Wednesday, October 27, 2021

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सावरकर के बचाव में आ रहे अनर्गल तर्कों और झूठ का पर्दाफाश करना बेहद जरूरी

एबीपी न्यूज पर एक डिबेट के दौरान एंकर रुबिका लियाकत ने यह सवाल पूछा कि, कांग्रेस के कितने नेताओं को कालापानी की सज़ा मिली थी ? इसके उत्तर में कांग्रेस के प्रवक्ता ने गांधी, नेहरू की जेल यात्राओं के...

जेपी-लोहिया की विरासत को मजबूती देता किसान आंदोलन

आज समाजवादी चिंतक, प्रखर सांसद, सप्तक्रांति विचार को प्रतिपादित करने वाले,पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु की गद्दी को झकझोर देने वाले डॉ.राम मनोहर लोहिया की 54 वीं पुण्यतिथि है। कल 11 अक्टूबर को लोकनायक जयप्रकाश नारायण की 119 वी जयंती...

आइडिया ऑफ इंडिया की रीढ़ थे मौलाना अबुल कलाम आज़ाद

मौलाना आज़ाद के विचार और उनका लेखन सबसे कठिन होता है धार्मिक कट्टरता और धर्मान्धता से उबल रहे समाज में, सेक्युलर सोच या सर्वधर्म समभाव के, सार्वभौम और सनातन मूल्यों को बचाये रखना, उन पर टिके रहना और उनके पक्ष...

लाहौर जेल में भगत सिंह की नेहरू से मुलाकात

हम एक बेशुमार गढ़े जा रहे झूठ और गोएबेलिज़्म के दौर से गुजर रहे हैं। इस दौर में इतिहास की नयी नयी व्याख्या की जा रही है, या कहें, नयी नयी व्याख्यायें गढ़ी जा रही हैं। चाहे प्राचीन भारतीय...

विभाजन की विभीषिका को क्यों याद करें हम?

भारत का बंटवारा 20 वीं सदी की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक था। बंटवारे के दौरान जितनी बड़ी संख्या में लोगों की जानें गईं और जिस बड़े पैमाने पर उन्हें अपने घर-गांव छोड़कर सैकड़ों मील दूर अनजान स्थानों...

जन्मदिन पर विशेष: राजीव गांधी ने बनायी थी आधुनिक भारत के मकान की एक मंजिल

राजनीति निर्मम होती है। बेहद लोकप्रिय, सरल और सौम्य व्यक्ति भी कब आक्षेपों के थपेड़े में आ जाय कहा नहीं जा सकता है। 31 अक्टूबर 1984 को जब इंदिरा गांधी की अपने ही अतिसुरक्षित आवास में अपने ही सुरक्षा...

अफगानिस्तान की कहानी नेहरू की जुबानी

सन् 1919 को अफगानिस्तान औपचारिक तौर पर ब्रिटिश शासन के चंगुल से मुक्त हुआ था। 19 अगस्त अफगानिस्तान अपनी स्वाधीनता दिवस मनाता है। इस संदर्भ में अपनी किताब विश्व इतिहास की झलक में जवाहर लाल नेहरू लिखते हैं कि...

स्वतंत्र भारतः अधूरे सपनों का ख्वाबगाह

औपनिवेशिक शासन से भारत की मुक्ति के बाद देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने स्वाधीनता आंदोलन के नेताओं के सपनों और आकांक्षाओं का अत्यंत सारगर्भित वर्णन अपने प्रसिद्ध भाषण 'ए ट्रिस्ट विथ डेस्टिनी' में किया था। उन्होंने कहा...

छत्रपति शिवाजी एयरपोर्ट का नाम बदलना अडानी को पड़ा भारी

सन् 2014 के बाद का समय अपने एक खास किस्म के बदलाव की ओर अग्रसर रहा है इस दौरान नीति आयोग के नामकरण के बाद से अनेक नगरों, स्टेशनों, हवाईअड्डों यहां तक कि गली कूचों तथा चौराहों के नाम...

राजनीति की पवित्रता

सिविल सोसाइटी की अहमियत राजनीतिक दलों से ऊपर है। अन्य देशों में इसे प्रेशर ग्रुप के नाम से लोकतंत्र का सबसे प्रभावशाली टूल माना गया है। राजनीतिक दल अपनी नीतियां घोषित करते हैं तथा सरकार मिलने पर उन नीतियों...
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सुप्रीम कोर्ट में लखीमपुर केस : रैली में थे सैकड़ों किसान लेकिन चश्मदीद गवाह बने महज 23

उच्चतम न्यायालय में लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में कल चीफ जस्टिस एनवी रमना, जस्टिससूर्यकांत और जस्टिस हिमा कोहली की...
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