नई दिल्ली। कांग्रेस ने कैग रिपोर्ट को आधार बनाकर डॉ. मनमोहन सिंह सरकार पर कीचड़ उछालने वालों से सवाल किया है कि अब वे भारतमाला प्रोजेक्ट, आयुष्मान योजना और द्वारका एक्सप्रेसवे जैसी तमाम योजनाओं में कैग रिपोर्ट से उजागर हुए भ्रष्टाचार पर चुप क्यों हैं?
कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि आज से 10 साल पहले रामलीला मैदान में भांति-भांति के ठग इकट्ठा हुए, मंच पर और पूरे देश को नौटंकी करके अपने जाल में फंसाया। मीडिया 24 घंटे उसको कवरेज देता रहा… नेशन विद अन्ना, मुझे याद है हेडलाइन्स बड़ी-बड़ी, फ्लैश होती थी, जैसे कि एक बहुत बड़ा, एक जनआंदोलन बन गया, आजादी का आंदोलन बन गया और उसका आधार क्या बनाया था–उसका आधार बनाया था सीएजी रिपोर्टस को, तथाकथित 2जी, कोल को। वो तमाम आरोप पिछले 10 साल में साबित हुए कि बेबुनियाद थे, लेकिन उस रामलीला मैदान में जो भांति-भांति के ठग इकट्ठा हुए थे, कुछ उसमें से ठग नहीं भी थे, जो आज पछताते हैं कि वो रामलीला मैदान में क्यों गए थे, उस वक्त।
पवन खेड़ा ने कहा कि उन सबका मकसद एक था। उनका मकसद था कि किसी न किसी तरह से डॉ. मनमोहन सिंह की साफ छवि के ऊपर कीचड़ उछालना, यूपीए की सरकार को बदनाम करना और विनोद राय नाम का जो सबसे बड़ा ठग, जिसको मैं कहता हूं उसके द्वारा लिखी गई रिपोर्टस को आधार बनाकर ये पूरी नौटंकी हुई। अब आ जाइए आप अक्टूबर 2023 में, ये वही सीएजी, बड़ी मुश्किल से कोई रिपोर्टस निकाल पाते हैं। जो 2015 में 55 रिपोर्टस निकली थीं, 2020 में 14 रिपोर्टस निकलीं, देखिए क्या हालत हो रही है सीएजी की।
उन्होंने कहा कि 2023 में कुछ ऐसी चौंका देने वाली रिपोर्टस सामने आईं-भारतमाला प्रोजेक्ट, आयुष्मान योजना का जो प्रोजेक्ट था, उनके घपले सामने आए और हमने सोचा कि मीडिया भी 10 साल जो हुआ, वो हुआ, आखिरी के 6 महीने 24 घंटे मीडिया चलाएगा सीएजी ने जो कहा उस पर, खैर वो नहीं हुआ, शायद हमारी मूर्खता थी ये उम्मीद करना।
उन्होंने कहा कि उसके बाद लगा कि शायद रामलीला मैदान में इस बार कुछ नया होगा, लोग इकट्ठे होंगे, कोई तो गांधी टोपी पहनकर, फर्जी गांधी बनकर सामने आएगा, कुछ नहीं हुआ। ऐसी रिपोर्ट है कि आयुष्मान भारत योजना में लाखों लाभार्थी एक ही फोन नंबर से जुड़े हुए हैं, जैसे वो मिस्ड कॉल नंबर होता है न भारतीय जनता पार्टी का वैसे ही एक नंबर में 200 लोग, किसी परिवार में 200 लोग एक नंबर से जुड़े हुए। 43,000 करोड़ रुपए उन नंबरों पर लुटा दिया गया, ये सीएजी रिपोर्ट बोलती है, मैं नहीं बोल रहा हूं।
उन्होंने कहा कि भारतमाला प्रोजेक्ट में एक रुपए का जो सड़क का काम होता है, वो 14 रुपए में हुआ। आप आंकड़ा देखिए, एक रुपए का काम 14 रुपए में हो रहा है और एक किलोमीटर की सड़क को चार अलग-अलग तरीके से नापकर चार किलोमीटर बताया जा रहा है। आप धांधली भी देखिए कितनी बेशर्मी से की जा रही है। सीएजी रिपोर्ट ने अपना काम बमुश्किल से कुछ किया और सब छोड़िए, सड़क छोड़ दीजिए, आयुष्मान भारत योजना भी छोड़ दीजिए… भगवान राम के नाम पर वोट लेने वालों ने क्या किया-कि भगवान राम के घर को नहीं छोड़ा। अयोध्या विकास परियोजना में ठेकेदारों के साथ मिलकर करोड़ों रुपए का फर्जीवाड़ा। मैं एक-एक करके आपको बता रहा हूं कि क्या सीएजी रिपोर्टस में आया।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री पूरे दिन जिन बड़ी-बड़ी योजनाओं का नाम ले-लेकर प्रचार करते हैं-उड़ान, रेलवे, खादी ग्रामोद्योग, ग्रामीण विकास, कहींनहीं छोड़ा, खाऊंगा भी खिलाऊंगा भी, अगर बता दोगे तो आपको चुप भी कराऊंगा। अब क्या किया सीएजी के साथ मैं वो आपको बता दूं। तीन अधिकारी…ये रिपोर्ट के सामने आते ही, कुछ दिनों के भीतर तीनों अधिकारियों को ट्रांसफर कर दिया गया। अतूरवा सिन्हा, अब ये अतूरवा सिन्हा भारतमाला परियोजना चरण एक, सीएजी रिपोर्ट के ये प्रभारी थे, जिसमें मैंने आपको बताया एक रुपए की चीज 14 रुपए में कर दी, अब सिन्हा साहब को तुरंत हटाकर तिरुवनंतपुरम भेज दिया दिल्ली से, जाइए आराम कीजिए, बहुत काम कर लिया आपने।
नंबर दो दत्तप्रसाद सूर्यकांत शिरसा, यह आयुष्मान भारत जो जनआरोग्य योजना, प्रधानमंत्री जी ने जिसके बारे में बड़ा ढिंढोरा पीटा, उसके ये प्रभारी थे, ऑडिट के प्रभारी थे, इन्होंने भ्रष्टाचार को उजागर कर दिया, प्रधानमंत्री की प्रिय योजना के भ्रष्टाचार को। इनको भेज दिया लीगल सेल में, जाइए आप वहां देखिए, बहुत हो गया।
उन्होंने मीडिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि सीएजी रिपोर्ट आने के बाद न आप कुछ बोले, न रामलीला मैदान से कुछ आवाजें आई, न गांधी टोपियां पहनी गईं, मोदी जी को जो करना था, कर दिया। अशोक सिन्हा, ये तीसरे अधिकारी-आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना का ऑडिट इन्होंने शुरू किया था, ओरिजनली इन्होंने शुरूआत की उस ऑडिट की, इन्हें कहां भेज दिया-राजभाषा में, महानिदेशक राजभाषा कि अब आप हिंदी पढ़िए जाइए। ये हालत प्रधानमंत्री जी ने सीएजी की की। अब जो सबसे चौंकाने वाला मामला है, वो मैं आपको बताता हूं। सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि तबादला तो किया ही, अब एक ई-मेल चली गई बम्बई प्रधान महालेखाकार के कार्यालय में कि साहब एक मेल आई है, तमाम ऑडिट फील्ड रिपोर्ट रोक दिया जाए, ये रही वो मेल (पेपर को हाथ में दिखाते हुए कहा)। गला घोंटना इसको कहते हैं, इसे कहते हैं कैसे किसी संस्था का गला घोटना कि आवाज नहीं निकले, ये सीएजी की हालत की है इन्होंने।
उन्होंने पीएम मोदी से सवाल किया कि आपके नारे तो हमने बहुत सुन लिए। ये जमीनी काम, सारा फील्ड वर्क बंद करने का आदेश किसके निर्देश पर दिया गया। मुर्मू जी की जो हालत आपने कर रखी है, वो हमें मालूम है… मुर्मू जी मतलब ये वाले मुर्मू जी, वो वाले नहीं (जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल) जम्मू के राज्यपाल थे, जब उन्होंने मांग की, कि तुरंत चुनाव होने चाहिए, उन्हें हटा दिया गया। अब ये सीएजी हैं,9 महीने का कार्यकाल बचा है, इन पर किस तरह का दबाव है कि अब वो हस्ताक्षर नहीं कर रहे हैं नई रिपोर्टस पर, जब से ये रिपोर्टस आई हैं।
हम ये जानना चाहते हैं- प्रधानमंत्री जी, ये किसके निर्देश पर सीएजी का गला घोंटा जा रहा है? ये आपके निर्देश हैं या आपके छोटे भाई के निर्देश हैं, जो गृह मंत्री हैं आज कल? निर्देश किसके हैं, किसका दबाव है कि फाइलों पर हस्ताक्षर नहीं हो रहे?
हमारा दूसरा सवाल है कि जो घोटालों को उजागर करते हैं, उन सीएजी अधिकारियों का तबादला क्यों किया, इसका जवाब इस देश को दीजिए? क्या इसलिए कि वो चुपचाप जहां आप कहते हैं, वहां साईन नहीं कर रहे थे? क्या इसलिए कि उन्होंने आपको आईना दिखाया? क्या इसलिए कि आपके तथ्य, आपकी सच्चाई, आपकी हकीकत पूरे देश के सामने रख दी गई।
एक स्वायत्त संस्था पर यूं इस तरह से बुल्डोजर चलाएंगे आप और देश चुपचाप देखता रहेगा, विपक्ष चुपचाप देखता रहेगा, ये हम बर्दाश्त नहीं करेंगे। इनमें से कुछ अधिकारी तो सिर्फ कुछ महीनों के लिए थे सीएजी में और उनको हटा दिया गया। मोदी सरकार आदतन अपराधी हो गई है, संस्थाओं को खत्म करने का अपराध है।
( प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित।)
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