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Thursday, August 5, 2021

बदायूं गैंगरेप पर महिला आयोग का शर्मनाक बयान, कहा-अकेले न जाती तो नहीं होता बलात्कार

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बदायूं रेपकांड के मुख्य आरोपी मंदिर के पुजारी को गिरफ्तार कर लिया गया है। उसको पास के गांव से पुलिस ने गिरफ्तार किया। पुजारी सत्यानंद गांव में अपने एक भक्त के यहां छुपा हुआ था। इसी के साथ ही बदायूं में इस घटना को लेकर विरोध प्रदर्शन हुआ है जिसमें सैकड़ों महिलाओं ने शिरकत की है। उधर महिला आयोग की सदस्य के बयान को लेकर बवाल हो गया है। जिसमें उन्होंने कहा था कि महिला को शाम को अकेले बाहर नहीं निकलना चाहिए था। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने इस बयान पर कड़ा एतराज जाहिर किया है।

गौरतलब है कि बदायूं में निर्भया को भी मात देने वाली घटना हुई है। जिसमें 50 वर्षीय महिला के साथ पुजारी सत्यानंद और उसके दो सहयोगियों ने बेहद वीभत्स तरीके से बलात्कार किया। इन दरिंदों ने न केवल महिला के प्राइवेट पार्ट में लोहे की राड डाल दिया बल्कि मर जाने पर उसको उसके घर के सामने फेंक कर चले गए। और उससे भी ज्यादा अमानवीय और संवेदनहीन रवैया पुलिस और प्रशासन का रहा जिसने इसकी एफआईआर तक दर्ज नहीं की। और नजीतन 18 घंटे तक शव पीड़ित के दरवाजे पर पड़ा रहा। दो दिन बाद एफआईआर लिखे जाने पर महिला का पोस्टमार्टम तब हो पाया जब ग्रामीणों ने मिलकर विरोध किया।

घटना में दो आरोपी पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके हैं। मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में एसएचओ को भी हटा दिया गया है। इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित खबर के मुताबिक सत्यानंद गांव के पास स्थित मंदिर के ही एक दूसरे कमरे में रहता था। अभी वह पांच साल पहले आया था। और अपने आप में ही सीमित रहता था।

एक स्थानीय निवासी नंदू ने बताया कि सत्यानंद उन लोगों को पूजा समेत तमाम संस्कारों को संचालित करने में मदद करता था। बदायूं के एसएसपी संकल्प शर्मा ने कहा कि गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपियों ने बताया कि उन्हें महिला घायल हालत में मिली थी और वो उसकी मदद करना चाहते थे। लेकिन मैंने घटनास्थल का दौरा किया है और सुबूतों के मुताबिक इस केस को हम लोग गैंगरेप और हत्या के तौर पर ले रहे हैं।

महिला के परिजनों ने आरोपियों की इस बात को खारिज कर दिया की वो उसकी मदद करना चाहते थे। महिला के दामाद ने कहा कि अगर वे मदद करना चाहते थे तो वो गांव के लोगों को जगा सकते थे। लेकिन उनकी मंशा उसे मरने के लिए छोड़ जाने की थी….वह ईश्वर से डरने वाली महिला थी। उसके साथ इस तरह से मंदिर में होगा हम इसकी कल्पना भी नहीं कर सकते थे।

इस मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग का बयान बेहद ही शर्मनाक रहा है। घटनास्थल का दौरा करने गयीं आयोग की सदस्य चंद्रमुखी देवी ने कहा कि घटना नहीं हुई होती अगर महिला शाम को अकेले बाहर नहीं निकली होती। उन्होंने कहा कि यह ऐसा अपराध है जिसने मानवता को शर्मिंदा कर दिया है लेकिन मैं यह कहना चाहूंगी कि किसी के भी प्रभाव में महिलाओं को गलत समय पर बाहर नहीं निकलना चाहिए। आगे उन्होंने कहा कि मैं यह महसूस करती हूं कि अगर महिला शाम को बाहर नहीं निलकती या फिर उसके साथ कोई बच्चा रहा होता तो घटना नहीं होती।

आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने कहा कि मैं नहीं जानती कि कैसे और क्यों सदस्य ने ऐसा कहा लेकिन कोई भी महिला अपनी इच्छा से कहीं भी आने जाने के लिए स्वतंत्र है।

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने महिला आयोग के इस बयान पर कड़ा एतराज जाहिर किया है एक फेसबुक पोस्ट के जरिये उन्होंने पूछा है कि क्या इस व्यवहार से हम महिला सुरक्षा सुनिश्चित कर पाएंगे? महिला आयोग की सदस्य बलात्कार के लिए पीड़िता को दोषी ठहरा रही हैं। बदायूं प्रशासन को ये चिंता है कि इस केस का सच सामने लाने वाली पीड़िता की पोस्टमार्टम लीक कैसे हुई। उन्होंने कहा कि याद रखिए कि इस समय एक और भयावह बलात्कार के मामले में मुरादाबाद की पीड़िता मौत से जंग लड़ रही है। महिलाएं इस प्रशासनिक प्रणाली को व इस बदजुबानी को माफ नहीं करेंगी।      

इस बीच इस पूरी घटना के खिलाफ बदायूं में विरोध प्रदर्शन हुआ है जिसमें सैकड़ों महिलाओं ने हिस्सा लिया है। लोकमोर्च के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन में लोगों ने आरोपियों को जल्द से जल्द सजा देने की मांग की है। प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए लोकमोर्चा कार्यसमिति की सदस्य प्रियंका यादव ने कहा कि योगी राज में महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। पूरे प्रदेश में महिलाओं पर हिंसा की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। थानों में बलात्कार पीड़िताओं के मुकदमें दर्ज करने की जगह बलात्कारियों को बचाया जाता है।

जिलाधिकारी कार्यालय पर हुए प्रदर्शन उन्होंने कहा कि उन्नाव से लेकर हाथरस और अब उद्यैती की घटनाओं से जाहिर हो गया है कि योगी सरकार बलात्कारियों को बचाने की हर संभव कोशिश करती है। उद्यैती पुलिस निर्भया जैसे जघन्य बर्बर बलात्कार और हत्या के मामले को हादसा बताकर मामले को दबाने में लगी रही। पीड़ित महिला के साथ इतनी हैवानियत की गई जिसकी कोई दूसरी मिसाल नहीं मिलेगी। सामूहिक बलात्कार किया गया, उसका पैर तोड़ दिया, एक फेफड़ा क्षतिग्रस्त कर दिया गया, आंतरिक अंगों में रॉड डाली गई और शरीर का पूरा खून बहने से उसकी मौत हो गई। फिर भी सूचना के दो दिन तक प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई और आखिरी दम तक बलात्कारियों को बचाने की कोशिश की गई। हाथरस मामले में लखनऊ में प्रेस वार्ता कर योगी सरकार के अपर पुलिस महानिदेशक ने कहा कि दलित बेटी के साथ बलात्कार की घटना ही नहीं हुई, जबकि उसने मृत्यु पूर्व बयान में बलात्कार की पुष्टि की थी। उन्नाव में तो योगी सरकार लगातार अपने बलात्कारी विधायक को बचाती रही। इतना ही नहीं योगी सरकार ने अपने सांसद स्वामी चिन्मयानंद से शिष्या के बलात्कार का मुकदमा ही वापस ले लिया।

लोकमोर्चा कार्यसमिति की सदस्य शीबा काजमी ने कहा कि महिलाओं को योगी सरकार के पुलिस प्रशासन पर भरोसा नहीं है , घटना की न्यायिक जांच होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि योगी सरकार समाज में साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण और नफरत फैलाने के देश विरोधी एजेंडे पर काम कर रही है और बलात्कारियों, अपराधियों को संरक्षण दे रही है। सूबे में जंगल राज चल रहा है।

इस मौके पर प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन अतिरिक्त मजिस्ट्रेट को सौंपा। ज्ञापन में घटना की न्यायिक जांच कराने, दोषियों को बचाने वाले जनपद के आला पुलिस -प्रशासनिक अधिकारियों को दंडित करने, आरोपियों को गिरफ्तार कर फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चलाने, पीड़ित परिवार को एक करोड़ मुआवजा व एक सदस्य को नौकरी देने आदि मांगें की गईं हैं। कार्यक्रम में प्रियंका यादव, शीबा काजमी, आसमा, जय देवी, मिथलेश, शायशा, तुलसी, पिंकी, शांति, लक्ष्मी, वेदवती समेत दर्जनों लोकमोर्चा कार्यकर्ता मौजूद रहीं।

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