती है। लेकिन इसके चलते भारतीय श्रम बाजार में भारी उथल-पुथल मचने वाली है, और लगभग 3.8 करोड़ श्रमिक इससे प्रभावित होंगे। ऐसे में श्रमिक आंदोलन के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है कि वह इस बात को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाये कि सरकार AI में इस बदलाव को मैनेज करने के लिए उपयुक्त नीतिगत समाधान लेकर आए, ताकि श्रमिक वर्ग को कम से कम कष्ट का सामना करना पड़े।

AI रेजीम में विशाल मात्रा में डेटा भंडारण और व्यवस्थित तरीके से डेटा-बेस को रखने और उनकी त्वरित पुनर्प्राप्ति की जरूरत पड़ती है। इसके लिए सुपरकंप्यूटरों से बड़े पैमाने पर प्रोसेसिंग पॉवर की भी आवश्यकता होती है जो सेंसर से लैस इंटरनेट ऑफ थिंग्स जैसी स्वायत्त स्वचालित सिस्टम्स के लिए इस डेटा के रियल टाइम प्रोसेसिंग के लिए एडवांस्ड एल्गोरिदम का उपयोग करते हैं और डेटा विश्लेषण और स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता रखते हैं – वो चाहे रोबोटिक्स हो या ऑटोनोमस वेहिकल और घरेलू उपकरणों या सैन्य उपयोग या विनिर्माण में उत्पादन प्रक्रियाओं में उपयोग की जाने वाली मशीनें हों।

जब ये प्रक्रियाएँ होंगी तो अनिवार्य रूप से इसके लिए सुरक्षा और विश्वसनीयता, नैतिकता और जवाबदेही का मुद्दा भी उठ खड़ा होता है, और इससे भी जरुरी तथ्य यह है कि यह सरकार के सामने नियामक चुनौतियाँ खड़ी करती हैं। यहाँ पर EY की रिपोर्ट अपनी समीक्षा में बताती है कि हमारा सीमित ध्यान कार्यस्थल पर श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा और श्रमिकों के कल्याण पर होना चाहिए।

आज नहीं तो कल, बाजार खुद ही उद्यमों के ऊपर GenAI (जेनरेटिव AI, और जेनरेटिव क्योंकि इन AI सिस्टम्स के पास डेटा विश्लेषण के माध्यम से कुछ नया तैयार करने की क्षमता है) में संक्रमण करने के लिए बाध्य कर देगा। यहाँ तक कि माइक्रो और छोटे उद्यमों को भी AI तकनीकों से जुड़ना पड़ेगा। यहां तक ​​कि किसी एक व्यक्ति के द्वारा संचालित छोटे से उद्यम को भी खरीद के लिए इनपुट के सबसे बेहतर विकल्प या विपणन के लिए उपयुक्त खरीदारों और विनिर्माण के लिए उपयुक्त डिजाइनों की पहचान करने इत्यादि के लिए AI की मदद की दरकार होगी। विनिर्माण के किसी भी क्षेत्र में शोध कार्य सिर्फ चैटजीपीटी जैसे AI असिस्टेंस या उसके जैसे कई अन्य AI सॉफ्टवेयर से ही कर पाना संभव हो सकता है।

इस AI ट्रांजिशन के लिए भारतीय उद्यम किस हद तक तैयार हैं? EY सर्वेक्षण ने अपनी रिपोर्ट में इसका जो सारांश पेश किया है, वो बताता है कि मात्र 3% भारतीय कंपनियों के पास प्रभावी AI तैनाती के लिए वृहद विशेषज्ञता और संसाधन मौजूद हैं, जबकि 16% उद्यमों में कुछ हद तक आवश्यक प्रतिभाएँ मौजूद हैं, लेकिन सभी AI पहलों का समर्थन करने के लिए यह अपर्याप्त है। 35% फर्मों के पास कुछ कौशल मौजूद है, लेकिन उन्हें भारी मात्रा में निवेश की आवश्यकता है।

24% उद्यमों को पता है कि उन्हें आवश्यक कौशल की जरूरत है, लेकिन उनके पास इसका अभाव है और उनके पास इसे अधिग्रहित करने के लिए कोई रणनीति नहीं है, जबकि 22% उद्यम ऐसे भी हैं जिन्होंने विशिष्ट GenAI कौशल की जरुरत के बारे में विचार तक नहीं किया है। EY सर्वेक्षण का यह निष्कर्ष साफ़ बताता है कि भारत में AI को लेकर जो मीडिया हाइप चल रही है, उसकी क्या असलियत है, और AI को अपनाने के मामले में भारत कहाँ खड़ा है और आने वाले दिनों में भारतीय उद्योग के कितने बड़े हिस्से को AI के कारण होने वाली उठापटक का सामना करना पड़ेगा।

2023 और 2024 में आईटी फर्मों सहित अन्य उच्च तकनीक वाले क्षेत्रों में लाखों की संख्या में कर्मचारियों की छंटनी हुई, जिनमें से अधिकांश के लिए AI-संचालित ऑटोमेशन जिम्मेदार है। यह एक तरह से शुरूआती झटका है, जो बताता है कि भविष्य में भारत में AI किस तरह से रोजगार को प्रभावित कर सकता है। जहां तक गैर-आईटी विनिर्माण क्षेत्र का प्रश्न है, तो इसमें AI की पैठ अपेक्षाकृत धीमी रहने वाली है, और अभी यह अपने प्रारंभिक अवस्था में होने के कारण ब्लू कॉलर श्रमिकों पर इसका प्रभाव काफी धीमा रहने वाला है।

रिपोर्ट में नॉलेज श्रमिकों पर AI के प्रभाव और इस काम में बड़े पैमाने पर उत्पादकता लाभ पर रोशनी डाली गई है। उद्यमों को क्लाउड (अर्थात, विशाल डेटाबेस) सेवाओं के साथ एकीकृत होना होगा और वे अलग-थलग होकर काम नहीं कर पाएंगे। AI की लागत में गिरावट का क्रम जारी है, और कुछ मामलों में तो यह पहले से ही 80% तक गिर चुकी है। बहुभाषी एवं बहुसांस्कृतिक भारतीय वास्तविकताओं के अनुकूल एक AI पारिस्थितिकी तंत्र सरकार के द्वारा भाषाई सॉफ्टवेयर भाषिनी के विकास की बदौलत आकार ले रहा है, जो विभिन्न भाषाओं में रियल टाइम में संचार को सुगम बनाने में प्रभावी है।

EY की रिपोर्ट में कहा गया है कि, “बुनियादी स्तर पर, AI ऑटोमेटेड वर्कफ़्लो, पैटर्न का पता लगा लेता है, और रियल टाइम में पूर्वानुमान प्रदान कर सकता है, जो निरंतर सीखने के लिए एक बंद लूप वाली प्रणाली निर्मित कर देती है। इसके माध्यम से कंपनियों को वैल्यू चैन को अधिकतम अपने पक्ष में करने, बेहतर चैनलों और मूल्य निर्धारण के माध्यम से अपने राजस्व को बढ़ाने और नए इंटरफेस के साथ डिलीवरी को तब्दील करने में मदद मिल सकती है।”

EY की रिपोर्ट में AI के उत्पादकता लाभ से होने वाले परिमाणन का विवरण भी दिया गया है। अर्नेस्ट एंड यंग के मुताबिक, “हमारे विश्लेषण से पता चलता है कि 24% काम को पूरी तरह से स्वचालित किया जा सकता है, जबकि 42% काम पर खर्च होने वाले समय को काफी हद तक कम किया जा सकता है, जिसके परिणामस्वरूप कॉर्पोरेट कर्मचारियों के लिए प्रति सप्ताह 8-10 घंटे की बचत हो सकती है। इसका अर्थ है कि 2030 तक संगठित क्षेत्र में उत्पादकता में 2.61% की वृद्धि होगी, जिससे संगठित क्षेत्र में 3।8 करोड़ भारतीय कर्मचारी जबकि असंगठित क्षेत्र में अतिरिक्त 2.82% प्रभावित होंगे।”

हालांकि रिपोर्ट इस मुद्दे पर रोशनी नहीं डालती कि इस उत्पादकता लाभ का कितना हिस्सा नियोक्ता द्वारा अपने पास रखा जाने वाला है और कितना हिस्सा श्रमिकों के हिस्से आएगा। इसमें सिर्फ उद्योग की विभिन्न श्रेणियों के लिए उत्पादकता में सुधार के प्रतिशत के साथ सकल उत्पादन के प्रतिशत के रूप में श्रम लागत को सहसंबंधित करने वाला एक चार्ट दिया गया है।

रिपोर्ट कई AI से जुड़े रुझानों का संक्षिप्त विवरण प्रदान करती है, जैसे कि मल्टीमॉडल AI का विकास, ओपन सोर्स लार्ज लैंग्वेज मॉडल का उद्भव जो इंसानी वार्तालाप की नकल करता है, स्वायत्त AI सिस्टम्स का विकास जो खुद से काम कर सकते हैं और फैसले ले सकते हैं जिन्हें एजेंटिक एआई, CoT या चेन ऑफ थॉट AI के रूप में जाना जाता है, जो तार्किक तर्कशक्ति से जुड़ा है और जटिल गणितीय समस्याओं को सुलझाने में उपयोग किया जाता है और इससे भी बढ़कर, Nvidia, हुआवेई, अमेज़ॅन, मेटा, गूगल जैसी कंपनियों के द्वारा बेहद शक्तिशाली प्रोसेसिंग हार्डवेयर के उपयोग के साथ-साथ कई नए स्टार्ट-अप के उदय के बाद से यह लगभग अपरिहार्य बन चुका है।

रिपोर्ट में मोटोरोला के AI फोन, ऐप्पल के एडवांस राइटिंग टूल्स, सैमसंग के ऑन-डिवाइस AI प्रोसेसिंग और ड्यूश टेलीकॉम के ऐप-लेस T-फोन जैसे एआई-संचालित उपकरणों के उद्भव के बारे में भी संक्षिप्त विवरण दिया गया है। नए AI गैजेट हमारी जीवनशैली को पूरी तरह से अलग स्तर तब्दील कर देने में सक्षम हैं। रिपोर्ट में OpenAI जैसे स्टार्ट-अप, जिसकी वैल्यूएशन 157 बिलियन डॉलर तक पहुंच चुकी है, के साथ 12 AI प्रमुखों के वित्तीय और निवेश रुझानों को भी शामिल किया गया है।

भारत में GenAI के विकास की बात करें तो रिपोर्ट में AI के भारतीय विशिष्टताओं जैसे चैट के लिए आवाज की भाषा, क्षेत्रीय भाषाओं में AI का इस्तेमाल, माइक्रो-लेंडिंग और माइक्रो-इंश्योरेंस के लिए एआई सॉफ्टवेयर और एआई-जनरेटेड मीडिया कंटेंट आदि को समझने पर ध्यान केंद्रित किया गया है-संक्षेप में कहें तो एक इंडिक AI पारिस्थितिकी तंत्र के विकास पर जोर है।

EY के सर्वेक्षण में यदि सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष की बात करें तो वह है यह कार्य को ही रूपांतरित करने की क्षमता रखता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके इस्तेमाल से निवेश के फैसले, रणनीतिक व्यवसाय योजना, वार्षिक परिचालन योजनाओं को तैयार करने, उत्पाद डिज़ाइन, मूल्य निर्धारण रणनीति, उत्पाद विविधीकरण रणनीति, अधिग्रहण या विलय के फैसले, व्यक्तिगत तौर पर रोगी की देखभाल, परामर्श, वितरण सेवाएँ और घरेलू तकनीकी सेवाएँ जैसे कामों को कई गुना बढ़ाया जा सकता है।

ग्राहक सेवा, मीटिंग या रिमाइंडर को शेड्यूल करना, इनवॉइस समाधान, रिज्यूमे स्क्रीनिंग और प्राथमिकता, ऑर्डर ट्रैकिंग, वेबसाइट एनालिटिक्स, बुनियादी आईटी सपोर्ट जैसे प्राथमिक स्तर के काम AI की मदद से स्वचालित हो जाएँगे। दूसरे शब्दों में कहें तो जीएसटी का काम संभालने वाले ऑडिटरों को AI बेरोजगार बना देगा!

इसके अलावा, प्रतिस्पर्धी विश्लेषण, ऋण संरचना, बाजार के बारे में पूर्वानुमान, धोखाधड़ी का पता लगाना, सप्लाई चैन ऑप्टिमाइजेशन, इवेंट प्लानिंग और सोशल मीडिया रणनीति इत्यादि जैसे कार्य, जो अभी भी कर्मियों के द्वारा किए जाते हैं, इन्हें AI के माध्यम से कर पाना संभव हो जाएगा।

इसके साथ ही रिपोर्ट में भविष्य में AI युग के लिए कार्यबल को तैयार करने की बात कही गई है, जिसमें कुछ चौंकाने वाले तथ्य दिए गए हैं। जैसे कि भारतीय कॉलेजों में अंतिम वर्ष के छात्रों में से मात्र 51।3% छात्र ही रोजगार के लायक हैं, और भविष्य के कार्यबल को AI-ready बनाने के लिए, AI को 14,000 से अधिक आईटीआई और 1100 विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में शामिल करना होगा। यह देश की शैक्षणिक प्रणाली के सामने एक कठिन चुनौती है। प्रधानमंत्री की अपरेंटिशशिप सिस्टम को पूरी तरह से एआई-आधारित बनाने के लिए भी उद्योग को AI को अपनाना होगा।

इसके बाद रिपोर्ट में बताया गया है कि किस तरह से AI वित्तीय सेवाओं, खुदरा क्षेत्र, उपभोक्ता एवं ई-कॉमर्स क्षेत्रों, स्वास्थ्य सेवा और जीवन विज्ञान, ऑटो और मोबिलिटी क्षेत्रों जैसी प्रौद्योगिकी सेवाओं, ऊर्जा क्षेत्र, मीडिया और मनोरंजन और अंत में सरकारी सेवाओं जैसे विशिष्ट उद्योगों को पूरी तरह से बदल देगा।

भारत सरकार ने सात क्षेत्रों के लिए उप-रणनीतियों के साथ एक AI मिशन की शुरुआत की है, जैसे कि कंप्यूटिंग क्षमता को बढ़ाने, आधारभूत मॉडल को विकसित करने, डेटासेट लॉन्च करना, एप्लिकेशन विकास को बढ़ावा देना, भविष्य के कौशल का उपयोग करना और स्टार्ट-अप वित्तपोषण को बढ़ाना और सुरक्षित और विश्वसनीय AI को सुनिश्चित करने पर जोर दिया है।

इस AI मिशन को सफलतापूर्वक संपन्न करने के लिए EY की रिपोर्ट एक नीतिगत एजेंडा को भी निर्धारित करती है। इस नीति एजेंडा की सिफारिशों में जो बातें शामिल हैं, वे हैं: उच्च-गुणवत्ता वाले डेटासेट तक पहुँच को बढ़ाना, कंप्यूट इंफ्रास्ट्रक्चर तक पहुँच को विकसित करना और सक्षम करना, AI-उपयोग केस स्टडी/मॉडल और R&D में तेज़ी लाना, सुरक्षा निहितार्थों के मद्देनजर जिम्मेदार और भरोसेमंद AI को बढ़ावा देना, सार्वजनिक-निजी भागीदारी को बढ़ावा देना और राष्ट्रीय सुरक्षा विचारों के मद्देनजर संप्रभु AI क्षमताओं पर ध्यान केंद्रित करना हमारी प्राथमिकता में होना चाहिए।

इस रिपोर्ट में बहुत कुछ ऐसा है जिसे यहाँ पर संक्षेप में बता पाना संभव नहीं है। इस AI युग में श्रमिक वर्ग के हितों की रक्षा के लिए श्रमिक कार्यकर्ताओं को चाहिए कि वे इन दोनों महत्वपूर्ण रिपोर्टों का विस्तार से अध्ययन करें।

(बी. सिवरामन स्वतंत्र शोधकर्ता हैं। sivaramanlb@yahoo.com पर उनसे संपर्क किया जा सकता है।)

+ There are no comments

Add yours

You May Also Like

More From Author