दुनिया के सबसे अमीर इंसान एलन मस्क भी राजनीतिक रूप से सबसे ताकतवर लोगों में से एक बनने की कोशिश में जुटे हुए हैं। सोशल मीडिया में व्यंग्यात्मक कटाक्ष में ट्रंप को नहीं बल्कि उन्हें ही वास्तविक अमेरिकी राष्ट्रपति कहा जा रहा है। व्यंग्य को यदि परे हटा दें तो भी यह बात कोई बे-सिरपैर की व्याख्या नहीं है।
हकीकत तो यह है कि 20 जनवरी 2025 को ट्रम्प के कार्यालय संभालने से पहले ही, एलन मस्क ने संयुक्त राज्य अमेरिका में नई सत्ता की कमान संभालनी शुरू कर दी है। एक दिन वे ट्रंप के खेमे की प्रतिक्रिया के साथ सामने आते हैं, जिसमें भीड़ भरे बाजार में अपनी कार घुसाकर कम से कम 5 लोगों की हत्या करने के आरोपी को सऊदी अरब को प्रत्यर्पित नहीं करने के जर्मनी के फैसले की औपचारिक निंदा की जाती है।
और इसके अगले दिन, वे ट्रम्प के द्वारा अपने सहयोगी को वित्त सचिव के रूप में नियुक्त करवाने में सफल हो जाते हैं।
ट्रम्प के संकटमोचक के तौर पर उभरे हैं एलन मस्क
ट्रम्प के राष्ट्रपति पद के लिए चुनावी अभियान में सबसे प्रमुख फाइनेंसर होने के नाते, वर्तमान में एलन मस्क नई सत्ता व्यवस्था में सबसे ताकतवर आवाज बनकर उभरे हैं।
अभी तक नए राष्ट्रपति सत्ता पदानुक्रम में किसी भी औपचारिक पद से न नवाजे जाने के बावजूद, यह एलन मस्क ही हैं जो आने वाले ट्रम्प प्रशासन के कई प्रमुख नीतिगत पदों को स्वतंत्र रूप से परिभाषित और अभिव्यक्त कर रहे हैं। अक्सर उनकी आवाज ट्रंप पर भी भारी पड़ जाती है। उनकी भूमिका सिर्फ राय व्यक्त करने तक ही सीमित नहीं है।
एलन मस्क कहीं न कहीं ट्रम्प के लिए प्रमुख राजनीतिक फिक्सर और संकटमोचक बनकर उभरे हैं। हाल ही में, जब रिपब्लिकन सांसदों का एक बड़ा हिस्सा ट्रम्प-समर्थित द्विदलीय खर्च बिल का विरोध करने के लिए डेमोक्रेट के बहुमत में शामिल हो गया था।
जिससे सरकारी शटडाउन की स्थिति पैदा हो गई थी, तो यह एलन मस्क ही थे जिन्होंने आसन्न शटडाउन से बमुश्किल कुछ घंटे पहले विधेयक पारित होता, उससे पहले कई रिपब्लिकन सीनेटरों को अपने पाले में आने के लिए मजबूर कर दिया।
ट्रम्प को एलन मस्क की जरूरत क्यों है?
यह कोई एक बार की सनसनीखेज घटना नहीं हो सकती। हालांकि ट्रम्प को अमेरिकी प्रतिनिधि सभा और सीनेट दोनों में बहुमत हासिल है, लेकिन यह बहुमत बेहद छोटा है।
रिपब्लिकन खेमे में ही ट्रंप के कई आलोचक मौजूद हैं। इसलिए, कांग्रेस के भीतर मौजूद संख्या अभी भी ट्रम्प के खिलाफ है, और उन्हें आवश्यक विधायी कामकाज को सुचारू ढंग से चलाने के लिए द्विदलीय प्रयासों पर समझौता करना पड़ सकता है, और उन्हें अपनी विधायी पहल के समर्थन में सभी असंतुष्ट रिपब्लिकन को एकजुट करने के लिए एक मजबूत समस्या का समाधान करने वाले की सख्त आवश्यकता है। एलन मस्क अपने अपार धन-दौलत के साथ इस कमी को पूरा करने में सक्षम हैं।
ट्रम्प की प्रो-बिजनेस रणनीति में एलन मस्क कैसे फिट बैठते हैं?
ट्रम्प का एजेंडा बड़े पैमाने पर कॉर्पोरेट और बिग बिजनेस समर्थक का रहा है। इसका एक प्रमुख घटक है टैक्स कटौती को लेकर उनका प्रस्ताव। कॉर्पोरेट टैक्स, जो कि पूर्व में 35% तक था, उसे 2018 में घटाकर 21% कर दिया गया और अब ट्रम्प इसे और घटाकर 15% तक पहुंचा देना चाहते हैं।
60,000 डॉलर प्रति माह या इससे ज्यादा कमाने वाला एक संपन्न अमेरिकी परिवार अब 37% आयकर का भुगतान करता है, और ट्रम्प ने इसे 24% तक लाने का वादा किया है, जो कि इसे 30,000 डॉलर प्रति माह स्लैब वाले एक मध्यमवर्गीय परिवार की श्रेणी में ला खड़ा कर देता है।
ऐतिहासिक साक्ष्यों के विपरीत, ट्रम्प का इस बारे में तर्क है कि इससे खर्च योग्य आय में वृद्धि होगी और इस प्रकार नए निवेश और रोजगार सृजन में मदद मिलेगी। तात्कालिक एवं मध्यम अवधि में देखें तो इसके परिणामस्वरूप राजस्व प्रवाह में बड़ी कटौती होगी और नतीजतन सरकारी खर्च में भारी कटौती की जाएगी।
कल्याणकारी योजनाओं और सामाजिक खर्च को इससे सबसे अधिक नुकसान होगा। अपने सत्ता वितरण के केंद्र में एलन मस्क के साथ, ट्रम्प को अपनी कॉर्पोरेट समर्थक, व्यवसाय समर्थक छवि को मजबूत करने की उम्मीद है।
व्यापार सुधारों के बारे में ट्रम्प की थोथी बयानबाजी में चीन, भारत और लैटिन अमेरिका और यहां तक कि कनाडा और यूरोप से आयात पर उच्च शुल्क शामिल है। अमेरिकी उपभोक्ताओं को इन उच्च टैरिफ से उत्पन्न होने वाली मुद्रास्फीति का बोझ सहना होगा।
यदि ये देश भी अमेरिकी निर्यात के खिलाफ समान रूप से जवाबी कार्रवाई करने का फैसला ले लेते हैं, तो इसके नतीजे में जो व्यापार युद्ध छिड़ेगा, उसके चलते कई अमेरिकी नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं, हालांकि, विडंबना की बात यह है कि अमेरिकी नौकरियों की सुरक्षा ट्रम्प के संरक्षणवाद का घोषित बिंदु रहा है।
उनकी नीतियों का एक अन्य प्रमुख घटक है डी-रेगुलेशन-ऊर्जा, वित्त और स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्रों को डी-रेगुलेट करने में इसे देखा जा रहा है।
जलवायु परिवर्तन को लेकर संशयवादी ट्रम्प के तहत ऊर्जा नीतियों में परिवर्तन सिर्फ अमेरिका के नेट-जीरो उत्सर्जन में संक्रमण को विलंबित ही कर सकता है, और यह ट्रम्प को प्रगतिशील जनमत, विशेषकर युवाओं की राय से अलग-थलग ही करेगा।
कोविड-19 महामारी के दौरान इसकी भारी कीमत चुकाकर सीखे गए सबक के बावजूद, ट्रम्प अपनी सरकार को स्वास्थ्य सेवाओं से पूरी तरह से अलग करना चाहते हैं और इसका पूरी तरह से निजीकरण करने के पक्ष में हैं।
हालांकि, ट्रम्प के नए सुधार एजेंडे का सबसे कठिन हिस्सा सरकार के आमूलचूल परिवर्तन में छिपा है। अपने चुनावी अभियान के दौरान ट्रम्प ने अमेरिकी सरकार की नौकरशाही में बड़े पैमाने पर कटौती का वादा किया था, जिसमें संघीय एजेंसियों के आकार और दायरे/पहुंच में भारी कमी लाने की बात शामिल थी।
नौकरशाही के साथ थोड़ी-बहुत छेड़छाड़ ही नहीं, ट्रम्प ने सरकार के पूरी तरह से पुनर्निर्माण तक का वादा किया था, जिसका आशय सरकारी नौकरशाही के पूर्ण कायाकल्प में ही संभव है।
अभी तक, ट्रम्प ने चुनावी अभियान के भाषणों को यदि देखें तो मोटे तौर पर जिन विचारों को रेखांकित किया जा सकता है, उससे यह स्पष्ट नजर आता है कि सरकारी विभागों और एजेंसियों में बड़े पैमाने पर फेरबदल किया जाना तय है, और कई पदों और यहां तक कि पूरी सरकारी एजेंसियों तक को बंद किया जा सकता है।
ट्रम्प ने अमेरिकी सिविल सेवाओं में बड़े पैमाने पर शुद्धिकरण का भी संकेत दिया है। यह जड़ जमा चुकी नौकरशाही के खिलाफ एक आभासी युद्ध की घोषणा करने जैसा है। यहां पर एलन मस्क की भूमिका सामने आती है।
एलन मस्क न केवल एक छाया कैबिनेट के प्रमुख के रूप में कार्य कर रहे हैं, बल्कि वे प्रमुख नियुक्तियों और नीतिगत बयानों के लिए ट्रम्प के वफादारों या अपने स्वयं के सहयोगियों को चुनने का काम करते देखे जा सकते हैं। नए प्रशासन को आकार देने में उनके अब तक के संविधानेत्तर अधिकार को संवैधानिक मंजूरी देते हुए औपचारिक रूप से संस्थागत बनाया जा रहा है।
DOGE एक सुप्रा-कैबिनेट
राष्ट्रपति पद के लिए ट्रम्प की जीत के फौरन बाद एलन मस्क ने नवंबर 2024 में DOGE नामक एक पहल को शुरू करने के लिए एक घोषित प्रतिक्रियावादी दक्षिणपंथी योद्धा विवेक रामास्वामी के साथ हाथ मिला लिया, जो राष्ट्रपति पद की दौड़ में भी शामिल थे।
DOGE (Department of Government Efficiency) नामक सरकारी विभाग को ट्रंप के 20 जनवरी 2025 के दिन राष्ट्रपति पद की शपथ लेने से पहले ही एक सरकारी विभाग के रूप में घोषणा का आशय?
जी हां। वर्तमान में, यह एक छाया कैबिनेट विभाग के रूप में बना हुआ है, और ट्रम्प के राष्ट्रपति पद संभालने के बाद एक नियमित सरकारी अंग के रूप में इसकी भूमिका औपचारिक हो जाएगी।
यह DOGE मूल रूप से ट्रम्प द्वारा अपने पिछले कार्यकाल के दौरान प्रस्तावित किया गया था, और इस विचार को बाद में राष्ट्रपति बाइडेन से भी द्विदलीय समर्थन हासिल हुआ। औपचारिक तौर पर इसे नवंबर 2024 में लॉन्च किया गया था।
टेस्ला और स्पेस-X के सीईओ एलन मस्क और इस DOGE की कमान संभालने वाले टेक्नोक्रेट व्यवसायी विवेक रामास्वामी पहले ही इस संदर्भ में एक औपचारिक बैठक कर चुके हैं।
6 दिसंबर, 2024 को मस्क और रामास्वामी ने कैपिटल हिल में सांसदों के साथ अपनी योजनाओं पर चर्चा करते हुए सरकारी कार्यों में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया था। यद्यपि प्रकट रूप से इसका उद्देश्य शासन में नवीन विचारों को लाना है, लेकिन असल में इसका उद्देश्य नौकरशाही में कांट-छांट करने का है।
अनिश्चितताओं के बादल
यह सही है कि मस्क और रामास्वामी को अपने व्यावसायिक उद्यमों में उल्लेखनीय सफलता हासिल है, लेकिन क्या उनकी कॉर्पोरेट विशेषज्ञता नौकरशाही को फिर से जीवंत करने में मदद कर सकती है, जो हर जगह पूरी तरह से एक छिपी हुई संरचना है?
पहले से ही इस बारे में चर्चा का बाज़ार गर्म है कि मस्क और रामास्वामी नौकरशाही में दक्षता बढ़ाने के लिए नई तकनीक को लेकर आने वाले हैं।
हालांकि, अभी तक इस बारे में कोई ठोस विचार सामने नहीं आ पाए हैं कि ये नई तकनीकें क्या हैं और ये कैसे काम करेंगी। ऐसा जान पड़ता है कि अक्षम नौकरशाही की छवि बदलने के उद्देश्य से कुछ तकनीकी मिथक गढ़े जा रहे हैं। हालांकि, ट्रम्प प्रशासन में एक विभाग के रूप में DOGE को औपचारिक बनाने के लिए विधायी कार्रवाई की आवश्यकता होगी।
जड़ जमाए नौकरशाह भी हर कदम पर इसके हस्तक्षेप के सामने रोड़ा बनकर सामने आयेंगे। इसके कुछ घोषित उद्देश्य, जैसे कि सरकार में करीब एक हजार शीर्ष पदों को खत्म करना, बेहद विवादास्पद हैं और एक पूर्ण नवउदारवादी शासन में भी, यह सब कहना जितना आसान है, उसे अंजाम दे पाना उतना आसान नहीं है।
हालांकि DOGE अभी तक पूर्ण रूप से संचालन में आ चुके सरकारी विभाग के रूप में अस्तित्व में नहीं है, लेकिन इसने अपना परिचालन पहले ही शुरू कर दिया है, और राजनीतिक नेताओं और नौकरशाहों के साथ “अर्थहीन विभागों को खत्म करने” को लेकर चर्चा हो रही है।
यह पहल अमेरिकी मीडिया में पहले से ही काफी विवादास्पद हो चुकी है, और पूरी संभावना है कि एक बड़ी राजनीतिक और नौकरशाही प्रतिक्रिया या विवाद देखने को मिल सकता है। इतने बड़े संघर्ष की पृष्ठभूमि में, DOGE की “छाया सरकार” वाली संरचना से सरकार के औपचारिक उच्च-शक्ति वाले विंग में परिवर्तन कई जटिलताओं और अनिश्चितताओं से भरा है।
दुनिया की सबसे शक्तिशाली नौकरशाही में आमूल-चूल परिवर्तन करने के लिए तैयार किए गए ऐसे अति-नौकरशाही निकाय की शक्ति और उसके कार्यों ने पहले से ही इसकी पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बहुत संभव है कि ट्रम्प ने नौकरशाही के खिलाफ लोकप्रिय भावनाओं को आकर्षित करने के लिए दक्षिणपंथी लोकलुभावन प्रलोभन के रूप में इस विचार को परिकल्पित किया हो।
लेकिन ट्रम्प को अपने पसंदीदा प्रोजेक्टस को, जब वे अव्यावहारिक साबित हो जाते हैं तो उन्हें बिना किसी हील-हुज्जत के तत्काल परे कर देने के लिए भी जाना जाता है। यहां पर देखना होगा कि क्या एलन मस्क पूरी दृढ़ता के साथ खड़े रहते हैं और नौकरशाही के खिलाफ अपनी जंग में इस बड़ी लड़ाई को जीतने में सफल रहते हैं।
व्यवसायी राजनीतिक नेता के रूप में
ट्रम्प सरकार के भीतर एलन मस्क के प्रभुत्व और ताकत ने पहले से ही राजनीति में उनकी प्रत्यक्ष भूमिका निभाने और प्रत्यक्ष राजनीतिक शक्ति का उपयोग करने वाले कॉर्पोरेट दिग्गजों के बारे में सवाल खड़े कर दिए हैं।
अमेरिकी पूंजीवाद के इतिहास में इससे पहले एंड्रयू कार्नेगी, जॉन डी. रॉकफेलर, हेनरी फोर्ड और जेपी मॉर्गन जैसे उद्योग जगत के नामचीन हस्तियों ने विभिन्न अमेरिकी राष्ट्रपतियों, विशेषकर रूजवेल्ट के साथ मिलकर काम किया है, और अनौपचारिक सलाहकार के तौर पर शासन में अपनी भूमिका निभाई है, हालांकि, यह सब बिना किसी औपचारिक राजनीतिक या सरकारी भूमिका के बगैर किया गया।
उनके द्वारा सरकारी संरचना में औपचारिक हिस्सा लिए बिना भी सरकार को नीतिगत इनपुट देने के लिए थिंक टैंक के रूप में फाउंडेशन तक स्थापित किए गये।
उद्योग जगत के दिग्गजों के लिए चुनावी लोकतंत्र में सरकार में औपचारिक भूमिका के निर्वहन को अस्थिर माना जाता रहा है, ताकि कहीं ऐसा न हो कि ‘हितों के टकराव’ को लेकर विवाद खड़ा हो जाये।
हालांकि, प्रशिया की तरह यूरोप में सत्तावादी शासन में, प्रमुख उद्योगपति और व्यवसायी वित्त मंत्री सहित मंत्री बनाये गए हैं। कई राजनीतिज्ञों के पास अकूत धन-संपत्ति थी और उन्होंने भारी निवेश किया था। लेकिन वे कभी भी पूर्णकालिक व्यवसायी नहीं बने। ट्रम्प इस संबंध में अग्रणी थे, जो बिजनेसमैन रहते हुए ही राष्ट्रपति बनने में सफल रहे।
ट्रम्प का दोहरा मापदंड
राष्ट्रपति पद की शपथ लेते समय ट्रंप ने इस बात का भी वादा किया था कि वे अपने निजी विदेशी व्यापारिक सौदे को रोक देंगे। उस प्रतिज्ञा के बावजूद, उन्होंने व्हाइट हाउस से अभयदान हासिल करते हुए अपने विदेशी व्यापार सौदे को जारी रखा था और कथित तौर पर उनके कार्यकाल के दौरान उनकी कंपनियों को विदेशी संस्थाओं से 7.8 मिलियन डॉलर का मुनाफा हुआ था।
व्यवसाय और राजनीति में नैतिकता के ऐसे मानकों के साथ, कोई आश्चर्य नहीं कि ट्रम्प ने अपने प्रशासन में एक प्रमुख भूमिका निभाने के लिए एलन मस्क को शामिल करने का विकल्प चुना। और साथ ही, यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि महत्वाकांक्षी एलन मस्क ने ऐसे मौके को झट से लपक लिया।
एलन मस्क के जद्दोजहद की वजह
एक और वजह भी है जिसके चलते एलन मस्क राजनीतिक सत्ता के करीब रहना चाहते हैं। हम सभी जानते हैं कि एलन मस्क के स्टारलिंक इंटरनेट नेटवर्क ने यूक्रेन युद्ध में प्रमुख भूमिका निभाई थी। युद्ध शुरू होते ही रूस ने यूक्रेन के इंटरनेट नेटवर्क को निशाना बनाया और उसे ध्वस्त कर दिया था।
इंटरनेट न होने की वजह से यूक्रेन को अपने युद्ध प्रयासों में भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था, क्योंकि आधुनिक युद्ध में सैन्य आपूर्ति के समन्वय से लेकर मिसाइलों के प्रक्षेपण और रडार रक्षा प्रणालियों के कामकाज तक सब कुछ इंटरनेट पर निर्भर है।
एलन मस्क ने यूक्रेन के बचाव में आने का फैसला लिया और युद्ध के प्रयासों को जारी रखने के लिए यूक्रेन को स्पेस-X की स्टारलिंक उपग्रह सेवाओं की पेशकश की थी। हालांकि, मस्क ने अचानक से पलटी मारते हुए रूस द्वारा फिर से कब्ज़ाए क्रीमिया में स्टारलिंक सेवाएं देने से इंकार कर दिया था।
कुछ अन्य विवाद भी उठे क्योंकि ऐसी खबरें थीं कि रूसी सैनिकों ने भी यूक्रेनी लक्ष्यों पर हमला करने के लिए उसी स्टारलिंक का इस्तेमाल किया था। वे पासवर्ड प्राप्त करने में कैसे कामयाब रहे यह अभी भी एक रहस्य बना हुआ है! उम्मीद है, एलन मस्क की सत्ता से निकटता उन्हें देशद्रोह के आरोप से बचा लेगी!
इसके अलावा, एलन मस्क को चीन से एक और कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। मस्क का स्पेस-X उपग्रह नेटवर्क 7589 उपग्रहों पर आधारित है, जिनमें से अब केवल लगभग 6100 उपग्रह ही काम कर रहे हैं।
दूसरी तरफ, चीन अपने क़्लानफ़ान, गुओ वांग और होंगहु-3 परियोजनाओं के तहत 38,000 उपग्रह लॉन्च करने की पेशकश कर रहा है, और इससे इंटरनेट सेवाओं की सस्ती पेशकश के चलते एलन मस्क के स्पेसए-X नेटवर्क को कड़ी चुनौती मिलने वाली है। चीन पहले से ही अफ़्रीका में 70% इंटरनेट सेवाएं प्रदान कर रहा है।
इतना ही नहीं, चीनी इलेक्ट्रिक वाहन कंपनियां न केवल चीनी बाजार में, बल्कि अमेरिकी और यूरोपीय बाजारों में भी टेस्ला को कड़ी टक्कर दे रही हैं।
ट्रंप पहले से ही चीन के खिलाफ आक्रामक रुख अपना रहे हैं। एलन मस्क को उम्मीद है कि हुआवेई जैसे चीनी प्रतिस्पर्धियों को अमेरिका में इंटरनेट सेवाएं प्रदान करने से रोकने के लिए ट्रम्प से मदद मिलेगी। ट्रंप के साथ-साथ एलन मस्क भी आर्थिक राष्ट्रवाद का चोला धारण कर सकते हैं। निश्चित रूप से एलन मस्क के राजनीतिक रुख के पीछे ये सभी कारक भी काम कर रहे होंगे।
इस बात की पूरी संभावना है कि ट्रम्प और एलन मस्क दोनों एक ही डाल के पंछी हो सकते हैं। लेकिन विश्व की सबसे शक्तिशाली सरकार में द्विध्रुवीयता लंबे समय तक जारी नहीं रह सकती। देर-सबेर ट्रंप को मस्क के पंख कतरने ही होंगे। अमेरिकी सत्ता संरचना के शीर्ष पर इन दो दिग्गजों के टकराव के अकल्पनीय परिणाम देखने को मिल सकते हैं।
आज नहीं तो कल, इस आतिशबाजी का इंतजार रहेगा!
ट्रम्प खेमे में नया विभाजन- इसके एक छोर पर हैं एलन मस्क
ट्रम्प के पदभार ग्रहण करने से पहले ही ट्रम्प के खेमे में विदेशी, खास तौर पर भारतीय, तकनीकी कर्मचारियों के अमेरिका में आने पर रोक लगाने के मुद्दे पर नया विभाजन देखने को मिल रहा है।
ट्रम्प के समर्थकों का एक धड़ा स्थानीय कर्मचारियों को रोजगार अधिक मुहैया कराने के लिए इस पर पूर्ण प्रतिबंध के पक्ष में है। वे भारतीय तकनीकी कर्मचारियों को जारी किए जाने वाले H1B वीजा का भी विरोध कर रहे हैं।
ट्रम्प खेमे में ऐसी कई प्रमुख हस्तियाँ हैं जो विदेशी तकनीकी कर्मचारियों की आवक के खिलाफ हैं। उनमें से प्रमुख हैं: स्टीफन मिलर जो राष्ट्रपति के तौर पर डोनाल्ड ट्रम्प के पिछले कार्यकाल के दौरान वरिष्ठ सलाहकार के रूप में कार्यरत थे और जिन्होंने विदेशी कर्मचारी कार्यक्रमों के विस्तार के खिलाफ लगातार तर्क दिए थे, और अमेरिकी नौकरियों की रक्षा की आवश्यकता पर बल दिया था।
इसके अलावा, टॉम फिटन जो कि दक्षिणपंथी संगठन ज्यूडिशियल वॉच के अध्यक्ष होने के नाते अमेरिकी तकनीकी क्षेत्र में विदेशी कर्मचारियों को प्रवेश देने वाली आव्रजन नीतियों के सख्त आलोचक रहे हैं, का तर्क है कि ये लोग अमेरिकी वर्कर्स और उनके वेतन को कमजोर करने का काम करते हैं।
लोकलुभावन कट्टरपंथी सीनेटरों में से एक सीनेटर जोश हॉले ने विदेशी तकनीकी कर्मचारियों के द्वारा अमेरिकी नौकरियों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंता जताई है।
सीनेटर टेड क्रूज़ एक और प्रमुख व्यक्ति हैं जो कई बार H-1B वीज़ा कार्यक्रम के खिलाफ़ सामने आए हैं।
रूढ़िवादी मीडिया पर्सनालिटी लॉरा इंग्राहम भी प्रवासी श्रमिकों के पक्ष में आव्रजन नीतियों की एक मुखर आलोचक रही हैं, जो अक्सर अपने प्रसारणों में अमेरिकी श्रमिकों पर इसके नकारात्मक प्रभावों पर चर्चा करती रहती हैं।
लेकिन वहीं ट्रम्प समर्थक खेमे में विदेशी तकनीकी कर्मचारियों की अधिक आमद के पक्ष में कुछ बेहद अहम व्यक्तित्व भी मौजूद हैं।
एलन मस्क, जो स्वंय टेस्ला और स्पेसएक्स जैसे तकनीकी उद्योगों के मालिक हैं, कुशल विदेशी श्रमिकों की संख्या में इजाफ़ा किये जाने के एक प्रबल समर्थक रहे हैं, और उनका तर्क है कि नवाचार और आर्थिक विकास के लिए ऐसा करना आवश्यक है।
इसी तरह, विवेक रामास्वामी, जो कि एक उद्यमी होने के साथ-साथ राष्ट्रपति पद के लिए भी उम्मीदवार थे, लेकिन अब एलन मस्क के साथ ट्रम्प का समर्थन करते हैं, प्रौद्योगिकी में देश की प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त को बनाए रखने के लिए वैश्विक प्रतिभा को आकर्षित करने के महत्व पर जोर देते हैं।
ट्रम्प के अन्य कॉर्पोरेट समर्थक जो विदेशी तकनीकी कर्मचारियों के मामले में उदार आव्रजन नीतियों का समर्थन करते हैं, उनमें से कुछ प्रमुख नाम इस प्रकार से हैं:
फेसबुक (अब मेटा) के सह-संस्थापक मार्क जुकरबर्ग ऐतिहासिक तौर पर कुशल श्रमिकों के आव्रजन के पक्ष में रहे हैं, और इस बारे में उनका तर्क है कि यह तकनीकी उद्योग और समग्र रूप से अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है।
माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्य नडेला उन आव्रजन नीतियों के समर्थक रहे हैं, जो तकनीकी कंपनियों को विदेशों से कुशल कर्मचारियों को नियुक्त करने की अनुमति प्रदान करती है, और जो नवाचार को बढ़ावा देने के लिए विविध प्रतिभाओं की आवश्यकता पर प्रकाश डालती हैं।
एप्पल के सीईओ टिम कुक ने आव्रजन में सुधार का समर्थन किया है जिसमें विदेशी तकनीकी कर्मचारियों को काम पर रखने की सुविधा प्रदान की गई है और रचनात्मकता एवं नवाचार को बढ़ावा देने के लिए विविध कार्यबल के महत्व पर बल दिया गया है।
इन हस्तियों के अलावा सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग परिषद (ITI) और कम्पीट अमेरिका गठबंधन जैसे तकनीकी उद्योग संगठनों ने लगातार H-1B वीजा आवंटन में वृद्धि की पैरवी करते हुए यह तर्क दिया है कि तकनीकी क्षेत्र महत्वपूर्ण अंतराल को भरने के लिए कुशल विदेशी श्रम पर काफी हद तक निर्भर करता है।
2021 में, अमेरिका में सभी STEM (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) में अप्रवासी श्रमिकों की कुल श्रमिकों में 19% की हिस्सेदारी थी, जिसके फलस्वरूप अमेरिकी पूंजीवाद तकनीकी रूप से विश्व में सबसे व्यवहार्य हो सका। तकनीकी कर्मचारियों के मामले में अमेरिकी घरेलू श्रम बाजार इतना व्यवहार्य नहीं है कि वह विदेशियों के कार्यबल के बीस फीसद हिस्से को स्थानापन्न कर सके।
असल में अमेरिकी कॉरपोरेट विदेशी मूल के तकनीकी कर्मचारियों को अपेक्षाकृत कम वेतन पर नियुक्त करते हैं, लेकिन अंधराष्ट्रवादी इन पूंजीपतियों का विरोध नहीं करते बल्कि स्थानीय नौकरियों को हथियाने के नाम पर नस्लवादी स्वर के साथ अप्रवासियों की मुखालफत करते हैं।
भारतीय बिजनेस मीडिया का एक वर्ग एलन मस्क को भारत और भारतीय अप्रवासी श्रमिकों का मित्र बताता आया है, जो कि गलत है। एलन मस्क अप्रवासियों के मित्र नहीं हैं। 2022 में, टेस्ला में एक H1B वीजा धारक (यानी, एक अप्रवासी कर्मचारी) ने प्रति वर्ष 1,46,239 डॉलर की कमाई की, जबकि स्थानीय अमेरिकी तकनीकी कर्मचारी ने इसी काम के लिए प्रति वर्ष 1,95,859 डॉलर की कमाई की (स्रोत: https://www.myvisajobs.com/Visa-Sponsor/Tesla/1003567_Salary.htm)।
अप्रवासी श्रमिकों के खिलाफ एलन मस्क का वेतन में यह भेदभाव या इसे सरल भाषा में कहें तो अप्रवासी श्रमिकों का अत्यधिक शोषण है!
(बी. सिवरामन स्वतंत्र शोधकर्ता हैं। sivaramanlb@yahoo.com पर उनसे संपर्क किया जा सकता है।)
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