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Wednesday, August 4, 2021

अब पटौदी पंचायत में फूटा सूरजपाल अम्मू के मुंह से नफरती फौव्वारा

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गुड़गांव। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत जब रविवार को गाजियाबाद में कह रहे थे – कोई भी शख्स जो यह कहता है कि मुसलमान भारत में नहीं रह सकते, वो हिन्दू नहीं हो सकता। इसी तरह लिंचिंग करने वाला हिन्दू नहीं हो सकता। …भारत में इस्लाम खतरे में नहीं है। ठीक उसी समय हरियाणा में मेवात के पटौदी में एक हिन्दू महापंचायत हो रही थी, जिसमें मुसलमानों को जान से मारने और देश से निकालने के भाषण दिए जा रहे थे। पटौदी में इस महापंचायत का आयोजन आरएसएस के राजनीतिक मुखौटे भाजपा प्रवक्ता सूरजपाल अम्मू ने किया था। पटौदी की महापंचायत में पुलिस मौजूद थी, पुलिस को आयोजकों के बारे में पता था कि वे क्या बोलते हैं, इसके बावजूद उसने इस साम्प्रदायिक महापंचायत पर रोक नहीं लगाई। पटौदी महापंचायत में उस युवक रामभक्त गोपाल को भी लाया गया, जिसने सीएए-एनआरसी विरोधी आंदोलन में जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्र-छात्राओं पर लक्ष्य करके फायरिंग की थी। उसी गोपाल ने महापंचायत में नारा लगाया-  जब मुल्ले काटे जाएंगे, राम-राम चिल्लाएंगे। यह वीडियो सोशल मीडिया पर अब वायरल है।    

पटौदी महापंचायत

क्रिकेटर, नवाब पटौदी, शर्मिला टैगोर, सैफ अली खान और इम्तियाज महल के लिए मशहूर पटौदी में भाजपा प्रवक्ता सूरजपाल अम्मू ने यह महापंचायत लव जिहाद और आबादी नियंत्रण के मुद्दे पर बुलाई थी। एक्टर सैफ अली खान को निशाने पर लेते हुए सूरजपाल अम्मू ने कहा कि लोग कह रहे हैं कि पटौदी में खुलेआम लव जिहाद चल रहा है। जिन्होंने तैमूर को जन्म दिया वो भी पटौदी के हैं। अम्मू ने एक शख्स की तरफ इशारा करते हुए कहा, ठाकुर साहब यहां बैठे हैं। जब नवाब पटौदी का निधन हुआ था, वह आप ही थे, जिन्होंने नवाब को पगड़ी बांधी थी। हम इज्जत देना जानते हैं लेकिन हम तैमूर की मां से कहना चाहते हैं कि बस, अब बहुत हो चुका है। अम्मू ने कहा कि यह लव जिहाद शर्मिला टैगोर के समय से चल रहा है और पटौदी में उसी समय से लव जिहाद के बीज बोए गए थे। तो पटौदी के लोगों इसे तुम्हीं रोक सकते हो, उन लोगों का स्वागत करना छोड़ दो। 

अम्मू ने पटौदी वालों को संबोधित करते हुए कहा – अगर देश के अंदर इतिहास बनाना चाहते हो, इतिहास बनना नहीं है। इतिहास बनाना है। न तैमूर पैदा होगा, न औरंगजेब, बाबर, हुमायूं पैदा होंगे। हम सौ करोड़ हैं और वो बीस करोड़ हैं। 

इसी तरह मई में मेवात के इंदरी गांव की महापंचायत में अम्मू ने कहा था – मुसलमान हमारी बहन-बेटियों की इज्जत लूटें और हमें उन्हें मारने का अधिकार भी न हो। हमें वो अधिकार चाहिए। इंदरी में यह महापंचायत उन हत्या आरोपियों के समर्थन में बुलाई गई थी, जिन्हें पुलिस ने एक मुस्लिम जिम ट्रेनर आसिफ की हत्या में गिरफ्तार कर लिया था। इस महापंचायत के बाद मेवात पुलिस ने चार आरोपियों को छोड़ दिया था, क्योंकि उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिले थे। इंदरी महापंचायत के बाद मेवात में तनाव बन गया था और अब पटौदी में फिर से विवादास्पद मुद्दों पर महापंचायत की गई। 

बीजेपी ने किया किनारा

सूरजपाल अम्मू के पटौदी में दिए गए भाषण से हरियाणा भाजपा ने किनारा कर लिया है। हरियाणा भाजपा के एक नेता ने कहा कि वो अम्मू के व्यक्तिगत विचार हैं। पार्टी को इससे कोई लेना-देना नहीं है। 

अम्मू को 2013 में भी भाजपा का प्रवक्ता बनाया गया था। तब भी भाजपा ने उसके कुछ विवादास्पद बयानों की वजह से उसे इस पद से हटा दिया था। लेकिन 11 जून को उसे भाजपा का फिर से प्रवक्ता बनाया गया है। उसके बाद उसके भाषणों और बयानों से फिर विवाद बढ़ता जा रहा है।  

यूपी में अगले चंद महीनों में चुनाव हैं। कहा जा रहा है कि यूपी में अभी तक योगी आदित्यनाथ की सरकार तमामों विवादों और कोरोना में लापरवाही से हुई मौतों के मामले से निकल नहीं पाई है। इसलिए वहां हिन्दू-मुस्लिम ध्रुवीकरण की राजनीतिक कोशिश नाकाम हो सकती है। यही वजह है कि हरियाणा के मेवात का दामन थामा गया है। मेवात की महापंचायतों के वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड किए जाते हैं और उन्हें यूपी के तमाम वाट्सएप ग्रुप में भेजा जाता है। 

कौन है सूरजपाल अम्मू

दिल्ली से जब आप एमजी रोड पर गुड़गांव की तरफ बढ़ते हैं तो उसी पर विशालकाय एस्सल टावर है। इसी इमारत में हरियाणा भाजपा के नए बने प्रवक्ता और करणी सेना के अध्यक्ष सूरजपाल अम्मू का दफ्तर है। अभी तक इस दफ्तर को लोग प्रॉपर्टी डीलर के दफ्तर के रूप में जानते थे लेकिन इसकी पहचान अब बदल गई है। अब यह हिन्दुत्व के नए पोस्टर बॉय का दफ्तर है। भारत में जैसे-जैसे भाजपा और आरएसएस ने खुद का विकास किया है, उसी तरह आरएसएस के इस स्वयंसेवक का भी विकास हुआ है। 30 मई को मेवात की महापंचायत में ‘हम उनकी हत्या भी न करें’ जैसा जहरीला भाषण देने वाले सूरजपाल अम्मू के खिलाफ 5 जुलाई तक भी मेवात पुलिस केस दर्ज नहीं कर पाई है। मेवात पुलिस के एक आला अफसर ने इस संवाददाता से फोन पर कहा कि हमने इंदरी महापंचायत में सूरजपाल अम्मू के भाषण पर एसएचओ की राय मांगी है। 

हरियाणा पुलिस के आला अफसरों का कहना है कि 11 जून से सूरजपाल अम्मू को लेकर स्थिति बदल चुकी है। पहले वह हमारे लिए एक सिरफिरा एक्टिविस्ट था, लेकिन अब वो हरियाणा भाजपा का प्रवक्ता है। हरियाणा के गृह मंत्री से लेकर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष उसके घर आते हैं। ऐसे में हम अपनी नौकरी बचाएं या ऐसे सिरफिरे लोगों पर कार्रवाई करते फिरें। 

सूरजपाल अम्मू सोहना का रहने वाला है जो गुड़गांव जिले की तहसील है। सोहना भी मेवात का ही हिस्सा है। आर्य सामजियों के क्षत्रिय परिवार में पैदा सूरजपाल 10 साल की उम्र में आरएसएस में शामिल हुआ। वह कानून से ग्रैजुएट है और 1985 से 1988 में वह संघ की छात्र इकाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) में सक्रिय रहा। 2013 में उसे हरियाणा भाजपा का प्रवक्ता बनाया गया। 2014 से 2019 तक उसने भाजपा मीडिया कोआर्डिनेटर की भूमिका निभाई। 2019 में राजस्थान जाकर करणी सेना बनाई और खुद उसका अध्यक्ष बना। पद्मावत फिल्म पर रोक की मांग को लेकर करणी सेना की ओर से आंदोलन चलाया। एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण की हत्या पर दस करोड़ का इनाम घोषित किया। पद्मावत को लेकर जब हिंसा हुई तो गुड़गांव में एक स्कूल बस को टारगेट किया गया, जिसमें टीचर और बच्चे भी बैठे थे। बदनामी बढ़ने पर हरियाणा भाजपा ने इसे प्रवक्ता पद से हटा दिया। 

जनता की याददाश्त कमजोर समझ भाजपा ने 11 जून को इसे फिर से पार्टी का प्रवक्ता बना दिया। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ खुद इससे मिलने गए और यह पद आफर किया। सूत्रों का कहना है कि संघ से निर्देश प्राप्त होने के बाद हरियाणा भाजपा ने उसे यह पद सौंपा है।    

दो शादियां हुईं हैं अम्मू की

सूरजपाल अम्मू ने दो शादियां कीं। उनकी मौजूदा पत्नी के अलावा इससे पहले अम्मू ने पिलखुवा (यूपी) की प्रभा से भी विवाह किया था। पहली पत्नी से पैदा अनिरुद्ध राघव का शव 10 मार्च बुधवार 2021 को गाजियाबाद में लैंड क्राफ्ट गोल्फ लिंक्स सोसाइटी में मिला। गाजियाबाद पुलिस का कहना था कि उन्हें खुदकुशी की सूचना मिली थी। अनिरुद्ध पहले मां के साथ पिलखुवा में रहता था। मां प्रभा ने आरोप लगाया कि उनके बेटे की हत्या हुई है। सूरजपाल अम्मू ने इस बेटे की पढ़ाई पर काफी खर्च किया था। उसे लंदन में पढ़ाया था। अनिरुद्ध भारतीय जनता युवा मोर्चा में था। जब उसकी मौत हुई, तब वो सौंदर्य प्रसाधन (कॉस्मेटिक्स) की अपनी कंपनी गुड़गांव में खोलने जा रहा था, जिसका नाम क्लीनप्लस था। बहरहाल, इस रहस्यमय मौत की कहानी अब दफ्न हो चुकी है। परिवार अब इस पर बात नहीं करता। अनिरुद्ध की पत्नी शालू पर आरोप लगे थे। लेकिन उसके बाद क्या हुआ, कोई नहीं जानता। 

राजनीतिक महत्वाकांक्षा

सूरजपाल अम्मू के दोनों महापंचायतों, अन्य जगहों पर दिए गए भाषणों, पद्मावत विरोध के दौरान उसके बयानों का गहराई से विश्लेषण करने से पता चलता है कि उसके बयान का एकमात्र लक्ष्य कट्टरता और साम्प्रदायिकता को उभारना है। यह काम वो अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए कर रहा है। हरियाणा में पैदा होने के बावजूद उसने यूपी में भी अपने पैर जमा रखे हैं। कोई ताज्जुब नहीं कि उसे यूपी विधानसभा चुनाव में पार्टी टिकट से भी नवाज दे। उसके भाषण कुछ इस तरह के हैं, जो उसे राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में लाते हैं। क्यों नहीं हरियाणा भाजपा के अध्यक्ष धर्मपाल धनखड़ या राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ऐसा भाषण देते हैं। जाहिर है कि अम्मू को काम ही यह दिया गया है कि वो आये दिन विवादास्पद बयान दे। अगर ऐसा न होता को भाजपा ऐसे शख्स को दोबारा पार्टी प्रवक्ता न बनाती। बहुत साफ है कि उसकी भूमिका तय की जा चुकी है।

गोपाल पर कार्रवाई का सही मौका

पटौदी महापंचायत में जिस रामभक्त गोपाल ने मुसलमानों की हत्या का नारा लगाया और भीड़ से भी लगवाया, उस पर कार्रवाई का यह सही मौका है। क्योंकि सीएए-एनआरसी आंदोलन के दौरान उसने जामिया के छात्र-छात्राओं पर फायरिंग की थी, उस समय उसके नाबालिग होने की दुहाई दी गई थी। जनवरी 2020 की इस घटना में गोपाल घर से कट्टा लेकर आया था। इससे पहले वो अपने फेसबुक पेज पर लगातार कुछ जबरदस्त करने की बात कर रहा था। जेवर का घोड़ीवाला मुहल्ले के रहने वाले इस युवक के नाबालिग होने के सर्टिफिकेट मीडिया ने खूब उछाले थे। तब पुलिस ने कार्रवाई रोक दी थी। लेकिन अप्रैल 2020 में ही वह बालिग हो गया। गोली चलाने के बाद जब पुलिस ने उसे पकड़ा तो गोपाल के परिवार ने उसे मानसिक रूप से बीमार बताया था। 

गोपाल के पिता जेवर में परचून की दुकान चलाते हैं। गोपाल की मां किसी स्कूल में काम करती हैं। गोपाल का एक छोटा भाई है। घर का खर्च दुकान और मां की नौकरी से चलता है। लेकिन अब जबसे गोपाल को महापंचायतों और अन्य कार्यक्रमों में बुलाया जाने लगा है, परिवार की हैसियत बदल रही है। किसी समय गोपाल को मानसिक बीमार बताने वाले परिवार को अब अपने बेटे पर गर्व है। 

(यूसुफ किरमानी वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक हैं।) 

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