नई दिल्ली। सियाचिन के शहीद और कीर्ति चक्र विजेता कैप्टन अंशुमान सिंह की मां ने सरकार से अग्निवीर योजना पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
रायबरेली में विपक्ष के नेता स्थानीय सांसद राहुल गांधी से मुलाकात में मंजू सिंह ने कहा कि “हाथ जोड़कर मैं सरकार से निवेदन करती हूं कि वह अग्निवीर योजना को बंद कर दे। यह चार साल के लिए है और यह सही नहीं है। पेंशन, कैंटीन और दूसरी सुविधाएं जो एक सैनिक को दी जाती हैं वह जारी रहनी चाहिए।”
आपको बता दें कि 5 जुलाई को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कैप्टन अंशुमान सिंह को मरणोपरांत कीर्ति चक्र पुरस्कार से नवाजा था। अंशुमान पंजाब रेजिमेंट की 26वीं बटालियन के आर्मी मेडिकल कॉर्प के सदस्य थे। वह 18-19 जुलाई की रात को सियाचिन स्थित हथियारों की एक गोदाम के पास मेडिकल फैसिलिटी से जब कुछ दवाएं लेने गए तभी शार्ट सर्किट से उसमें आग लग गयी जिसमें वह जल गए और आखिर में उन्हें बचाया नहीं जा सका।
इसी दौरान मेडिकल फैसिलिटी की तरफ जाने से पहले हथियारों के गोदाम के पास स्थित फाइबर ग्लास की झोपड़ी के बीच फंसे कई दूसरे लोगों को उन्होंने बचाया भी।
पुरस्कार समारोह के बाद रक्षा विभाग ने अंशुमान की विधवा स्मृति सिंह का एक वीडियो जारी किया, जो अंशुमान के साथ 8 सालों से रिश्ते में थीं जिसको उन्होंने औपचारिक तौर पर पिछले साल की फरवरी में विवाह में बदल दिया।
स्वर्गीय कैप्टन सिंह ने पुणे स्थित आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल कॉलेज से पढ़ाई की थी। सियाचिन जहां वह आपरेशन मेघदूत के हिस्से के तौर पर तैनात थे, उनकी पहली पोस्टिंग थी।
स्मृति ने याद करते हुए बताया कि दुर्भाग्य से शादी के दो महीने के भीतर उन्होंने सियाचिन में पोस्टिंग पायी। 18 जुलाई को अगले 50 सालों में हमारा जीवन कैसा होगा इसको लेकर उनसे लंबी बातचीत हुई- हम एक घर बनाएंगे और बच्चे होंगे।
अगली ही सुबह उन्हें बताया गया कि कैप्टन सिंह अब नहीं रहे।
शहीद अंशुमान के पिता रवि प्रताप सिंह ने बताया कि हम राहुल गांधी से अलंकरण समारोह के दौरान मिले थे। विपक्ष के नेता के तौर पर राहुल गांधी भी वहां मौजूद थे। क्योंकि वह रायबरेली में थे और हम लोग लखनऊ में रहते हैं। हमने उनसे मिलने के बारे में सोचा। मैंने अपना युवा पुत्र खो दिया है। राहुल गांधी ने भी अपनी दादी और पिता को खोया है। वह इस भावना को समझ सकते हैं।
मंजू सिंह ने बताया कि ज्यादा बातचीत सेना और अग्निवीर योजना को लेकर हुई। उन्होंने बताया कि वह सही हैं। दो तरह के सैनिक नहीं हो सकते हैं। उन्होंने जो कहा है सरकार को उसके बारे में सोचना चाहिए।
गौरतलब है कि संसद के भीतर 1 अप्रैल को दिए गए अपने भाषण में राहुल गांधी ने चार सालों के लिए सैनिकों को भर्ती करने की नरेंद्र मोदी सरकार की योजना को ‘इस्तेमाल करो और फेंको’ योजना करार दिया था। इससे सदन में काफी बवाल मचा था। यहां तक कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हस्तक्षेप भी किया था।
जम्मू-कश्मीर के नौशेरा सेक्टर में 18 जनवरी को लैंडमाइन विस्फोट में शहीद हो गए अग्निवीर अजय कुमार के बारे में विपक्ष के नेता का कहना था कि सरकार ने सैनिक के परिवार को मुआवजा नहीं दिया है।
राहुल गांधी इस भर्ती योजना के खिलाफ खुल कर बोलते रहे हैं। जिसके बारे में उनका कहना है कि वह सैनिकों के बीच भेदभाव करती है।
सरकार ने राहुल गांधी के आरोपों को खारिज कर दिया था। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने दावा किया था कि शहीद के परिवार को एक करोड़ रुपये दिए गए हैं। जबकि परिवार का कहना था कि पंजाब सरकार ने कुछ सहायता का प्रस्ताव ज़रूर दिया था लेकिन केंद्र की तरफ से कुछ नहीं आया।
भारतीय सेना ने एक्स पर एक पोस्ट के जरिये कहा कि 98.39 लाख रुपया पहले ही परिवार को दिया जा चुका है। बयान में मुआवजे को अलग-अलग कर नहीं पेश किया गया था। बहुत सारे टिप्पणी करने वाले जो सेना और अग्निवीर योजना से परिचित थे, ने लिखा कि 48 लाख इंश्योरेंस का हिस्सा था जिसका वह पहले से ही हकदार है। वह मुआवजा नहीं है।
(ज्यादातर इनपुट द टेलिग्राफ से लिया गया है।)
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