10 जून मोदी, भाजपा और देशवासियों के लिए एक ऐसा दिन लेकर आया जिसने नेहरू जी के कार्यकाल को पछाड़ कर मोदीजी को आगे कर दिया है। वाकई ये बड़ी बात होगी। अभी तो उन्हें 2047 में भारत को बहुत आगे ले जाना है। इसलिए वे रास्ते में बाधक सभी विरोधियों को भाजपा में प्रवेश दिलाने प्रतिबद्ध हैं।
हाल ही में उन्होंने तृणमूल को समाप्त करने की, सांसद खरीदने की जो त्वरित पहल की है वह काबिले गौर है। अभी कुछ दिनों पहले ही तो उन्होंने आम आदमी पार्टी को इसी तरह क्षति पहुंचाकर उसे जीर्ण-शीर्ण कर दिया था। इसी तरह होने जा रहे राज्य सभा के चुनाव में उन्होंने मध्यप्रदेश से एकमात्र कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का फ़ार्म जिस तरह निरस्त कराया है वह भी इसी कड़ी का हिस्सा है।
नेहरू जी के समय में तो विधानसभाओं की सीट से कितने किस दल से लोग आएंगे तय हो जाता था किन्तु अब मोदीजी इतने आगे निकल गए हैं कि वे विरोधियों के कदम रोकने में समर्थ हैं।
नेहरू जी का लोकसभा में उस समय जो भारी बहुमत था उसे लेकर वे परेशान रहते थे उन्होंने अटल जी को प्रतिपक्ष नेता बनाने की मशक्कत की तथा कभी कभी छद्म नाम से अपनी सरकार की आलोचना और खामियां अखबार में लिखते रहे ताकि लोकतंत्र सही तरीके से कायम रहे। ये उनकी गलती थी जिसका खामियाजा मोदीजी को भुगतना पड़ रहा है इसलिए जब मोदीजी ने अपना पहला चुनाव पीएम के लिए लड़ा तो उन्होंने विपक्ष मुक्त सरकार का आव्हान किया।
सच भी है विरोधियों के रहते देश तरक्की नहीं कर सकता है।उनके सवाल जवाब में क्यों उलझना।प्रेस कॉन्फ्रेंस भी इसलिए वे नहीं करते। देश के विकास में मौन होकर काम किया जाए यह मायने रखता है।
स्वायत्त संस्थाओं जैसे सुप्रीम कोर्ट, चुनाव आयोग, ईडी, सीबीआई वगैरह को अपने अनुरूप ढालकर देश में सुशासन लाने की उन्होंने पुरजोर कोशिश की है। शिक्षा संस्थानों में ऐसी शिक्षा की व्यवस्था की गई जिससे विद्वान नहीं बल्कि संस्कारी विद्यार्थी बनाए जो एक आवाज़ में विरोधी स्वर को कुचलने का माद्दा रखते हों।
उन्होंने अपनै मंत्रीमंडल में सिर्फ अपने अलावा मोटाभाई को पावरफुल बनाया। काम ज़्यादा में बंटेगा तो भ्रष्टाचार कम होगा। नाम के मंत्री और काम मोदी-शाह का। नेहरू के मन में ऐसा महान विचार नहीं आया। इसलिए कांग्रेस शासन में भ्रष्टाचार बढ़ा जिसे हटाने अन्ना हजारे को लाना पड़ा।
आजकल विपक्ष नीट परीक्षा और अन्य परीक्षा की खामियों को लेकर आंदोलन कर रहा था जिससे प्रतिपक्ष नेता राहुल गांधी के उबरने का ख़तरा देख अपने माई फ्रेंड से आयातित काक्रोच को लाया गया है। जिसने काम करना शुरू कर दिया। युवाओं को संगठित कर रहा है। नेहरू जी क्या ऐसा कर सकते थे? वाकई मोदीजी उनसे बहुत आगे चल रहे हैं।
नेहरू जी ने सारा समय देश में विभिन्न बड़े संस्थानों को खोलने और देश को आत्मनिर्भर करने में लगाया इससे युवा सरकार से रोजगार मांगने लगे। उनकी आदत खराब हो गई मोदीजी ने उन्हें आत्मनिर्भर रहने का गुरु मंत्र पकड़ा दिया वे समझ गए रोजगार नहीं है इसलिए विपक्ष के खिलाफ लड़ने का प्रशिक्षण लेने लगे कभी राम मंदिर,कभी लव-जिहाद, गौमांस,कभी घुसपैठिए हटाने, मस्जिद पर भगवा फहराने, और सरकार के खिलाफ बोलने वालों को सुधारने के काम में लग गए।
नेहरू जी के समय का चौथा स्तम्भ भी ढहा दिया गया है जो है गोदी मीडिया है जो सरकार की तारीफ के लिए है और बदले में विज्ञापन सुख से धन्य हो जाते हैं।अब सरकार की आलोचना अखबार आकाशवाणी और दूरदर्शन के साथ अन्य चैनल्स में गूंजती रहती है। वाकई सरकार की जीवंतता और मनोबल बनाए रखने के लिए यह बहुत ज़रूरी है।
नेहरू जी ने जहां अपने दैश में उद्योग स्थापित किए वहीं मोदीजी ने ऐसे मात्र दो उद्योग पति बनाए जिन्होंने दुनिया के बहुत से देशों में अपने बड़े कारोबार खोलें हैं जो देश को गौरवान्वित कर रहे हैं।
इधर काम करने की बजाय मोदीजी ने आम जनता को रिझाकर जितनी लोकप्रियता और वोट चंद रेवड़ियां मसलन राशन, लाड़ली बहना, उज्जवला योजना, तीर्थाटन, किसान को त्रैमासिक भुगतान वगैरह के साथ जिस मनोबल से झूठ का परचम लहराया है। अपराधियों को संरक्षण दिया।शत्रु देश अमरीका, इज़राइल जैसे कथित दुष्ट देशों से हाथ मिलाया है वह सराहनीय है क्योंकि आज के दौर में शातिर, बदमाश और हत्यारों का ही वर्चस्व है।इन तमाम ज़रुरी क्षेत्रों में आगे बढ़ना एक कठिन काम था। इसके लिए उनकी प्रशंसा होनी ही चाहिए। उम्मीद है,आपकी उम्र बहुत लंबी हो ।सत्ता में रहने का विश्व में कीर्तिमान बनाएं। वाकई आप नेहरू जी बहुत आगे हैं।
(सुसंस्कृति परिहार एक्टिविस्ट और टिप्पणीकार हैं।)