यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा: एक अधिसूचना से बढ़ी अभ्यर्थियों की कठिनाइयां

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नई दिल्ली। कार्मिक मंत्रालय की एक अधिसूचना ने इस बार संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की प्रारंभिक परीक्षा के लिए आनलाइन आवेदन को बेहद व्यापक और जटिल बना दिया है। इसके इतिहास में यह पहला मौका है शायद, जब परीक्षार्थियों से वे सारी सूचनाएं भरने के लिए कहा गया है, जिसे उनसे तब मांगा जाता था जब वे मुख्य परीक्षा के चुन लिए जाते थे। 

इस बार, प्रारंभिक परीक्षा के चरण में ही अभ्यर्थियों के लिए शिक्षा, जाति और शारीरिक अक्षमता प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेजों को ऑनलाइन जमा करना अनिवार्य कर दिया गया है, जबकि पहले मुख्य परीक्षा के लिए अर्हता प्राप्त करने वाले उम्मीदवारों को दस्तावेजों को स्कैन और अपलोड करना होता था। इस प्रक्रिया के कारण अभ्यर्थियों का ‘सिरदर्द’ बढ़ गया है। 

कार्मिक मंत्रालय ने सिविल सेवा परीक्षा नियम (सीएसई), 2025 के लिए नियमों को एक दिन पहले ही अधिसूचित किया है। मंत्रालय ने इस वर्ष की परीक्षाओं के लिए 979 रिक्तियां जारी की हैं। ये रिक्तियां पिछले सालों में सबसे कम है। यह परीक्षा 23 श्रेणी की सेवाओं के लिए आयोजित की जाती है। इसमें प्रशासनिक भारतीय सेवा (आईएएस), भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) और भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) आदि शामिल होती हैं। 

बदलाव की पृष्ठभूमि

सूत्रों का कहना है कि यह बदलाव इसलिए किया गया है, क्योंकि भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) की बर्खास्त प्रोबेशनर अधिकारी पूजा खेडकर ने अतिरिक्त प्रलोभन प्राप्त करने के लिए कथित रूप से जाली पहचान पत्र तैयार किए थे। तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया था और फर्जी तरीके से निशक्तता प्रमाण-पत्र के साथ प्रस्तुत किया था। 2022 में उसका चयन भी हो गया था। नतीजतन, खेडकर ने यूपीएससी  में 12 बार शामिल हो सकती थी, जबकि उसकी श्रेणी के हिसाब से उसे नौ बार परीक्षा देने की अनुमति थी।

इस जालसाजी और अपराध का खुलासा पिछले साल जून में हुआ था, जब वह पुणे में फील्ड ट्रेनिंग के लिए तैनात थी। खेडकर को बाद में सेवा से मुक्त भी कर दिया गय था। उस पर पर आपराधिक मामले दर्ज हैं और वर्तमान में वह जमानत पर है।

सूत्रों ने बताया कि पूजा खेडकर की जालसाजी पकड़ में आने के बाद छह और चयनित अधिकारी जांच की चपेट में आ गए हैं। उनके खिलाफ भी विकलांगता मानदण्डों की दोबारा जांच की जा रही है। इसमें भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के पांच अधिकारी और भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) का एक अधिकारी शामिल है। ताजा अधिसूचना में कहा गया है कि उम्मीदवारों को ऑनलाइन आवेदन करना होगा और विभिन्न दावों के लिए आवश्यक जानकारी और समर्थित दस्तावेज जमा करने होंगे, जैसे कि जन्म तिथि, श्रेणी जैसे अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति)/ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी)/ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर अनुभाग)/निशक्कता, पूरी शैक्षणिक योग्यता  आदि। 

 जटिलता से नुकसान की आशकाएं

अधिसूचना के अनुसार पंजीकरण और ऑनलाइन आवेदन पत्र के साथ आवश्यक सूचना और दस्तावेज उपलब्ध कराने में विफल रहने पर परीक्षा के लिए उम्मीदवारी रद्द कर दी जाएगी। अब तक, ये चीजें सेवा और कैडर वरीयता मुख्य परीक्षा को पास करने के बाद प्रस्तुत करनी होती थीं। 

हो सकता है कि यह प्रक्रिया यूपीएससी के लिए उपयोगी हो, लेकिन इस जटिलता के कारण दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्र के अभ्यर्थियों की मुश्किल हो गई है। खासकर, ऐसी जगहों पर जहां इंटरनेट की पहुंच कम है या रफ्तार धीमा है। कैफे और इंटरनेट-संचालकों के पास जाकर फार्म भरने के लिए ठीकठाक शुल्क देना पड़ रहा है। पहले अभ्यर्थी अपने मोबाइल से भी आवेदन भर लेते थे। एक अभ्यर्थी की टिप्पणी थी कि इस बार तो अगर आवेदन भर ले जाऊं तो समझो चयन होने जितनी खुशी मिलेगी। माता-पिता की आमदनी से लेकर उनका पैतृक जिला आदि तक की जानकारी मांगी गई है। प्रारंभिक परीक्षा 25 मई को आयोजित होगी।  आवेदन की अंतिम तारीख 11 फरवरी बताई गई है।

(जनचौक ब्यूरो की रिपोर्ट।)

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