Wednesday, December 1, 2021

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लॉकडाउन और कोरोना काल में खुदकुशी बनी नयी महामारी

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विश्वव्यापी कोरोना वायरस की महामारी के दिए लॉकडाउन से बद से बदतर हुए हालात अब खुदकुशी की बीमारी फैला रहे हैं। पंजाब में 26 मई को आत्महत्या के तीन ऐसे मामले पुलिस में दर्ज हुए जो सीधे तौर पर लॉकडाउन और उससे वाबस्ता बेरोजगारी तथा आर्थिक तंगहाली की नागवार देन हैं। दो आत्महत्याएं महानगर लुधियाना में हुईं तो एक प्रवासी मजदूर ने पटियाला में खुद अपनी जान ले ली। चार अन्य जगहों से आत्महत्या की कोशिश की खबरें हैं। संकेत साफ हैं कि खुदकुशी की बीमारी बदस्तूर फैल रही है। पंजाब में इससे पहले भी लॉकडाउन में बेरोजगार और आर्थिक बदहाली में आए बीस के करीब लोगों ने खुदकुशी की है और पचास से ज्यादा ने कोशिश। वे मामले अलहदा हैं जो पुलिस में दर्ज नहीं हुए।                   

27 मई को महानगर लुधियाना के एक निजी बैंक के गोल्ड लोन विभाग में काम करने वाले 35 वर्षीय रवीश कुमार ने नौकरी जाने पर अपनी जान दे दी। पहले उसने बैंक के बाहर बैठ कर बाकायदा अपनी वीडियो बनाई और देर शाम नहर में कूदकर आत्महत्या कर ली। वीडियो में उसने साफ तौर पर कहा कि लॉकडाउन के दौरान बैंक ने उसे नौकरी से जवाब दे दिया था। उसे टर्मिनेशन लेटर भी नहीं दिया गया और न बकाया तनख्वाह। उसने अपने घर के हालात का वास्ता देकर पैसे मांगे लेकिन प्रबंधन ने एक नहीं सुनी।

वीडियो में रवीश ने साफ तौर पर कहा कि वह इस सबसे परेशान होकर आत्महत्या करने जा रहा है। इसी वीडियो में रवीश ने अपने दोस्तों और सगे संबंधियों से बूढ़े माता पिता का ध्यान रखने के लिए कहा और उन्हें राशन मुहैया कराने की भी बात की। देर शाम बस्ती जोधेवाल के न्यू सुभाष नगर के रहने वाले रवीश का शव एक नहर से बरामद हुआ।                   

रवीश की मां शशि के अनुसार उसने उन्हें भी फोन पर कहा था कि इन बदतर हालात का वह सामना नहीं कर पा रहा और आत्महत्या कर रहा है। इसके बाद परिजन उसे ढूंढने निकले तो नहर किनारे उसका मोटरसाइकिल और अन्य सामान मिला और बाद में लाश। साहनेवाल के एसएचओ इंद्रजीत सिंह पुष्टि करते हैं कि लॉकडाउन के दौरान पैदा हुए हालात के चलते रवीश आर्थिक बदहाली में था और उसने इसीलिए आत्महत्या की। दो बैंक अधिकारियों के खिलाफ आत्महत्या के लिए मजबूर करने के लिए मामला दर्ज किया गया है।                       

26 मई को तड़के लॉकडाउन की वजह से काम-धंधा चौपट होने से आजिज लुधियाना के महासिंह नगर के रहने वाले 52 वर्षीय श्यामलाल ने घर में फंदा लगा लिया। मृतक के परिजनों के मुताबिक कोरोना वायरस के बाद लागू लॉकडाउन उन्हें दो जून की रोटी के लिए भी मोहताज कर रहा था और मुखिया श्यामलाल से घरवालों की भूख बर्दाश्त से बाहर हो रही थी। इसका दुखद नतीजा उनके फंदे पर लटक जाने से मिला।                           

इसी दिन पटियाला की घन्नौर अनाज मंडी में एक प्रवासी मजदूर ने फंदा लगाकर जान दी। 19 साल का गोविंद प्रसाद इन दिनों बेरोजगार था। राजपुरा में मजदूरी करते गोविंद के पिता राज बली ने बताया कि इन दिनों उनका बेटा लॉकडाउन से हासिल आर्थिक बदहाली के चलते जबरदस्त मानसिक पीड़ा का शिकार था। 26 मई को घन्नौर से फोन आया कि उनके बेटे ने फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली। जब वह अपने भतीजे को साथ लेकर वहां पहुंचे तो देखा कि गले में तार डालकर लड़के ने फंदा लगा रखा था। उस कमरे में, जहां वह रहता था। परिवार ने घर वापसी के लिए पंजीकरण कराया हुआ था।                                 

फरीदकोट, बठिंडा, लुधियाना और तरनतारन में 26 मई को 4 लोगों ने खुदकुशी की कोशिश की। इनमें एक महिला भी शामिल है। इस आत्मघाती कदम उठाने की सबकी वजह लॉकडाउन से मिली घोर आर्थिक बदहाली है। हालात किस तरफ जा रहे हैं, बखूबी समझा जा सकता है। 

(पंजाब के वरिष्ठ पत्रकार अमरीक सिंह की रिपोर्ट।)

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