संस्कृति-समाज

पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री को पाकिस्तानी फिल्म ‘मौला जट्ट’ ने किया था जिंदा!

उपमहाद्वीप में 1947 के बंटवारे ने बहुत कुछ विभाजित कर दिया था लेकिन कुछ ऐसी चीजें बची… Read More

बेगम मलेरकोटला मुनव्वर को सम्मानित करके सिखों ने एक और ‘कर्ज’ उतारा

बहुत पुराने किलों-महलों में रहने वाले लोग महज हाड-मांस के चलते-फिरते बाशिंदे भर नहीं होते बल्कि तवारीख… Read More

“धीरेंद्र मजूमदार की मां”- नागरिकता पर सवाल उठाता नाटक

इन दिनों रंगकर्म के क्षेत्र में भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) इंदौर इकाई की प्रस्तुति “धीरेन्द्र मजूमदार… Read More

सालारजंग संग्रहालय: आंखों के सामने जिंदा हो जाता है इतिहास-ए-निज़ाम

इनको देखा तो ये ख्याल आया कि हम इन म्यूजियमों को क्यों देखें? म्यूजियम बीते समय यानी… Read More

स्मृति दिवस पर विशेष: एक संस्कृतिकर्मी के बतौर गोरख की रचनाओं से साक्षात्कार

गोरख से व्यक्तिगत रूप से अंतरंग होने का मुझे मौका नहीं मिला। लेकिन उनके गीत और कविताएं… Read More

सोफिया दिलीप सिंह: एक क्रांतिकारी सिख ‘राजकुमारी’                               

राजकुमारी सोफिया दिलीप सिंह को कौन नहीं जानता? बतौर ‘राजकुमारी’ नहीं बल्कि भारतीय स्वतंत्रता के लिए अपने… Read More