संस्कृति-समाज

पच्छूं का घर: जीवन के विविध रंगों से रूबरू कराती एक किताब

‘पच्छूं का घर’ पुस्तक आपबीती घटनाओं का सृजनात्मक आख्यान है। यह लेखक के जीवन के सभी आयामों… Read More

मिर्ज़ा ग़ालिब स्मृति दिवस: कहते हैं कि ‘ग़ालिब’ का है अंदाज़-ए-बयां और

मिर्ज़ा ग़ालिब उर्दू के अज़ीम शायर हैं। वे जितने उर्दू ज़बान में मक़बूल हैं, उतने ही उन्हें… Read More

देवेंद्र सत्यार्थी: लोकगीतों में धड़कती जिंदगी

देवेंद्र सत्यार्थी एक विलक्षण इंसान थे। पूरे हिंद उपमहाद्वीप में उनकी जैसी शख़्सियत शायद ही कोई हो।… Read More

‘उफ़! टू मच डेमोक्रेसी’: सादा ज़बान में विरोधाभासों से निकलता व्यंग्य

डॉ. द्रोण कुमार शर्मा का व्यंग्य-संग्रह ‘उफ़! टू मच डेमोक्रेसी’ गुलमोहर किताब से प्रकाशित हुआ है। वैसे तो ये… Read More

घर से मस्जिद है बहुत दूर चलो ये कर लें: निदा फ़ाज़ली स्मृति दिवस

निदा फ़ाज़ली उर्दू और हिन्दी ज़बान के जाने-पहचाने अदीब, शायर, नग़मा निगार, डायलॉग राइटर थे। निदा फ़ाज़ली… Read More

पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री को पाकिस्तानी फिल्म ‘मौला जट्ट’ ने किया था जिंदा!

उपमहाद्वीप में 1947 के बंटवारे ने बहुत कुछ विभाजित कर दिया था लेकिन कुछ ऐसी चीजें बची… Read More

बेगम मलेरकोटला मुनव्वर को सम्मानित करके सिखों ने एक और ‘कर्ज’ उतारा

बहुत पुराने किलों-महलों में रहने वाले लोग महज हाड-मांस के चलते-फिरते बाशिंदे भर नहीं होते बल्कि तवारीख… Read More