अज़ीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी में कश्मीर से संबंधित कार्यक्रम का आयोजन करने वाले छात्रों पर मामला दर्ज

बेंगलुरु। अज़ीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी में कश्मीर से संबंधित एक कार्यक्रम आयोजित करने वाले छात्रों के ख़िलाफ़ यूनिवर्सिटी प्रशासन ने मामला दर्ज कराया है।

न्यूज़मिनट की खबर के अनुसार स्पार्क रीडिंग सर्कल एपीयू नामक समूह ने कुनान पोशपोरा घटना पर चर्चा करने के लिए किया गया था। घटना फरवरी 1991 की है और जम्मू कश्मीर के दो गांवों की महिलाओं से सुरक्षा कर्मियों द्वारा बलात्कार के आरोपों से संबंधित है।

इस कार्यक्रम को “देश-विरोधी” करार देते हुए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के करीब 20 सदस्यों ने मंगलवार को कैंपस में घुसकर हंगामा किया था। यूनिवर्सिटी के साइनबोर्ड पर कालिख पोतने, कार्यक्रम स्थल पर तोड़फोड़ करने के अलावा कथित रूप से कुछ छात्रों और सुरक्षाकर्मियों से मारपीट भी की थी। यूनिवर्सिटी की शिकायत पर पुलिस ने एबीवीपी के 18 सदस्यों को गिरफ्तार किया था।

यूनिवर्सिटी ने बाद में स्पार्क रीडिंग सर्किल एपीयू के ख़िलाफ़ पुलिस को दी शिकायत में कहा कि कार्यक्रम के आयोजन की न तो अनुमति माँगी गई थी और न अनुमति दी गई थी। प्रशासन का यह भी दावा था कि स्पार्क यूनिवर्सिटी के साथ पंजीकृत नहीं है। प्रशासन ने कहा कि “अज्ञात” लोग यूनिवर्सिटी का नाम इस्तेमाल कर रहे थे और “ऐसी सामग्री वितरित कर रहे थे जो दो समुदायों में वैमनस्य पैदा कर सकती है।”

पुलिस ने इस शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की है। 

गुरुवार को एपीयू की छात्र परिषद ने एक बयान जारी कर यूनिवर्सिटी प्रशासन के रवैये की आलोचना की। बयान के अनुसार प्रशासकीय अनुमति के बिना छात्रों का कार्यक्रम करना प्रोटोकॉल का उल्लंघन माना जा सकता है लेकिन ऐसी बातों से आंतरिक स्तर पर निबटना चाहिए,  न कि एफआईआर करायी जानी चाहिए। 

छात्र परिषद के अनुसार जो लोग अनाधिकार कैंपस में घुसे, हमारे सदस्यों से मारपीट की, यूनिवर्सिटी की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया, उन्हें जमानत दी गई है और उन पर जमानती अपराधों के आरोप हैं जबकि यूनिवर्सिटी के छात्रों, जिन्होंने शांतिपूर्ण कार्यक्रम  आयोजित किया, उनके ख़िलाफ़ ग़ैर जमानती आरोप लगाए गए हैं। किसी कार्यक्रम के आयोजन के जवाब में एफआईआर दर्ज कराना संस्थान की बौद्धिक स्वतंत्रता के प्रति कटिबद्धता को नुकसान पहुंचाती है।   

(जनचौक ब्यूरो)

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