Tue. Nov 19th, 2019

व्हाट्सऐप जासूसी तो महज टिप ऑफ़ द आइसबर्ग

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व्हाट्सऐप का यह बयान गंभीर विवाद का कारण बन गया है, जिसमें कहा गया है कि इजराइली स्पाईवेयर ‘पेगासस’ के जरिये कुछ अज्ञात किरदार वैश्विक स्तर पर व्हाट्सऐप के जरिए जासूसी कर रही है। सवा सौ से अधिक भारतीय पत्रकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता भी इस जासूसी का शिकार बने हैं। इनमें सबसे ताज़ा नाम प्रियंका गांधी का जुड़ा है। यह कम ही मुमकिन है कि इजराइली स्पाईवेयर ‘पेगासस’ ने व्हाट्सऐप में सेंध मारकर मात्र सवा सौ से अधिक लोगों की ही जासूसी की गई है। दरअसल यह दिखाने के दांत हैं। खाने के दांत रहस्यमयता के आवरण में छिपे हुए हैं। दरअसल व्हाट्सएप जासूसी तो महज टिप ऑफ़ द आइसबर्ग है।

देश में गुप्तचर एजेंसियां या कई और एजेंसियां हैं जो अमान्य नंबरों से मोबाइल पर काल करती हैं और काल उठाते ही कनेक्शन कट जाता है। जब आप रिटर्न काल करते हैं तो रिकार्डेड संदेश सुनाई पड़ता है कि आप जिस नंबर पर काल कर रहे हैं वह अमान्य है। बीएसएनएल हो या कोई अन्य ओपरेटर, वह यह बताने के लिए तैयार नहीं हैं कि सिस्टम में अमान्य नंबर से काल तो आ रहा है पर जा नहीं रहा है।

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दरअसल पूरा मामला तब उजागर हुआ जब व्हाट्सऐप की ओर से अमेरिका में दायर किए एक मुकदमे के विवरण सामने आए। व्हाट्सऐप के मालिक फेसबुक ने ये मुकदमा एक इजराइली कंपनी एनएसओ के खिलाफ दायर किया है। फेसबुक का दावा है कि इस कंपनी ने अपने एक जासूसी सॉफ्टवेयर को दुनिया भर में कम से कम 1400 लोगों के मोबाइल फोन में व्हाट्सऐप के जरिए अवैध तरीके से डाला है। इसकी वजह से वे जासूसी का शिकार हो गए।

पेगासस सॉफ्टवेयर काफी उन्नत किस्म का है। इसे फोन में प्रवेश करने के लिए किसी लिंक पर क्लिक करने की भी आवश्यकता नहीं होती और ये मिस्ड वीडियो कॉल से भी फोन में घुस सकता है। फोन के अंदर घुस जाने के बाद यह फोन कॉल, एसएमएस, व्हाट्सऐप संदेश, ईमेल, ब्राउजर हिस्ट्री, पासवर्ड जैसी हर जानकारी चुरा सकता है। एन्क्रिप्टेड संदेश भी इससे बचे नहीं रहते और यह फोन के कैमरे और माइक को भी चला कर आस पास हो रही गतिविधियां रिकॉर्ड कर सकता है। सॉफ्टवेयर सारी जानकारी वाईफाई या मोबाइल इंटरनेट के जरिए फोन से बाहर भेज सकता है। यह फोन के अंदर अदृश्य रहता है। फोन को धीमा भी नहीं करता जिससे कोई शक हो और इसमें खुद को नष्ट करने का विकल्प भी होता है।

इजरायली एनएसओ ये सॉफ्टवेयर सिर्फ सरकारों को बेचती है, जिससे यह आरोप लग रहे हैं कि इन 1400 लोगों की जासूसी अलग-अलग देशों की सरकारों ने ही करवाई है। भारत में भी मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने सीधे-सीधे आरोप लगाया है कि भारत सरकार की एजेंसियां नागरिकों की गैर-कानूनी और असंवैधानिक तौर से जासूसी कर रही हैं। पार्टी ने सरकार से पूछा है कि वो बताए कि भारत सरकार की कौन सी एजेंसी ने एनएसओ से पेगासस सॉफ्टवेयर खरीदा है। इसे खरीदने की अनुमति किस ने दी और जासूसी करने वालों के खिलाफ सरकार क्या कार्यवाई करेगी? कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट से भी आग्रह किया है कि वो स्वयं इस पूरे मामले का संज्ञान ले और कोर्ट की निगरानी में चलने वाली जांच शुरू करे।

कहा जा रहा है कि जिन लोगों के नाम जासूसी में शिकार होने में सामने आए हैं वे मई 2019 में हुई इस जासूसी का शिकार बने थे। इनमें से अधिकतर लोग मानवाधिकार एक्टिविस्ट, वकील और पत्रकार हैं। इन लोगों से व्हाट्सऐप और कैनेडियन साइबर सुरक्षा समूह सिटीजन लैब ने संपर्क किया था और इनके फोन के हैक हो जाने की जानकारी दी थी। बता दें कि पेगासस का नाम पहले भी जासूसी के कई विवादों से जुड़ा रहा है। माना जाता है कि पत्रकार जमाल खशोगी की सऊदी दूतावास में हुई हत्या के पहले उसकी जासूसी पेगासस के जरिए करवाई गई थी। ऐसे कुछ और अंतरराष्ट्रीय मामलों की चर्चा चल रही है।

ख़बरों के अनुसार भारत के आठ मोबाइल नेटवर्क का इस जासूसी के लिए इस्तेमाल हुआ है। मुक़दमे में दर्ज तथ्यों के अनुसार इजराइली कंपनी ने जनवरी 2018 से मई 2019 के बीच भारत समेत अनेक देशों के लोगों की जासूसी की।

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