Thursday, December 9, 2021

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सीपी-कमेंट्री: पीएम मोदी मन मसोस कर विदेश नहीं जा पा रहे हैं

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हमारे भारत के प्रधानमंत्री पद पर 26 मई, 2014 से लगातार काबिज नरेंद्र मोदी को दुनिया के कई हुक्मरान से ज्यादा विदेश की सैर करने का अलहदा लुफ्त पिछले सात बरस में मिल चुका है। लेकिन, उफ ये बड़ी शय है। पीएम मोदी अगर बांग्लादेश की छोटी सी यात्रा को छोड़ दें तो चालू बरस 2021 में एक बार भी विदेश यात्रा पर नहीं जा सके हैं। लेकिन भारत को छोड़ सभी पांच बड़े देशों: अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन के भी शासक इसी बरस विदेश यात्रा कर चुके हैं।

ऐसा बिल्कुल नहीं है कि मोदी को विदेश जाने का अब मन ही नहीं करता है। उनका उन देशों की सैर करने की गिनती की सेंचुरी लगाने का मन तो बहुत करता है। इसके लिये उनकी विदेश यात्रा के राजकीय तौर पर कार्यक्रम भी बने। पर मोदी को मन मसोस कर ये कार्यक्रम लगभग अंतिम घड़ी में रद्द करने पड़ गये।

बोईंग बी 777

मोदी सरकार ने प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति की यात्राओं के लिये हाल में ‘एयर इंडिया वन‘ बेड़ा के लिये दो विमान 8458 करोड़ रुपये के खर्च से जो दो विशेष बोईंग बी 777 जेट विमान खरीदे हैं वे एक बार भी विदेश नहीं जा सके हैं। इन विमानों में मिसाइल डिफेंस सिस्टम- लार्ज एयरक्राफ्ट इन्फ्रारेड काउंटर मेजर और सेल्फ प्रोटेक्शन सूट्स की अत्याधुनिक मिसाइल रक्षा प्रणाली भी लगी है। ( देखे फोटो )

इसके बारे में हम अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन की इन दिनों चल रही विदेश यात्रा के बारे में जनचौक के इसी स्तम्भ सीपी-कमेंट्री के इसी माह जून के अंक में प्रकाशित एक रिपोर्ट में कुछ जिक्र कर चुके हैं। हम ये उल्लेख कर चुके हैं कि मोदी को पड़ोसी बांग्लादेश के राष्ट्रपिता का दर्जा हासिल मरहूम शेख मुजीबुर रहमान (17 मार्च 1920 :15 अगस्त 1975) की जन्म-शताब्दि के सिलसिले में उनकी बेटी और वहाँ की तीसरी बार प्रधानमंत्री बनीं और शेख मुजीब द्वारा ही स्थापित बांग्लादेश अवामी लीग की नेता शेख हसीना वाजेद के आमंत्रण पर 17 मार्च, 2021 को ढाका जाना था। लेकिन मोदी को भारत में कोरोना कोविड 19 महामारी की नई लहर से उत्पन्न अत्यंत विकट स्थिति के परिणामस्वरूप वह यात्रा अंतिम घड़ी में रद्द करनी पड़ गई। बाद में बंग्लादेश सरकार ने वह जन्म-शताब्दि कार्यक्रम भी रद्द कर दिया। हालांकि पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान मोदी ने बांग्लादेश की एक यात्रा जरूर की थी लेकिन वह बहुत छोटी थी।

पीएम मोदी की पिछली विदेश यात्रा 13 से 15 नवम्बर 2020 को हुई थी। तब वह ब्राजील में ‘ब्रिक्स‘ समूह के सदस्य देशों के शासन प्रमुखों के शिखर सम्मेलन में भाग लेने गये थे। ब्रिक्स उभरती राष्ट्रीय अर्थव्यवस्थाओं के समूह के पांच सदस्य देशों ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के अंग्रेज़ी नाम के प्रथमाक्षरों से मिलकर गढ़ा गया शब्द है जिसकी स्थापना 2009 में हुई थी।

पीएम मोदी की विदेश यात्रा के बारे में सरकारी तौर पर जानकारी पिछली बार दिसम्बर 2018 में भारतीय संसद के निम्न सदन, लोकसभा में एक तारांकित प्रश्न के लिखित उत्तर में दी गई थी।

2018 तक 69 देश की यात्रा

पीएम मोदी बतौर प्रधानमंत्री तब तक कुल 59 बार के विदेशी चक्कर में 69 देशों की यात्रा कर चुके थे। प्रथम विश्वयुद्ध के बाद 1929 में स्थापित राष्ट्र संघ के अभी कुल 193 सदस्य देश हैं।

पीएम मोदी की इन राजकीय विदेश यात्राओ पर 2156 करोड़ रुपये का खर्च आया था। दिसम्बर 2018 के बाद से उनके विदेश दौरे पर सरकारी खजाना से जो और खर्च हुआ है उसके बारे में आधिकारिक तौर पर पूरी जानकारी तत्काल उपलब्ध नहीं है।

मोदी भारत का प्रधानमंत्री बन जाने के बाद से हर बरस औसतन 10 बार विदेश जाते रहे हैं। उनकी इन विदेश यत्राओं पर औसतन खर्च का हिसाब हर बरस चार अरब रुपये से कुछ ज्यादा ही था ।

मनमोहन सिंह की विदेश यात्रायें

मोदी के प्रधानमंत्री बनने के पहले केंद्रीय सत्ता में 2004 से 2014 तक कांग्रेस की अगुवाई में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) की सरकार के दौरान के भी अधिकृत आंकड़े उपलब्ध हैं। उस दौरान के सभी 10 बरस प्रधानमंत्री रहे डाक्टर मनमोहन सिह कुल 73 बार विदेश गये थे। वे इनमें से 35 बार तो पांच-पांच बरस के अपने शासन के पूर्वार्ध में और 38 बार उत्तरार्ध में विदेश यात्रा पर गये थे।

डॉ. मनमोहन सिन्ह ने अपनी विदेश यात्राओं पर यूपीए सरकार के पहले 5 बरस में 1346 करोड़ रुपये और अंतिम 5 बरस में उससे कुछ कम खर्च किये थे। इनमें करीब तीन-तीन सौ करोड़ रुपये का विमान परिचालन खर्च भी शामिल है।

बहरहाल, तत्काल यह स्पष्ट नहीं है कि मोदी को अमेरिका की यात्रा करनी पड़े तो वहां के नये राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन का रूख क्या होगा। गुजरात में मोदी के मुख्यमंत्री काल में फरवरी 2002 के गोधरा साम्प्रदायिक दंगों में बड़े पैमाने पर हुए नरसंहार के प्रति अमेरिकी सांसदों के प्रतिरोध के मद्देनजर उन्हें अमेरिकी ‘पर्सनल वीसा ‘ जारी करने पर रोक लगा दी गई थी। तब जो बाइडन , अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा के उपराष्ट्रपति थे।

लेकिन मोदी को 2014 में भारत का प्रधानमंत्री बन जाने के बाद अमेरिकी ‘ डिप्लोमेटिक वीसा ‘ की सुविधा प्रदान कर दी गई है। जो बाइडन प्रशासन ने तत्काल ये स्पष्ट नहीं किया है कि पीएम मोदी को ‘पर्सनल वीसा‘ जारी करने पर लगी रोक बरकरार रहेगी या फिर वह बंदिश हटा ली जायेगी।

इस स्तम्भकार के वाशिंगटन डीसी के जानकार एक राजनयिक सूत्र के मुताबिक जो बाइडन भूले नहीं हैं कि मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में उनके कट्टर प्रतिद्वंद्वी और तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के लिये खुद प्रचार करने अमेरिका जाकर ‘अबकी बार ट्रम्प सरकार‘ का नारा भी लगाया था। ‘डिप्लोमेटिक वीसाधारी’ व्यक्ति के अमेरिका की सियासत में खुली दखलअंदाजी का ये गम्भीर मामला कभी भी मोदी के लिये मुश्किलें बढ़ा सकता है।

(चंद्रप्रकाश झा वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं।)

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