देहरादून: अंकिता को न्याय दिलाने के लिए लोगों ने निकाला राजभवन तक मार्च

देहरादून। आज “अंकिता न्याय संयुक्त संघर्ष मंच” से जुड़ी महिलाओं, युवाओं, पूर्व सैनिक संगठन के कार्यकर्ताओं एवं अन्य विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच के बैनर तले गांधी पार्क से राज भवन तक राज्यपाल के अलोकतांत्रिक असंवैधानिक कार्य व्यवहार के विरोध में एक मौन मार्च निकालाI इस मार्च में 200 से ज्यादा लोग शामिल थे। मंच नेत्री कमला पंत ने बताया कि यह मौन मार्च पूर्व प्रस्तावित था, इसके  माध्यम से अंकिता को न्याय के मुद्दे पर सरकार के रवैये को लेकर मात्र जन जागरण करना चाहते थेl 

उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य राज्यपाल से जैसे भी वे चाहें उनसे मात्र 5 – 6 सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल मिलकर उनको जन भावना को बताते हुए उनके माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भिजवाना मात्र था। इसके लिए उनके वहां 3 बार फोन किया गया और मंच की ओर से ब्रिगेडियर सर्वेश डंगवाल के द्वारा 2 ईमेल भेजकर भी इस हेतु अनुरोध भेजा गया। परंतु राज्यपाल महोदय ने कोई उत्तर तक नहीं दिया, राज्यपाल के ऐसे अलोकतांत्रिक – असंवैधानिक रवैये के विरोध में ही तब यह मार्च राजभवन तक के लिए निकालने का निर्णय संयुक्त संघर्ष मंच ने लिया। 

काफी पहले ही जहां पुलिस द्वारा रोका गया, तब वहां से भी मात्र 5 लोगों के प्रतिनिधि मंडल को बुलवा कर ज्ञापन लेने की गुहार लगाई गई परंतु राज्यपाल महोदय ने इसकी भी अनुमति नहीं दी। जब राज्य सरकार कुछ नहीं सुनती या करती है तो लोग राज्य अध्यक्ष से मिलकर अपनी बात उनके सामने रखना चाहते हैं। यह किसी भी नागरिक या संगठन का लोकतांत्रिक अधिकार है। 

परंतु हमें दुख है और रोष भी कि राज्यपाल महोदय ने लोकतांत्रिक संवैधानिक दायित्व न निभाकर भाजपा सरकार के एक एजेंट की तरह का व्यवहार प्रदर्शित किया है। यह उनके द्वारा सीधे-सीधे हत्या का शिकार हुई अंकिता, उसके माता-पिता और उनकी बात को उठाने वाली उत्तराखंड की जनता का अपमान है l 

उन्होंने बताया सीधे राष्ट्रपति महोदया को 40 पृष्ठ में सैकड़ों हस्ताक्षरों के साथ अभ्यावेदन भेजा गया है। मौन मार्च के बाद सुजाता पाल के निर्देशन में युवाओं के द्वारा नुक्कड़ नाटक के जरिए भी मांगों के साथ जनता के गुस्से को स्वर दिया गया। घोषणा भी की गई कि अब हर जिला मुख्यालय/शहर/ ब्लॉक मुख्यालयों में भी न्याय पंचायत आयोजित की जाएंगी जिसकी शुरुआत बजट सत्र के दौरान गैरसैण से की जाएगी। 

अंकिता न्याय संघर्ष को उत्तराखंड में महिला सुरक्षा के सवाल पर केंद्रित किया जाएगा। इसी क्रम में इसे उत्तराखंड में होटल रिसोर्ट – नशा संस्कृत के चलते महिला यौन शोषण, बढ़ते अपराध व इंसानियत विरोधी कृत्यों पर भी केंद्रित किया जाएगा। 

वन्य जीवों के आतंक से मानव जीवन पर उठ रहे खतरे विशेष कर महिला सुरक्षा सवाल को भी पुरजोर तरीके से उठाया जाएगा।

आज के मौन मार्च को लोगों ने बहुत सराहा, जहां प्रदर्शनकारियों ने अपनी अलग-अलग तख्तियों – पोस्टरों के जरिए जनता की पीड़ा और मांगों को प्रस्तुत किया। अंकिता हत्याकांड की CBI जांच को, जिस प्रकार से सरकार ने अपने करीबी अनिल जोशी (जिसका इस प्रकरण से कभी कोई लेना देना नहीं रहा) के द्वारा दर्ज करायी FIR पर शुरू करवाया जा रहा है, उसे लेकर बाद में सभा में सभी ने तीव्र रोष व्यक्त किया। CBI जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो क्योंकि हत्या जिन कथित आरोपित VIP के वज़ह से हुई और जिन्होंने साक्ष्य नष्ट कराए वे सभी अति उच्च पदस्थ प्रभावशाली लोग हैं। 

लोगों ने राज्य में बिगड़ती जा रही कानून व्यवस्था पर भी चिंता व रोष व्यक्त करने के साथ ही राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने तक की भी बात की।

(प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित।)

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