मंत्री विजय शाह के समर्थन में उतरी पूरी एमपी कैबिनेट, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के विपरीत रुख

‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान कर्नल सोफिया कुरैशी पर दिए गए अपने कथित विवादित बयान को लेकर घिरे जनजातीय मंत्री विजय शाह के मामले में मध्य प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर गठित एसआईटी को शाह पर मुक़दमा चलाने की मंज़ूरी देने से मना किया है।

एसआईटी ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 196(1)(ए) के प्रावधानों के तहत शाह पर मुकदमा चलाने के लिए राज्य सरकार से मंजूरी मांगी थी, लेकिन मध्य प्रदेश मंत्रिमंडल ने इस मुद्दे पर गुप्त रूप से फैसला लिया और अनुरोध को ठुकरा दिया।

मंगलवार की कैबिनेट बैठक खत्म होने के बाद एक गुप्त और रणनीतिक सत्र चलाया गया। बैठक कक्ष से मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, सीएम के अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, गृह विभाग के एसीएस संजय शुक्ला, जीएडी के एसीएस शिवशेखर शुक्ला और लॉ सचिव मुकेश कुमार, इन 5 वरिष्ठ अधिकारियों को छोड़कर बाकी सभी अधिकारियों को बाहर भेज दिया गया।

इसके बाद एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर मंत्री विजय शाह को कक्ष में बुलाया गया, जहां उन्होंने मंत्रियों के सामने अपनी सफाई पेश की। सफाई देने के बाद शाह को कक्ष से बाहर कर दिया गया और उनके बाहर खड़े रहने के दौरान करीब पौन घंटे तक कानूनी पहलुओं और उन्हें बचाने के तर्कों पर गहन चर्चा हुई। अंततः यह सहमति बनी कि विजय शाह पर केस चलाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि शाह पहले ही उस टिप्पणी के लिए तीन बार माफी मांग चुके हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि कैबिनेट ने उन पर मुकदमा चलाने की अनुमति न देने का फैसला किया, और कैबिनेट के सभी सदस्यों ने इस फैसले का समर्थन किया।

कैबिनेट बैठक के दौरान अधिकांश मंत्रियों का यह तर्क था कि मंत्री विजय शाह अपने बयान के बाद सार्वजनिक रूप से तीन-चार बार माफी मांग चुके हैं, इसलिए अब इस मामले को आगे बढ़ाने का कोई औचित्य नहीं बनता। एसआईटी की रिपोर्ट कैबिनेट के सामने रखने से पहले सरकार ने अटॉर्नी जनरल की कानूनी राय भी ली थी।

भारतीय न्याय संहिता की धारा 196 (सांप्रदायिक नफरत, दुर्भावना को बढ़ावा देना) के तहत अपराध का संज्ञान लेने के लिए कोर्ट को मुकदमा चलाने की मंजूरी की आवश्यकता होती है।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एसआईटी ने पहले ही अपनी जांच पूरी कर अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर दी थी और शाह पर मुकदमा चलाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार की मंजूरी का इंतजार कर रही थी। शाह ने कर्नल कुरैशी के ख़िलाफ़ अपमानजनक और सांप्रदायिक टिप्पणी की थी। कर्नल कुरैशी, विंग कमांडर व्योमिका सिंह के साथ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की प्रेस ब्रीफ़िंग में शामिल प्रमुख चेहरों में से एक थीं।

शाह ने कहा था, “जिन्होंने हमारी बेटियों के सिंदूर उजाड़े थे… हमने उनकी बहन भेजकर उनकी ऐसी-तैसी करवा दी।” उन्होंने कम से कम तीन बार यह बात दोहराई कि मोदीजी ने उनके समुदाय की बहन को उन्हें बर्बाद करने के लिए भेजा था।

मामले में 31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है, जहां राज्य सरकार को हलफनामा देकर यह बताना है कि एसआईटी की ओर से केस चलाने की मंजूरी मांगे जाने पर उसने क्या कदम उठाया है।

(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और कानूनी मामलों के जानकार हैं।)

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